Friday, 25 August 2017

लालू प्रसाद यादव

*लालू प्रसाद यादव एक विचारधारा का नाम है,
 एक टेप चला कर उन्हें सीमित नहीं किया जा सकता*
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*लालू यादव ने शंकराचार्य की नियुक्ति में की आरक्षण की मांग, ब्राह्म्णवादी तिलमिलाए ।*
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*लालू प्रसाद यादव' के नाम मात्र से सामन्तवाद की रूह कांप उठती है...*
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*बहुत जान बाकी है लालू यादव में , सारा सिस्टम…सारी सरकारी मशीनरी और कारपोरेट लालू यादव के पीछे हाथ धोकर पड़े हैं| न्यायपालिका से लेकर कार्यपालिका तक , सड़क से लेकर संसद तक अगर ध्यान से देखा जाए तो लालू यादव को खलनायक साबित करने के लिए विरोधियों में गलाकाट प्रतियोगिता चल रही है| लालू यादव की हुंकार ने विरोधियों की नींद हराम कर दी है इसलिए साजिश के तहत उन्हें बदनाम करने की कोशिशें तेज है पर इन ताकतों को लालू यादव की ताकत का अंदाजा नहीं| लालू यादव की खासियत ये है कि जितना उन्हें परेशान करने की कोशिशें होती हैं वे और मजबूती के साथ उभर जाते हैं|*
*शहाबुद्दीन प्रकरण को कोर्ट देख रहा है और यह सर्वविदित है कि वे राष्ट्रीय जनता के नेता रहे हैं और हैं तो ऐसे में लालू यादव ने फोन फर उनसे बात करके कोई गुनाह कर दिया क्या ?*
*संविधान की कौन सी धारा में ऐसा लिखा है ? हाँ नैतिकता का तकाजा हो सकता है पर सारी नैतिकता का ठिका क्या लालू यादव ने ही ले रखा है ? नैतिकता तब क्यूँ नहीं सूझ रही थी जब सहारा बिरला कि डायरी में प्रधानमंत्री जी का नाम आया था |* *नरेंद्र मोदी सरकार लालू यादव के नाम से थरथर कांप रही है| राजगीर में लालू यादव के नए अवतार ने भाजपाईयों को भयभीत कर दिया है बस और कुछ नहीं|*
*लालू यादव सिर्फ एक व्यक्ति का नाम नहीं है । लालू यादव अपने आप में एक संस्थान है । आप साधारण घटना या साधारण तथ्यों से लालू यादव को सूचीबद्ध नहीं कर सकते है ।*
*आप एक घटना से अन्दाज लगाइए । लालू यादव जी को सांसद से हटाने और चुनाव लड़ने से रोकने के लिए देश का कानून बदल दिया जाता है ।*
 *संविधान में संशोधन कर दिए जाते है । आप मुझे बता दीजिए की विश्व इतिहास में ऐसा कभी हुआ था क्या ? अगर हाँ तो हमें ऐसी किसी घटना से लिंक कराइए । नहीं मिला न ।*
*और आप सोंचते है कि एक टेप चलाकर लालू यादव को सिमित कर देंगे तो फिर आप की बुद्धि विवेक पर हमें तरस आती है ।*
*लालू यादव को जेल में डाल दिए । संसद में रोक दिए । अब फांसी दे दीजिए । क्या फर्क पड़ेगा ? लालू को तो जो करना था वो कर चुके है ।*
*और बेहतर रोजगार -शिक्षा की बात कौन नहीं करना चाहता ? कौन नहीं चाहता की इस दिशा में बात हो ? मैंने स्वयं पिछले कई महीनो से बिहार की शिक्षा व्यवस्था और रोजगार पर बात करना चाहा । सैकड़ो पोस्ट भी लिखे । लेकिन कुछ लोगो को तो बस जाति पसन्द है । अर्णव जैसे लोग भी उसी कैटेगरी के है । नरेंद्र मोदी को लेकर अब तक दो टेप सार्वजनिक हुए है । एक लड़की के जासूसी तो दूसरा सहारा घोटाले की डील। लेकिन किसी मीडिया के लिए यह खबर नहीं बनी । क्यों नहीं बनी ? क्या मीडिया को मोदी का डर है ? और जो लोग लालू शहाबुद्दीन प्रकरण में हमें सिख दे रहे है वो मोदी वाले टेप की बात क्यों नहीं करते है ? आखिर वे उस मामले पर चुप क्यों है ? मोदी देश का पीएम है । उन पर ज्यादा चर्चा होनी चाहिए ।*
*लालू यादव क्या है ? कुछ भी तो नहीं है । विधायक तक वो बन नहीं सकते । फिर डर किस बात के ? इतनी जलन किस बात की ?*
*तो असल में यही जलन तो लालू यादव को बाकियो से अलग करता है । यही तो इन्हें महान बनाती है । आप जलन रखिये, क्या फर्क पड़ता है ?*
 *आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने शंकराचार्य के पद पर चले आ रहे अघोषित आरक्षण पर प्रहार कर ब्राह्मणवाद पर हमला बोला है।*
 *उन्होंने कहा कि शंकराचार्य पद पर आरक्षण हो। शंकराचार्य के 4 में से 3 पद दलित, आदिवासी और पिछड़ों को मिले। हम इसके लिए आंदोलन करेंगे। उन्होंन सवाल उठाया कि क्यों ब्राह्मण ही शंकराचार्य बनते हैं? यह सामाजिक न्याय के खिलाफ है।*
*उनकी इस मांग के बाद सोशल मीडिया पर भी शंकराचार्य के पद को लेकर बहस तेज हो गई है।*
*इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर एक बहस शुरू हो गयी । लोग अपनी अपनी राय दे रहे थे । कुछ लोगों का मानना था कि लालू जी के इन बातों से सहमत है कि शंकराचार्य का पद किसी एक ही जाति के व्यक्ति को नहीं मिलना चाहिए । 1200 सालो से एक ही जाति के अंदर इस पद की मेरिट रही, विचारणीय है । ऐसा भला कैसे हो सकता है कि एक ही जाति के अंदर 1200 साल तक एक ही विशेष गुण समाहित रहे ।*
*वहीं कुछ लोग इस ट्वीट के बहाने लालू यादव की पार्टी में उनके परिवार के एकाधिकार पर सवाल उठा रहे थे । उनका कहना था कि ये कैसी सामाजिक न्याय की लड़ाई है जहां सिर्फ एक ही परिवार का आधिपत्य रहा है । वही दूसरी ओर भक्तों की एक बड़ी फौज लालूजी के परिवार और उनके निजी जीवन की धज्जियां उड़ाने व्यस्त थे और अपने संस्कार का परिचय दे रहे थे । बौखलाहट की तीव्रता इतनी अधिक थी मानों किसी परित्यक्ता स्त्री ने अपने अधिकार मांग लिए हो ।*
 *लोग कहते हैं कि हनुमान चालीसा पढ़ने से भूत-प्रेत भाग जाते हैं, अब यह तो निश्चित नहीं है कि कोई भूत-प्रेत है या नहीं अथवा हनुमान चालीसा पढ़ने से ऐसा कोई चमत्कार हो जाता है या नहीं पर यह तो निश्चित है कि वर्तमान सन्दर्भ में लालू प्रसाद यादव जी का नाम ऐसा नाम है जिसके उच्चारण मात्र से शोषण करने वाले अभिजात्य समाज का रोम-रोम फूट जाता है, अन्यायी मीडिया अपनी सारी मर्यादा भूल जाती है,साम्प्रदायिक ताकतें बिलबिला उठती हैं, सामाजिक न्याय विरोधी शक्तियां हाँफने और कांपने लगती हैं। लालू नाम ही इन धनजोर, मनजोर, बलजोर शक्तियों को कँपकँपी ला देता है क्योंकि यह लालू तनहीन, मनहीन, बलहीन, धनहीन लोगों की ताकत है, आवाज है और संघर्ष का प्रतीक है।*

*लालू प्रसाद यादव शोषक तबकों को गड़ते हैं क्योंकि वे पीड़ितों के लिए लड़ते हैं, सामंतवादियों को चुभते हैं क्योकि वे सामंती सत्ता को चोटिल करते हैं, साम्प्रदायिक लोगों को धँसते हैं क्योकि वे इन्हें छेड़ते हैं, पीड़ा देने वालो को अंदर तक सालते हैं क्योकि वे इन्हें ललकारते हैं। ऐसा हो भी क्यों नही क्योंकि लालू तो लालू हैं। लालू न झुकते हैं और न रुकते हैं। लालू को चाहे जितना दबाओ पर लालू ललकार हैं, हुंकार हैं और आंदोलन हैं।*
  *लालू प्रसाद यादव को इस देश का मुंहजोर तबका किसी कोण से बख्शा नहीं है पर लालू भी न हारे हैं और न थके हैं। लालू एक अपराजेय योद्धा की तरह अनवरत लड़ते रहे हैं और जंग फतह करते रहे है।*
*इस देश का अभिजात्य समाज लालू को क्या-क्या नहीं कहा और साबित किया है पर लालू ने निश्चिंत भाव से सदैव दलितों, पिछडो और अल्पसंख्यकों के हित में आवाज बुलंद की है, भले ही इसके एवज में उन्हें बहुत कुछ खोना पड़ा है लेकिन लालू न थके,न हारे और न निराश ही हुए है।*
*पटना विश्वविद्यालय का प्रेसीडेंट और कमेरे समुदाय का लोकतंत्र सेनानी जिसने देश मे तानाशाही के विरुद्ध सँघर्ष करते हुए अपना यौवन जेल में बिताया उसे अहीर होने की सजा भुगतनी पड़ी है।देश की अभिजात्य पोषक मीडिया लालू को चाराचोर सिद्ध करने में पूरी ताकत झोंक डाली।जिस लालू ने चाईबासा में स्कूटर के नम्बर पर ट्रक चलाने का फर्जीबाड़ा पकड़ा,मुकदमा लिखवाया,वही लालू चारा घोटाले के मुजरिम बना दिये गए।जगन्नाथ मिश्रा साहब के समय घोटाला हुवा और मुजरिम लालू जी भी बना दिये गए।एक ही अपराध में लालू जी को जेल और जगन्नाथ मिश्रा जी को बेल हो गयी।अद्भुत है यह इंतजाम जिसमे मिश्रा को बेल तो यादव को जेल हो जाता है।*
*लालू जी से अनायास ही मुंहजोर लोग नही जलते हैं,उसके पीछे कारण है क्योंकि लालू जी गलजोर लोगो की दवा हैं। लालू जी के शब्दो मे परमाणु बम सदृश विस्फोट है।लालू जी ने अपने राजनैतिक अभ्युदय काल मे जो ऐतिहासिक कार्य किये है वे देश की यथास्थितिवादी ताकतों के लिए नासूर है।लालू जी ने रामरथ रोक के देश की कम्युनल ताकतों को खुलेआम चुनौती दे डाली थी तो वहीं उन्होंने खुद को सोशल जस्टिश के मुद्दे में झोंक डाला था।मण्डल की लड़ाई को फतह करने के लिए लालू जी ने रामजेठमलानी जैसे ख्यातिप्राप्त वकील को खड़ा कर पिछड़े वर्गों को हक़ दिलाने की जोरदार पहल कर सम्पूर्ण सामाजिक न्याय विरोधी ताकतों को चुनौती दे डाली थी।*
 *कमेरे वर्गों को उनकी ताकत का अहसास दिलाने के लिए लालू जी कुर्ता के ऊपर बनियान पहन के सभाओं में जाते थे। सभा में जुटी भीड़ लालू जी के इस अनोखे अंदाज पर खूब लोटपोट होती थी लेकिन जब लालू जी इस अनोखे पहनावे की व्याख्या करते थे तो उसकी गूढ़ता का क्या पूछना? लालू जी कहते थे कि ऐ! शोषित-पीड़ित लोगों! यह बनियान हमेशा नीचे रहता है, पसीना खाता है और इसी की बदौलत कुर्ता और जैकेट इतराता है लेकिन बनियान को कभी भी तवज्जो नही मिलती है। यह लालू अब कुर्ता और जैकेट को नीचे तथा बनियान को ऊपर उठाने का संकल्प लेकर आपके बीच आया है।*
*लालू जी की 1990 के बाद  की कोई सभा बिना विवाद के सम्पन्न नही हुई क्योंकि लालू जी खरखोंच के बोलते थे। लालू जी बेलाग, बेलौस यथार्थ कहते थे और सामाजिक न्याय के लिए सतत संघर्ष करते थे। लालू जी की इसी अदा ने अन्य पिछड़े-दलित नेताओं की तुलना में उन्हें सर्वाधिक लोकप्रिय बनाया तो सामंती ताकतों का सबसे बड़ा प्रतिरोधक और मुखालिफ भी और यही कारण था कि देश की अभिजात्य समर्थक मीडिया,प्रशासनिक मशीनरी और दीगर ताकते उनको अपने दुश्मन की तरह ट्रीट कीं। लालू जी देश भर के चैतन्य समाज के आंख की किरकिरी बने तो वह तबका जिसके लिए लालू जी खलनायक सिद्ध किये गए उसने भी उनके ऊपर कहानियां बना डाली।बड़ा कठिन है भारतीय वर्ण व्यवस्था में इस जातिगत/वर्णगत अन्याय का प्रतिकार करना।*
*लालू जी ने एक बार ब्राह्मणवाद की खिल्ली उड़ाते हुए लालकिला के मैदान में कहा था कि ब्राह्मणवाद हमारे रोम-रोम में बसा हुआ है। जनेऊ पहनने वाले श्रेष्ठ तो जनेऊ न पहनने वाले को निम्न माना जाता है। उन्होंने कहा था कि कान पर जनेऊ लपेटके कुछ लोग छुल-छुल पेशाब करते हैं जबकि मैं बिना कान पर जनेऊ लपेटे हद-हद,हद-हद मूतता हूँ। लालू जी के इस व्यक्तव्य में कुछ लोग भद्दगी तलाशेंगे लेकिन लालू जी के इस ठेठ बोल में पाखण्ड, अंधविश्वास और ब्राह्मणवाद पर करारा प्रहार है। लालू जी पोथी-पतरा फूंकने, मठों और मंदिरों की जमीन गरीबो में बांटने की बात कह एक नयी क्रांति का आगाज किये थे जिसे मनुवादियो ने उन्हें अपने मकड़जाल में फँसाके गुम सा कर दिया।*
*लालू जी साम्प्रदायिकता के सबसे बड़े मुखालिफ के रूप में देश मे जाने जाते हैं। लालू जी ने आडवाणी जी के अश्वमेध के घोड़े सरीखे रथ को रोक के देश ही नहीं वरन दुनिया में एक ऐसा झंडा गाड़ दिया था जिसे हाल-फिलहाल शायद ही कोई दूसरा दुहरा पाए। लालू जी ने अकेले अपने वैचारिक प्रतिबद्धता और उस पर पूरी अक्खड़ता से कायम रहते हुए मोदी जी के कथित मोदी लहर को बिहार में फुस्स कर यह दिखा दिया कि लालू में अभी बहुत दम है।मोदी जी बिहार में हांकते रह गए पर लालू जी के सामने उनकी एक न चल सकी। लालू जी ने बिहार में मोदी जी को ऐसी पटखनी दी कि वे यूपी में जीत कर उससे उबर पाए हैं। लालू जी पर उनकी अक्खड़ता, सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता एवं सेक्युलर प्रबृत्ति के कारण बराबर हमले होते रहते हैं। लालू जी के चरित्र हनन से लेकर उनके राजनैतिक जीवन पर कई-कई बार ग्रहण लगाए गए हैं पर लालू हैं कि एक नई स्फूर्ति के साथ हर बार बाहर निकल आते हैं। पूर्व सांसद शहाबुद्दीन से जोड़के लालू जी की छबि को धूमिल करने की कुचेष्टा साम्प्रदायिक ताकतों के इशारे पर शुरू है लेकिन जनता सब जानती है।यह मीडिया लालू जी के ऊपर कीचड़ उछालने का कोई प्रयत्न छोड़ती नही है लेकिन लालू जी अपनी सामाजिक न्याय एवं सेक्युलरिज्म की प्रतिबद्धता से कभी किनारा नही करते हैं। लालू जी ने यदि अपने दल के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन से बात कर लिया तो वह इशू बनता है लेकिन अमित शाह जी का अपराध उनके लिए स्वर्ण पदक होता है। लालू जी राजनेता होते हुए अपराधी सरीखे देखे जाते हैं जबकि केशव मौर्य जी दर्जनों आपराधिक मुकदमो में फंसे होने के बावजूद रामभक्त हैं।*
*लालू जी पर किसी भी तरह का हमला एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। लालू जी हम सबके नायक हैं, सामाजिक न्याय के मजबूत अलमबरदार हैं। हम सभी लालू जी के मुहिम को और तेज बनाएं और लालू जी के मिशन पर आगे बढ़ें वरना देश एक नए फासीवाद में फंस जाएगा।*
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*1988 से लेकर अब तक लालुजी को जो समझा है उसी  पर अधारीत मेरा  उपयुक्त संवाद*
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*प्रेषक-नरेंद्र मोहन*
*(a liaisoner)*


 हाल-फिलहाल सम्पूर्ण भारतवर्ष में लालू प्रसाद यादव जी से बड़ा सामाजिक न्याय का अलमबरदार और सेक्युलरिज्म का झंडाबरदार कोई नही दिख रहा है।यह लालू सचमुच लालू है जिसमे दुश्मनो से मुकाबला करने की असीम ऊर्जा,अनन्त दुश्वारियों को सहने की क्षमता,समता-समानता के लिए संघर्ष की अदम्य शक्ति,अपनो के प्रति अतुलनीय भक्ति,साम्प्रदायिकता के नाश का जज्बा,गरल पीने और अमृत बांटने की हिम्मत,एक साथ सहस्त्रो वार बर्दाश्त करने की ताकत इस लालू में है।यह लालू न डरने वाला है,न टूटने वाला है और न झुकने वाला है।इस लालू को जितना दबाया जाएगा,यह उतना ही उबाल खायेगा,उछलेगा और पहाड़ बनकर दबाने वालो पर गिरेगा।यह लालू अटल है,यह लालू अमोघ है,ये लालू अनश्वर है और यह लालू अपराजेय है।
       यह लालू कोई लाह का टोटा या कोई कुम्हड़ का बतिया थोड़े न है कि जो आंख तरेरने और तर्जनी दिखाने से मुरझा जाएगा।लालू पटना यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति का तपा हुवा कुंदन है,लालू जेपी मूवमेंट का ट्रेंड समाजवादी कार्यकर्ता है,लालू इमरजेंसी झेल चुका देश का लोकतंत्र सेनानी है,लालू अभिजात्य समाज की नफरत के खौलते कड़ाह से तलकर साबुत निकला योद्धा है,लालू वंचितों की वकालत के कारण केंद्र की सामंती हुकूमतों द्वारा क्रश किया गया ऐसा हीरा है जिसे जितना तोड़ो,वह उतना ही चटकदार बनता जाएगा।
       लालू में हिम्मत का विशाल भंडार है।लालू में जनमत का अपार खजाना है।लालू को गरीबो का असीम प्यार है।लालू को शोषितों का बेसुमार आशीर्वाद है।लालू को देश के अकलियत तबको का बेइन्तहा दुलार है।लालू कोई एक लालू थोड़े न है,लालू तो अथाह है,अनन्त है,असीम है।लालू इस देश के गरीबो,किसानों,मजलूमों, मजबूरों,शोषितों,पीड़ितों,पिछ्डों, दलितों,अकलियतों के दिलों में हैं।ऐ!सामंती लोगों! वहां तुम्हारा छापा कैसे पड़ेगा,जहां (करोड़ो दिलों में) लालू अमिट रूप में अंकित है।लालू तो अब अजर-अमर हो गया है गरीबो की आह में,उनके वाह-वाह में।लालू को दबाना,मिटाना,घटाना, हटाना अब दुरूह है मनुवाद के पोषक लोगो!लालू अब आलू की तरह है मतलब बकौल लालू प्रसाद यादव "जब तक आलू है तब तक लालू है।"
         देश की सरकार में कांग्रेस रही तो भी लालू पर सीबीआई का छापा, भाजपा की है तो भी सीबीआई का छापा,आखिर लालू में ऐसा क्या है कि कांग्रेस की सरकार हो तो भी और भाजपा की सरकार हो तो भी सीबीआई का छापा केवल लालू के वहां ही पड़ता है?आखिर क्यों लालू को ही चुनाव लड़ने से रोकने के लिए राहुल गांधी सन्सद में प्रस्तावित बिल फाड़ कर फेंक डालते हैं?
       क्या लालू का मण्डल प्रेम उन्हें सबकी नजर की किरकिरी बनाये हुए है?क्या लालू के आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट में रामजेठमलानी जी सहित वकीलों का पूरा समूह खड़ा करना लोगो को सालता है?क्या धर्मनिरपेक्षता की नीति के लिए खुद के सरकार की कुर्बानी तक देने को तैयार रहे लालू सभी को गड़ते हैं?क्या लालू द्वारा वंचितों में नेतृत्व पैदा कर उन्हें राजसत्ता की भूख जगाना,सबको परेशान किये हुए है?क्या महिला आरक्षण बिल का प्रतिकार करना लालू को भारी पड़ रहा है?क्या जातिवार जनगड़ना का प्रबल समर्थन करना लालू को बैरी बनाये हुए है?क्या लालू का गरीबो के पक्ष में मजबूती से खड़े रहना सबको परेशान किये हुए है?आखिर लालू को ही दशकों से क्यो टारगेट की हुई हैं केंद्र की सरकारें?
         लालू प्रसाद यादव चारा चोर है क्योंकि उन्होंने चाईबासा कोषागार (अब झारखंड)में हुई लूट को संज्ञान में लेकर सबसे पहले जांच शुरू कराई थी और एफआईआर दर्ज कराया था।कोई बुद्धिजीवी या हमारे वंचित समाज का तथाकथित समझदार आदमी जो लालू जी का आलोचक है,प्रातः स्मरणीय श्री जगन्नाथ मिश्र जी को चारा चोर कहता है?अरे बौद्धिक बेईमानों! जिस जगन्नाथ मिश्र ने चारा घोटाला कराया ,उसे चारा चोर नही बोलते और बचपन से अब तक चारा खिलाने वाला लालू चारा चोर हो गया?जिस लालू के पुरखे गोपाल हैं,जिस लालू का पुश्तैनी पेशा पशुपालन और चारा खिलाना है वह लालू चारा चोर और वे लोग जो पशुओं का पशुशाला खोलके उनका अनुदान गटक जाते हैं,सैकड़ो गाये उनकी पशुशाला में मृतक पाई जाती हैं वे गोभक्त?अजब पैमाना है,गजब जमाना है?
       लालू जी जब दशक पूर्व रेलमंत्री थे तो उनके बेटे नाबालिग थे,बेटी पढ़ रही थी,पत्नी का रेल मंत्रालय से कोई मतलब नही था लेकिन दशक बाद रेल घोटाला के नाम पर ये सभी मुजरिम बनाये जा रहे हैं।लालू जी ने बिना किराया बढ़ाये घाटे में अरसे से चल रही रेल को मुनाफे में लाया।लालू जी के इस चमत्कार से चतकृत हो दुनिया की यूनिवर्सिटियां उन्हें ब्याख्यान पर बुलाईं।लालू जी विश्व मे ऐसे गुरु बनकर उभरे कि जो बिना दाम बढ़ाये जन सुविधाएं देते हुए विभाग को घाटे से मुनाफे में ला दे।यह तिलिस्म और जादू लालू जी की नीति,सोच और कार्यपरायणता में था।लालू जी ने लम्बे समय तक कोई किराया नही बढ़ाया लेकिन रेल को रेलकर मुनाफा दिलाया।
     लालू पशुपालक घर के निकले नेता हैं।उन्हें पता है कि गाय के रूप में अपनी पूंजी सुरक्षित रख कैसे उससे दूध,दही,घी,छाछ,मक्खन,पनीर,राबड़ी,खोवा आदि निकाला जाता है,कैसे उसके गोबर तक से खाद और उपला बनाके अतिरिक्त मुनाफा कमाया जाता है?लालू जी ने अपनी बुद्धि से ऐसी तकनीक अपनायी कि "आम के आम,गुठलियों के दाम" की कहावत को चरितार्थ कर डाला।लालू जी ने रेलवे मिनिस्टर रहते हुए बुजुर्गों,महिलाओं,विकलांगो को खूब सुविधाएं दीं, स्टेशन,रेलपथ,कर्मचारी आदि सभी लालू जी के साथ सुकून पाए।लालू जी उद्योग गुरु बनके उभरे।दुनिया के उद्योगपति लालू जी के गुर को सीखने हेतु लालायित दिखे और अब भाजपा की सरकार को दशक भर बाद उस लालू में रेल घोटाला नजर आ रहा है।
         भारतीय जनता पार्टी की पिछली सरकार ने दुनिया के इतिहास में अकेले भारत मे सरकारी कम्पनियों को बेचने हेतु विनिवेश मंत्रालय बना दिया था जिसने औने-पौने दाम में सरकार की मुनाफे तक कि कम्पनियों को बेच डाला था।बाल्को गवाह है इसकी जो लाभ में चल रही थी और अटल जी की भाजपा की सरकार ने उसे अत्यन्त ही न्यूनतम दाम में बेच डाला।क्या ऐसे साक्षात भ्रष्टाचारों की जांच और उन गुनाहगारो पर कार्यवाही होगी?नही होगी क्योंकि वे सभी प्रभु वर्ग के लोग हैं।ककड़ी का चोर फांसी पर लटकाया जाएगा जबकि विजय माल्या,ललित मोदी आदि प्रभु वर्ग का होने का लाभ उठाएंगे और मनु के विधान के अनुसार दुष्कर्म करने के बावजूद सम्मान पाएंगे।
        आखिर लालू जी को विधानसभा एवं लोकसभा में प्रविष्ट होने देने से क्यो रोका जा रहा है?लालू जी से किसे डर है?लालू जी किसकी सेहत के लिए फायदेमंद नही हैं?लालू जी को और उनके परिवार को तबाह करने की साजिश क्यो हो रही है?लालू जी मे ऐसा क्या है कि जमाने भर के लोग उन्हें समूल मिटाने पर तुले हैं?जो आदमी गरीबों की मदद करता हो,जो व्यक्ति विचारधारा पर अटल रहता हो,जिसकी सोच स्पष्ट हो उसे कांग्रेस या भाजपा क्यो तोड़ना चाहती है?यह लालू इनके लिए बला क्यो है?लालू ने क्या किसका बिगाड़ा है?लालू ही आंखों में किरकिरी क्यो है?लालू पर छापो का निहितार्थ क्या है?क्या इस देश मे लालू अकेला चोर है?
          असल मे लालू आधुनिक समुद्र मंथन का अकेला ऐसा आधुनिक राहु-केतु है जिसे पता है कि अमृत कौन चुराए हुए है।वंचितों का हक कौन लूटे हुए है।सत्ता की चाभी कहाँ है?कहाँ वॉर किया जाएगा तो शोषित लोग शोषण मुक्त होंगे?भाजपा मुखिया का प्राण किस तोते में है?लालू को सटीक इल्म है कि 2019 में भाजपाइयों को सत्ताच्युत करने का फार्मूला क्या है?
          लालू जी ने 2019 में भाजपा को परास्त करने का जो खाका तैयार किया है उससे पूरी भाजपा,संघ,पूंजीपति,मीडिया और मनुवादी जमात घबराई हुई है।बिहार के असेम्बली इलेक्शन को पूरा देश देख चुका है कि एक तरफ पूरी मोदी जी की सेना चाक-चौबंद हथियारों से लैश खड़ी थी तो दूसरी तरफ अभिमन्यु की तरह बूढ़ा लालू पहड़ रहा था।संघ,भाजपा,मीडिया,सामंती ताकतें,साम्प्रदायिकता का जहर बिहार में फुंफकार रहा था तो लालू जैसा गोपाल बंशज साम्प्रदायिकता के फुंफकार को विषहीन कर कालीनाग मर्दन कर रहा था।लालू ने मोदी लहर को बिहार में अकेले अपने बूते रोक दिया था।भाजपा बखूबी समझ रही है कि यदि 2019 में लालू छुट्टा रहा तो भाजपा को विषहीन कर उसके विषदंत निकाल डालेगा,इसीलिए केंद्र की सरकार चुनाव पूर्व ही लालू को निबटा देना चाहती है।
       दुनिया के इतिहास में ऐसा कभी नही दिखा कि कोई व्यक्ति लम्बे समय पूर्व किसी पद पर रहा हो,उसने अपने विभाग को घाटे से लाभ में लाया हो, उसे दशक भर बाद कहा जाए कि इसने अपने उस विभाग में घोटाला किया है।अजीब दास्तां है चारा चोरी की एफआईआर कराने वाला लालू मुजरिम हो गया,रेल को घाटे से उबार के बिना जनता पर भार बढ़ाये मुनाफे में लाने वाला लालू रेल घोटालेबाज हो गया?वाह भाई वाह! अजीब पैमाना है साकी तेरे मैखाने का?जो गुनहगार न हो वह सजा पाए और जिसके पोर-पोर में भ्रष्टाचार हो वह हरिश्चंद्र का तगमा लिए घूमे।
        लालू जी बिहार में राजद,जद यू एवं कांग्रेस गठबंधन को अटूट बनाये रखना चाहते हैं तो यूपी में सपा,बसपा और कांग्रेस का गठबंधन करवाना चाह रहे हैं।यूपी और बिहार में यदि यह गठबंधन बनकर कायम हो गया तो तय मानिए कि भाजपा की 120 सीटें उसी क्षण घट जाएंगी और भाजपा कुल के बावजूद लुल हो जाएगी।जिस दिन यूपी/बिहार में यह गठबंधन बन गया उसी दिन से भाजपा की उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी।भाजपा की सबसे बड़ी बेचैनी यही है कि यह बूढ़ा लालू यदि परेशान न हुवा,निश्चिंत रहा तो यूपी/बिहार में यह गठबंधन करवाके "मोदी-मोदी" की हवा निकाल देगा।

        सीबीआई के द्वारा केंद्र की भाजपा सरकार लालू जी को भयग्रस्त कर रही है।उनके पूरे परिवार को षणयंत्र के तहत फंसाने का दुष्चक्र कर रही है।लालू जी वैदिक  असुर नायक कृष्ण की तरह इंद्र और इंद्र की चालबाज सेना से भिंडे हुए हैं।इस देश के वंचितों के लिए अकेला लालू लड़ रहा है जिसका कहना है कि "हम मिट्टी में मिल जाएंगे लेकिन भाजपा और मोदी सरकार को हटाकर ही दम लेंगे।"

 लालू जी को चाराचोर बनाने का सच-
एक आईपीएस एपी दुराई (जांच अधिकारी-पशुपालन घोटाला) ने माना कि लालू जी को षणयंत्र के तहत फंसाया गया.....
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        कर्नाटक के पूर्व डीजीपी एवं चारा घोटाले के मुख्य जांच अधिकारी श्री एपी दुराई (IPS) ने अपनी आत्मकथा "परसूट आफ ला एंड ऑर्डर"(Pursuit of law and order) में अध्याय 26 "द सीबीआई वर्सेज लालू प्रसाद यादव" (The CBI Vs Lalu Prasad Yadav)  में पृष्ठ 230,231,232 में लिखा है कि सीबीआई ने अपने द्वारा दायर 49 मुकदमो में से 7 में लालू प्रसाद यादव जी को मुजरिम बनाया है।उन्होंने लिखा है कि लालू प्रसाद यादव एवं कुछ आईएएस को फंसाने का गम्भीर षणयंत्र किया गया।देश की न्यायिक व्यवस्था में ऐसा होना ठीक नही है।मीडिया ने भी लालू प्रसाद यादव को बिना मुजरिम सिद्ध हुए खुद ही ट्रायल कर उन्हें अपराधी घोषित कर दिया।
         आईपीएस अधिकारी एपी दुराई की यह स्वीकारोक्ति इस देश के बहुजन,शोषित,दमित समाज को हजार वर्षों से अपराधी,नकारा,असुर,राक्षस आदि घोषित करने की निकृष्ट परम्परा को उद्घाटित करता है।एपी दुराई साहब ने जो कुछ भी अपनी किताब में खुद की आत्मकथा में लिखा है वह वंचित समाज की ऐसी व्यथा कथा है जो शायद ही सुनने को मिले।यह देश और इस देश का तथाकथित बुद्धिजीवी जो सदैव ही परजीवी रहा है कमरों/अर्जकों/उत्पादकों की कमाई का,वह सर्वदा ही श्रम करने वालो को हिकारत की नजर से देखता रहा है और गाहे-बगाहे जब भी मौका पाया है उन्हें अपमानित व लांछित कर ने का कुकर्म किया है जिसका एक घृणित उदाहरण लालू प्रसाद यादव जी को चारा चोर सिद्ध कर डालने का षणयंत्र करना है।
        एपी दुराई जी ने जो इस पशुपालन घोटाले के जांच अधिकारी थे ,स्पष्ट कर दिया है कि लालू जी को व कुछ आईएएस को फंसाने की गहरी साजिश हुई।आखिर लालू जी को फंसाने की साजिश क्यो हुई?आखिर वह लालू जिन्होंने शिवहर कोषागार में हुए खेल का खुलासा कर रपट दर्ज कराया वही लालू मुजरिम क्यो और कैसे हो गये?वह जगन्नाथ मिश्र जिसने इस पशुपालन घोटाले का सृजन किया वह चाराचोर न होकर पण्डित जगन्नाथ मिश्र और खेल को उजागर करने वाले लालू प्रसाद यादव चाराचोर?-अद्भुत ब्याख्या है इस देश का।
         मैं समझता हूं लालू प्रसाद यादव जी का अहीर/पिछड़ा होना ही उन्हें अपराधी घोषित करने के लिए काफी था।सीबीआई द्वारा लालू जी को क्रश करने की योजना को मूर्त रूप दिया गया क्योकि लालू जी इस देश की हजार वर्ष पुरानी सनातन एवं जड़ हो चुकी व्यवस्था को चुनौती दे दिए थे।लालू जी ने रामरथ रोक दिया था।लालू जी ने आरक्षण के लिए पुरजोर जोर लगा दिया था।लालू जी ने मण्डल कमीशन को लागू करवाने के लिए अपनी पूरी पूंजी/ताकत झोंक डाली।लालू जी ने रामजेठमलानी जी को मण्डल कमीशन के केस का वकील हायर कर सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर लड़ाई लड़ने का कार्य किया।लालू जी ने बिहार में मनहीनो को भी जीवंतता दी।दमित-पीड़ित लोग अब लालू जी के कारण बोलने लगे।
         लालू प्रसाद यादव जी वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य के ऐसे महानायक हैं जिन्हें घटा करके कोई राजनीतिक गठबन्धन नही हो सकता है। लालू जी सामाजिक न्याय और साम्प्रदायिक सद्भावना के लिए अपरिहार्य  हैं।लालू जी के मान मर्दन का लगातार प्रयास जारी है ।
(आभार श्री जयंती भाई मनानी जी को जिन्होंने इस पुस्तक "परसूट आफ ला एन्ड आर्डर" के उक्त पन्नो को अपने फेसबुक अकाउंट पर डाला।)



शेरे बिहार लालू प्रसाद यादव को किस तरह से चारा घोटाला में फंसाया गया सुनिए पूर्व आईपीएस व चारा घोटाला के मुख्य जाँच अधिकारी एपी दुराई (IPS) की जुबानी

कर्नाटक के पूर्व डीजीपी एवं चारा घोटाले के मुख्य जांच अधिकारी एपी दुराई (IPS) ने अपनी आत्मकथा “परसूट आफ ला एंड ऑर्डर” (Pursuit of law and order) में अध्याय 26 “द सीबीआई वर्सेज लालू प्रसाद यादव” (The CBI Vs Lalu Prasad Yadav) में पृष्ठ 230, 231, 232 में लिखा है कि सीबीआई ने अपने द्वारा दायर 49 मुकदमो में से 7 में लालू प्रसाद यादव को मुजरिम बनाया है। उन्होंने लिखा है कि लालू प्रसाद यादव एवं कुछ आईएएस को फंसाने का गम्भीर षड़यंत्र किया गया। देश की न्यायिक व्यवस्था में ऐसा होना ठीक नही है। मीडिया ने भी लालू प्रसाद यादव को बिना मुजरिम सिद्ध हुए खुद ही ट्रायल कर उन्हें अपराधी घोषित कर दिया।

आईपीएस अधिकारी एपी दुराई की यह स्वीकारोक्ति इस देश के बहुजन, शोषित, दमित समाज को हजार वर्षों से अपराधी, नकारा, असुर, राक्षस आदि घोषित करने की निकृष्ट परम्परा को उद्घाटित करता है। एपी दुराई साहब ने जो कुछ भी अपनी किताब में खुद की आत्मकथा में लिखा है वह वंचित समाज की ऐसी व्यथा कथा है जो शायद ही सुनने को मिले। यह देश और इस देश का तथाकथित बुद्धिजीवी जो सदैव ही परजीवी रहा है कमरों/अर्जकों/उत्पादकों की कमाई का, वह सर्वदा ही श्रम करने वालो को हिकारत की नजर से देखता रहा है और गाहे-बगाहे जब भी मौका पाया है उन्हें अपमानित व लांछित कर ने का कुकर्म किया है जिसका एक घृणित उदाहरण लालू प्रसाद यादव को चारा चोर सिद्ध कर डालने का षणयंत्र करना है।

एपी दुराई ने जो इस पशुपालन घोटाले के जांच अधिकारी थे, स्पष्ट कर दिया है कि लालू को व कुछ आईएएस को फंसाने की गहरी साजिश हुई। आखिर लालू को फंसाने की साजिश क्यो हुई? आखिर वह लालू जिन्होंने शिवहर कोषागार में हुए खेल का खुलासा कर रपट दर्ज कराया वही लालू मुजरिम क्यों और कैसे हो गये? वह जगन्नाथ मिश्र जिसने इस पशुपालन घोटाले का सृजन किया वह चाराचोर न होकर पण्डित जगन्नाथ मिश्र और खेल को उजागर करने वाले लालू प्रसाद यादव चारा चोर? -अद्भुत ब्याख्या है इस देश का।

मैं समझता हूं लालू प्रसाद यादव का अहीर/पिछड़ा होना ही उन्हें अपराधी घोषित करने के लिए काफी था। सीबीआई द्वारा लालू को क्रश करने की योजना को मूर्त रूप दिया गया क्योंकि लालू इस देश की हजार वर्ष पुरानी सनातन एवं जड़ हो चुकी व्यवस्था को चुनौती दे दिए थे। लालू ने रामरथ रोक दिया था। लालू ने आरक्षण के लिए पुरजोर जोर लगा दिया था। लालू ने मण्डल कमीशन को लागू करवाने के लिए अपनी पूरी पूंजी/ताकत झोंक डाली। लालू ने रामजेठमलानी को मण्डल कमीशन के केस का वकील हायर कर सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर लड़ाई लड़ने का कार्य किया। लालू जी ने बिहार में मनहीनो को भी जीवंतता दी। दमित-पीड़ित लोग अब लालू के कारण बोलने लगे।



लालू प्रसाद यादव वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य के ऐसे महानायक हैं जिन्हें घटा करके कोई राजनीतिक गठबन्धन नही हो सकता है। लालू सामाजिक न्याय और साम्प्रदायिक सद्भावना के लिए अपरिहार्य हैं। लालू के मान मर्दन का लगातार प्रयास जारी है ।


लालू यादव ये नहीं कहता कि हमको राजपूत से दिक़्क़त है। ब्राम्भन से दिक़्क़त है।
बल्कि लालू यादव ये कहता है की।  हमे उन जुलमियो से दिक़्क़त है।  जो हर एक जाती में हीन भावनाओ से अपनी अपनी जाती के गरीब लोगो को प्रताड़ित करते है।
 रघुवंश प्रसाद जी ने कहा है कि जो लालू के दिल को भावनाओ को समझ लेगा वो लालू को कभी नहीं छोड़ेगा । और  बहुत सारे  लोग है..इनके जाती से, जो राजनीती के Abcd के सुरुआत भी यही से मतलब(The politics institute of lalu) किये है ,और फिर बाद में MLA ,MP होने के बाद दलबदलू हो गए है। Bihar में बीजेपी तथा NDA में 75% नेता लालू के ही  प्रोडक्ट है। और इसका लिस्ट बहुत लंबा भी है। लालू जी हमेशा कहते रहे है की गरीब लोग हमारे साथ रहे चाहे वो किसी भी जाति से क्यों न हो, हमे समाज में समाज में किसी को प्रताड़ित करना देखा नहीं जाता
क्योंकि समाज में प्रताड़ित  वही होता है। जो धन तन बल से गरीब होता है। और उन गरीबो के साथ मैं हमेशा रहूँगा।,,, शायद आपको याद नहीं होगा ।
देश आजाद होने के बाद जब हम सब एक स्वतंत्र भारत के एक स्वतंत्र नागरिक थे तब भी हमारे समाज में सभी जाती के गरीब लोग वर्षो तक अमीरों को गुलामी करते रहे है ।,,,जिसका विरोध अगर कोई किया है। तो वो सिर्फ लालू यादव ही है।,उस प्रथा को हटाया है तो वो सिर्फ लालू यादव ही है । ।  गरीबो को आगे बढ़ने के लिए जो हौसला दिया है। जो आवाज दिया है। जो गरीबो को मान सम्मान से जीना सिखाया है। वो शख्स सिर्फ लालू यादव ही  है। हमें पता है कि आपको यकीन नहीं हुआ होगा,
आप इस चीज को अपने पूर्वजो से पूछिएगा, सच्चाई और इंसानियत के तराजू पर तौल के देखिएगा परिणाम सामने आ जायेगा
आज हम देखते है  जिनके बाप-दादा ब्राह्मणवादियों रूढ़िवादियों व सामांत्वादियों के सामने खटिया पर नहीं बैठता था, उसके बेटे पोते पूछता है लालू ने क्या किया,??
हा हा मैं बता देता हूं कि लालू ने क्या किया लालू तुझे आज बोलने के लिए जुबान दिया जिसके लिए तुम्हारे पूर्वज तरसते थे । और बताऊँ तो कान खोलकर सुन लो:-
लालू प्रसाद यादव को कोसने वाला पिछड़ा और दलित वर्ग के युवा तुम्हे 90 के दशक से पहले होश संभाल चुके अपने परिवार के सदस्यो से पूछना चाहिए कि कैसे उनके दादा व बाबा सामंतो के सामने चारपाई पर नहीं बैठते थे और सॉमंतो के ऐसे बच्चे जो अपना निक्कर तक नहीं बांध पाते थे उनके फससामने तुम्हारे बाप- दादा कैसे हाथ जोडकर मालिक कहकर नमस्ते किया करते थे?? बिहार के दलितो और पिछड़ों एक बात कान खोलकर सुन लो तुम्हारे मुँह मे जो 72 इंच की जुबान है न वह लालू जी की दी हुई है वरना तुम भी हाथ जोडे सामंती मालिक के सामने झुके रहते !!
लालू लालू है। न कोई दूसरा पैदा हुआ है  और न कोई होगा।। कितने मसहूर हो गए इनको बदनाम करते करते । नाम भी बता दे क्या(नितीश,रामबिलास,सुशिल मोदी)और बहुत सारे है । अभी भी होश है। सम्भल जाओ....?
नहीं तो रोज रोज कोई लालू पैदा नहीं होगा तुम्हारे आवजो को बुलंद करने के लिए,

और हमारे पूर्वज 90 और उसके पहले के दसक को देखे है ।  और उसके किस्से भी सुने है । कभी टाइम निकाल के तुम भी सुन लेना।मैंने तो तय कर लिया है।

विश्व में हर रिकार्ड बाबा साहेब के नाम

विश्व में हर रिकार्ड बाबा साहेब के नाम

इसको इतना SHARE करें ता कि सभी लोगों बाबा साहेब के बारे मे जान सकें....
1. भारत के सबसे पढे व्यक्ति
2. सबसे ज्यादा किताब लिखने वाले
3. सबसे तेज स्पीड से ज्यादा टाईप करने वाले
4. सबसे ज्यादा शब्द टाईप करने वाले
5. सबसे ज्यादा आंदोलन करें
6. महिला अधिकार के लिए संसद में इस्तीफा देने वाले
7. दलित, पिछडो के हको को दिलाने वाले
8. हिन्दू धर्म के ग्रन्थ मनुस्मर्ति को चोराहे पर जलाने वाले
9. जातिवाद को समाप्त करने के लिए पंडतानि से sadi करने वाले
10. गरीब मज़लूमो के हको के लिए 4 बच्चे कुर्बान करने वाले
11. 2 लाख किताबो को पढ़कर याद रखने वाले
12. भारत का सविधान लिखा
13. पूना पैक्ट लिखा
14. मूक नायक पत्रिका निकाली
15. बहिस्किरत समाचार पत्र निकाला
16. सबसे तेज लिखने वाले
17. दोनों हाथो से लिखने वाले
18. ग़ांधी जी को जीवन दान देने वाले
19. सबसे काबिल बैरिस्टर
20. मुम्बई के सेठ के बेटे को फर्जी मुक़दमे से बरी कराने वाले
21. योग करने वाले
22. सबसे ईमानदार
23. 18 से 20 घंटे पढ़ने वाले
24. सरदार पटेल को obc का मतलब समझने वाले
25. स्कूल के बहार बैठकर और अपमान सहकर उच्च शिक्षा पाने वाले
25. हम सबकी भलाई के लिए पत्नी रमाबाई को खोने वाले .........
.
दिल से जय भीम
.

*बाबा साहब डॉ.भीमराव रामजी अम्बेडकर*
(एक संक्षिप्त परिचय)

🌀डॉ.बाबासाहब अंबेडकर 9 भाषाएँ जानते थे।
1) मराठी (मातृभाषा)
2) हिन्दी
3) संस्कृत
4) गुजराती
5) अंग्रेज़ी
6) पारसी
7) जर्मन
8) फ्रेंच
9) पाली

 उन्होंने पाली व्याकरण और शब्दकोष (डिक्शनरी) भी लिखी थी, जो महाराष्ट्र सरकार ने "Dr.Babasaheb Ambedkar Writing and
Speeches Vol.16 "में प्रकाशित की हैं।

🔹 बाबासाहब अंबेडकर जी ने संसद में पेश किए हुए विधेयक

1) महार वेतन बिल
2) हिन्दू कोड बिल
3) जनप्रतिनिधि बिल
4) खोती बिल
5) मंत्रीओं का वेतन बिल
6) मजदूरों के लिए वेतन (सैलरी) बिल
7) रोजगार विनिमय सेवा
8) पेंशन बिल
9) भविष्य निर्वाह निधी (पी.एफ्.)

🔹 बाबासाहब के सत्याग्रह (आंदोलन)

1) महाड आंदोलन 20/3/1927
2) मोहाली (धुले) आंदोलन 12/2/1939
3) अंबादेवी मंदिर आंदोलन 26/7/1927
4) पुणे कौन्सिल आंदोलन 4/6/1946
5) पर्वती आंदोलन 22/9/1929
6) नागपूर आंदोलन 3/9/1946
7) कालाराम मंदिर आंदोलन 2/3/1930
8) लखनौ आंदोलन 2/3/1947
9) मुखेड का आंदोलन 23/9/1931

🔹बाबासाहब अंबेडकर द्वारा स्थापित सामाजिक संघटन

1) बहिष्कृत हितकारिणी सभा - 20 जुलै 1924
2) समता सैनिक दल - 3 मार्च 1927

🔹राजनीतिक संघटन
1) स्वतंत्र मजदूर पार्टी - 16 अगस्त 1936
2) शेड्युल्ड कास्ट फेडरेशन- 19 जुलै 1942
3) रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया- 3 अक्तूबर 1957

🔹धार्मिक संघटन
1) भारतीय बौद्ध महासभा -
4 मई 1955

🔹शैक्षणिक संघटन
1) डिप्रेस क्लास एज्युकेशन सोसायटी- 14 जून 1928
2) पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी- 8 जुलै 1945
3) सिद्धार्थ काॅलेज, मुंबई- 20 जून 1946
4) मिलींद काॅलेज, औरंगाबाद- 1 जून 1950

🔹अखबार, पत्रिकाएँ
1) मूकनायक- 31 जनवरी 1920
2) बहिष्कृत भारत- 3 अप्रैल 1927
3) समता- 29 जून 1928
4) जनता- 24 नवंबर 1930
5) प्रबुद्ध भारत- 4 फरवरी 1956

🔹बाबासाहब अंबेडकर जी ने अपने जिवन में विभिन्न विषयों पर 527 से ज्यादा भाषण दिए।

🔹बाबासाहब अंबेडकर को प्राप्त सम्मान

1) भारतरत्न
2) The Greatest Man in the World (Columbia University)
3) The Universe Maker (Oxford University)
4) The Greatest Indian (CNN IBN & History Tv

🔹बाबासाहब अंबेडकर जी इनकी
निजी किताबें (उनके पास थी)
1) अंग्रेजी साहित्य- 1300 किताबें
2) राजनिती- 3,000 किताबें
3) युद्धशास्त्र- 300 किताबें
4) अर्थशास्त्र- 1100 किताबें
5) इतिहास- 2,600 किताबें
6) धर्म- 2000 किताबें
7) कानून- 5,000 किताबें
8) संस्कृत- 200 किताबें
9) मराठी- 800 किताबें
10) हिन्दी- 500 किताबें
11) तत्वज्ञान (फिलाॅसाफी)- 600 किताबें
12) रिपोर्ट- 1,000
13) संदर्भ साहित्य (रेफरेंस बुक्स)- 400 किताबें
14) पत्र और भाषण- 600
15) जिवनीयाँ (बायोग्राफी)- 1200
16) एनसाक्लोपिडिया ऑफ ब्रिटेनिका- 1 से 29 खंड
17) एनसाक्लोपिडिया ऑफ सोशल सायंस- 1 से 15 खंड
18) कैथाॅलिक एनसाक्लोपिडिया- 1 से 12 खंड
19) एनसाक्लोपिडिया ऑफ एज्युकेशन
20) हिस्टोरियन्स् हिस्ट्री ऑफ दि वर्ल्ड- 1 से 25 खंड
21) दिल्ली में रखी गई किताबें-
बुद्ध धम्म,
पालि साहित्य,
मराठी साहित्य- 2000 किताबें
22) बाकी विषयों की 2305 किताबें

🔹बाबासाहब जब अमेरिका से भारत लौट आए तब एक बोट दुर्घटना में उनकी सैंकडो किताबें समंदर मे डूबी।

🔹बाबासाहब अंबेडकर जी
1) महान समाजशास्त्री
2) महान अर्थशास्त्री
3) संविधान शिल्पी
4) आधुनिक भारत के मसिहा
5) इतिहास के ज्ञाता और रचियाता
6) मानवंशशास्त्र के ज्ञाता
7) तत्वज्ञानी (फिलाॅसाॅफर)
8) दलितों के और महिला अधिकारों के मसिहा
9) कानून के ज्ञाता (कानून के विशेषज्ञ)
10) मानवाधिकार के संरक्षक
11) महान लेखक
12) पत्रकार
13) संशोधक
14) पाली साहित्य के महान अभ्यासक (अध्ययनकर्ता)
15) बौध्द साहित्य के अध्ययनकर्ता
16) भारत के पहले कानून मंत्री
17) मजदूरों के मसिहा
18) महान राजनितीज्ञ
19) विज्ञानवादी सोच के समर्थक
20) संस्कृत और हिन्दू साहित्य के गहन अध्ययनकर्ता थे।

🔹बाबासाहब अंबेडकर की कुछ विशेषताएँ

1) पाणी के लिए आंदोलन करनेवाले विश्व के पहल महापुरुष

2) लंदन विश्वविद्यालय के पुरे लाईब्ररी के किताबों की छानबीन कर उसकी
जानकारी रखनेवाले एकमात्र महामानव

3) लंदन विश्वविद्यालय के 200 छात्रों में नंबर 1 का छात्र होने का सम्मान प्राप्त होनेवाले पहले भारतीय

4) विश्व के छह विद्वानों में से एक

5) विश्व में सबसे अधिक पुतले बाबासाहब अंबेडकर जी के हैं।

6) लंदन विश्वविद्यालय मे डी.एस्.सी.
यह उपाधी पानेवाले पहले और आखिरी भारतीय

7) लंदन विश्वविद्यालय का 8 साल का पाठ्यक्रम 3 सालों मे पूरा
करनेवाले महामानव

🔹बाबासाहब अंबेडकर जी के वजह से ही भारत में "रिजर्व बैंक" की स्थापना हुईं।

बाबासाहब डॉ.अंबेडकर जी ने अपने डाॅक्टर ऑफ सायंस के लिए ' दि प्राॅब्लेम ऑफ रूपी' यह शोध प्रबंध भी लिखा था।👑

*Dr.BHIMRAO AMBEDKAR* (1891-1956)
 *B.A., M.A., M.Sc., D.Sc., Ph.D., L.L.D.,*
 D.Litt., Barrister-at-La w.
 B.A.(Bombay University)
 Bachelor of Arts,
 MA.(Columbia university) Master
 Of Arts,
 M.Sc.( London School of
 Economics) Master
 Of Science,
 Ph.D. (Columbia University)
 Doctor of
 philosophy ,
 D.Sc.( London School of
 Economics) Doctor
 of Science ,
 L.L.D.(Columbia University)
 Doctor of
 Laws ,
 D.Litt.( Osmania University)
 Doctor of
 Literature,
 Barrister-at-La w (Gray's Inn,
 London) law
 qualification for a lawyer in
 royal court of
 England.
 Elementary Education, 1902
 Satara,
 Maharashtra
 Matriculation, 1907,
 Elphinstone High
 School, Bombay Persian etc.,
 Inter 1909,Elphinston e
 College,Bombay
 Persian and English
 B.A, 1912 Jan, Elphinstone
 College, Bombay,
 University of Bombay,
 Economics & Political
 Science
 M.A 2-6-1915 Faculty of Political
 Science,
 Columbia University, New York,
 Main-
 Economics
 Ancillaries-Soc iology, History
 Philosophy,
 Anthropology, Politics
 Ph.D 1917 Faculty of Political
 Science,
 Columbia University, New York,
 'The
 National Divident of India - A
 Historical and
 Analytical Study'
 M.Sc 1921 June London School
 of
 Economics, London 'Provincial
 Decentralizatio n of Imperial
 Finance in
 British India'
 Barrister-at- Law 30-9-1920
 Gray's Inn,
 London Law
 D.Sc 1923 Nov London School
 of
 Economics, London 'The
 Problem of the
 Rupee - Its origin and its
 solution' was
 accepted for the degree of D.Sc.
 (Economics).
 L.L.D (Honoris Causa) 5-6-1952
 Columbia
 University, New York For HIS
 achievements,
 Leadership and authoring the
 constitution of
 India
 D.Litt (Honoris Causa)
 12-1-1953 Osmania
 University, Hyderabad For HIS
 achievements,
 Leadership and writing the
 constitution of
 India!

U.P.सरकार ने फरमान

*U.P.सरकार ने फरमान जारी किया है कि 50 साल से ज्यादा के कर्मचारियों को कार्य कुशलता की समीक्षा के आधार पर जबरन रिटायर किया जाएगा। इसलिए आओ सब भारत वासी आज प्रण करें कि पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक ऐसे किसी नेता को वोट देकर नहीं चुनेंगे, जो 50 वर्ष से अधिक हो! ताकि देश की कार्य कुशलता प्रभावित न हो और मेरा भारत और महान बन सके और निम्नलिखित अनुसार यह कानून अनिवार्य रूप से सभी पर लागू हों 🙏👇*

*1-* नेताओं को भी पचास साल की उम्र में रिटायर कर दिया जाय ?
*2-* क्यों नहीं नेताओं को भी पुरानी पेंशन से वंचित किया जाय ?
*3-* क्यों नहीं नेताओं को विधानसभा सदस्य बनने के लिए स्नातक व लोकसभा सदस्य बनने के लिए परास्नातक होना अनिवार्य किया जाय ?
*4-* क्यों नहीं कानून मंत्री बनने के लिए LAW की डिग्री अनिवार्य हो, स्वास्थ्य मंत्री बनने के लिये MBBS की डिग्री अनिवार्य हो, समाज कल्याण के लिए समाजशास्त्र की डिग्री अनिवार्य हो, मानव संसाधन के लिए M.Ed. की डिग्री अनिवार्य हो, वित्त मंत्री को अर्थशास्त्री होना अनिवार्य हो इसी प्रकार सभी मंत्रीयों की योग्यता का मानक निर्धारित किया जाय ।
*5-* क्यों नहीं फ्री का डीजल, पेट्रोल, फोन की सुविधा, हवाई सुविधा, रेल सुविधा सहित तमाम सुविधाओं में जिसमें प्रतिवर्ष अरबों रूपये खर्च होता हैं उसमें कटौती की जाय ।
*6-* क्यों नहीं सभी नेताओं के खाते सार्वजनिक किये जाय ।
*7-* क्यों नहीं नेताओं की पुरानी पेंशन,मोटी तनख्वाह,सब्सिडी द्वारा भोजन बंद किया जाय जिसपर सरकार प्रतिवर्ष अरबों रूपये पानी की तरह खर्च करती हैं ।
*8-* क्यों नहीं नेताओं के पद से हटने के बाद फ्री मेडिकल सुविधा बंद किया जाय जिस पर देश का करोड़ों रूपये नुकसान होता हैं ।
*9-* क्या 50 साल का कर्मचारी बूढ़ा और 50 साल का नेता जवान होता हैं ? यह कौन सा मानक हैं ? नेताओं के पास क्या राहु व केतु वाला अमृत कलश हैं क्या ? जिससें यह पचास की उम्र में युवा नेता हो जाते हैं ?
     *देश को कितना गर्त में आप नेताजी लोग ले जायेंगे?* जब स्वयं की तनख्वाह लाखों में करते हैं तो सभी पार्टियों के कोई भी नेता विरोध नहीं करता सभी मिलकर मेज थपथपा देते हैं । क्या देश पर आप की तनख्वाह की बेतहाशा वृद्धि से अरबों रूपये का भार नहीं पडता ? गजब की सोच हैं आप नेताओं की जब कर्मचारियों, अधिकारियों, शिक्षकों को पचास वर्ष में हटाने पर विचार किया जा सकता तो यह उपरोक्त बिन्दुओं पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता है!!

चयन प्रक्रिया में हड़बड़ी, लगता है कुछ गड़बड़ी
https://www.google.co.in/amp/m.jagran.com/lite/uttar-pradesh/varanasi-city-16458677.html


बनारस हिंदू विश्वविद्यालय: शिक्षकों की नियुक्ति में धांधली, बहुजन छात्रों ने किया प्रदर्शन
http://www.nationaldastak.com/country-news/student-protest-against-bhu-administration/



ये 70 साल का रोना क्या है ?

#संघी चाहते थे कि सबको मताधिकार नहीं होना चाहिए, मत का अधिकार सिर्फ चुनींदा वर्गों को होना चाहिए, उस वक्त के नेतृत्व ने (नेहरू,अम्बेडकर) तय किया कि ये मताधिकार दलितों,मुसलमानों और महिलाओं,गरीबों को समान रूप से मिलेगा, संघियों में ग्रंथि घर कर गयी।
#संघियों ने कहा वर्तमान संविधान का प्रारूप मनुस्मृति के कानून को समाहित नहीं करता, इसमें भारतीय संस्कृति की झलक नहीं है डॉ आंबेडकर और नेहरू ने कहा संविधान सम्पूर्ण विश्व के बेहतरीन कानूनों से प्रेरित होगा,किसी की भी कुंठा से नहीं।
#संघियों ने मांग की देश को हिन्दू राष्ट्र होना चाहिए, नेहरू और डॉ आंबेडकर ने एक स्वर में कहा भारत का स्वरूप बहुभाषी और बहुधार्मिक है इसे किसी एक रंग में नहीं रंगा जा सकता देश का प्राण बहुसांस्कृतिक है इसे आप धर्मनिरपेक्षता भी कह सकते हो।
#संघी चाहते थे देश में एकात्मक शासन हो नेहरू और डॉ आंबेडकर ने व्यवस्था दी कि भारत विविधताओं वाला देश है प्रत्येक क्षेत्र की अपनी सुखद विविधताएं हैं जिन्हें बनाये रखने का उस क्षेत्र के लोगों को नैसर्गिक अधिकार है इसलिए संघात्मक व्यवस्था होगी।
#संघियों ने जोर देकर कहा कि किसी भी वर्ग के लिए विशेष प्रोत्साहन या लक्षित योजना नहीं होनी चाहिए, जैसे आरक्षण। डॉ आंबेडकर और नेहरू ने कहा कि देश का वंचित समुदाय मुख्यधारा में तब तक नहीं आएगा जब तक इन्हें विशेष सुविधाएं न दी जाएं।
#संघी चाहते थे देश की समस्याओं का समाधान ज्योतिष और यज्ञों के माध्यम से हो, भारत को पाश्चात्य विशेषकर ईसाई चिकित्सा पद्धति का प्रयोग नही  करना चाहिए,आयुर्वेद में हर रोग का उपचार है। नेहरू ने कहा देश का युवा आधुनिक चिकित्सा पद्धति का ज्ञान भी रखेगा और आयुर्वेद भी पड़ेगा, आधुनिक ज्ञान धर्म के आधार पर त्याज्य नहीं हो सकता।
#संघी मानसिकता मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा ढाए गए जुल्म का बदला वर्तमान भारतीय मुस्लिमों से लेना चाहती है इसलिए न तो संघी स्वतंत्रता आंदोलन में इनकी भूमिका चाहते थे न ही राष्ट्र निर्माण में इनके योगदान को स्वीकार करते हैं इसके विपरीत धर्म निरपेक्ष सोच ने ये माना कि भारतीय मुसलमान पूर्ण रूप से भारतीय है और उसे किसी भी सनक के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है।
#संघी इस मत पर अडिग थे कि शिक्षा की गुरुकुल पद्धत्ति सर्वश्रेष्ठ है वेद ज्ञान के एक मात्र स्रोत हैं पाठ्यक्रम में गीता,महाभारत और रामायण अनिवार्य रूप से होने चाहिए,ज्योतिष के बिना भारतीय पाठ्यक्रम अधूरा है नेहरू ने व्यवस्था की रीसर्च के लिए टीआईएफआर, अंतरिक्ष विज्ञान के लिए इसरो और चिकित्सा के लिए आई आई एम की व्यवस्था हो।
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यही और ऐसा ही बहुत कुछ इस संघी मानसिकता के लोगों को ये कहने का आधार देता है कि देश में पिछले 70 वर्ष में कुछ नहीं हुआ,देश को कांग्रेस ने बर्बाद कर दिया और आज जब केंद्र सरकार ,राजस्थान सरकार,उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा के बजट में कटौती होती है तो इस मानसिकता को संतुष्टि होती है क्योंकि ये मानते है कि सबको शिक्षा के विचार ने मजदूरों को उनके सर पर बिठा दिया, जब मध्य प्रदेश सरकार ज्योतिषों को सरकारी हस्पतालों में बिठाने का आदेश देती है(न्यूज़ कमेंट बॉक्स में) तो ये मानसिकता इसे भारतीय संस्क्रुति की स्थापना समझती है, जब मोदी जी चुन चुन कर सरकारी क्षेत्रों को बेचते हैं तो ये मानसिकता आश्वस्त होती है की आरक्षण ऐसे ही खत्म हो सकता है जब जगह जगह मुसलमानों  को मारा जाता है दलितों को टारगेट किया जाता है महिलाओं को चूल्हा चाकी तक सीमित बताया जाता है ( न्यूज़ कमेंट बॉक्स में) तो इस मानसिकता को अपार मानसिक शांति मिलती है। जब मोदी योजना आयोग को खत्म करते हैं और उसे नीति आयोग कहते हैं तो यही संघी मानसिकता संतुष्ट हो जाती है क्योंकि नेहरू अम्बेडकर के विरोध का ये एक माध्यम नजर आता है।
अब ये लोग खुलकर डॉ आंबेडकर का विरोध तो दलित वोट की वजह से कर नहीं सकते, इसलिए अपनी सारी कुंठा नेहरू पर निकालते हैं पहले तो नेहरू को मुस्लिम सिद्ध करते हैं,फिर उनके चरित्र को दागदार करते हैं और अंत में जब नेहरू के साइंटिफिक टेम्पर,योजना आयोग ( अंबेडकर विचार), औद्योगीकरण, आईआईएम,टीआईएफआर,इसरो का कोई तोड़ नहीं ढूढ पाते तो कश्मीर और चीन समस्या का जिम्मेदार बनाने का षड्यंत्र रचते हैं।

वास्तव में ये लड़ाई दो विचारों की है देश को ये तय करना है कि वे किस विचार के साथ हैं और ये भी की तटस्थता का कभी इतिहास नही  लिखा जाता, इस वक्त देश को सबसे ज्यादा खतरा इसी तटस्थता से है।


*अनिवार्य रूप से*
      *सभी पर लागू हों* 🙏
    जब कर्मचारियों, अधिकारियों एवं शिक्षकों को पचास वर्ष की उम्र में निकाले जाने पर सरकार द्वारा विचार किया जा सकता हैं तो क्यों नहीं निम्नलिखित विचार जनहित में किया जाय ।
*1-* नेताओं को भी पचास साल की उम्र में रिटायर कर दिया जाय ?
*2-* क्यों नहीं नेताओं को भी पुरानी पेंशन से वंचित किया जाय ?
*3-* क्यों नहीं नेताओं को विधानसभा सदस्य बनने के लिए स्नातक व लोकसभा सदस्य बनने के लिए परास्नातक होना अनिवार्य किया जाय ?
*4-* क्यों नहीं कानून मंत्री बनने के लिए LAW की डिग्री अनिवार्य हो, स्वास्थ्य मंत्री बनने के लिये MBBS की डिग्री अनिवार्य हो, समाज कल्याण के लिए समाजशास्त्र की डिग्री अनिवार्य हो, मानव संसाधन के लिए M.Ed. की डिग्री अनिवार्य हो, वित्त मंत्री को अर्थशास्त्री होना अनिवार्य हो इसी प्रकार सभी मंत्रीयों की योग्यता का मानक निर्धारित किया जाय ।
*5-* क्यों नहीं फ्री का डीजल, पेट्रोल, फोन की सुविधा, हवाई सुविधा, रेल सुविधा सहित तमाम सुविधाओं में जिसमें प्रतिवर्ष अरबों रूपये खर्च होता हैं उसमें कटौती की जाय ।
*6-* क्यों नहीं सभी नेताओं के खाते सार्वजनिक किये जाय ।
*7-* क्यों नहीं नेताओं की पुरानी पेंशन,मोटी तनख्वाह,सब्सिडी द्वारा भोजन बंद किया जाय जिसपर सरकार प्रतिवर्ष अरबों रूपये पानी की तरह खर्च करती हैं ।
*8-* क्यों नहीं नेताओं के पद से हटने के बाद फ्री मेडिकल सुविधा बंद किया जाय जिस पर देश का करोड़ों रूपये नुकसान होता हैं ।
*9-* क्या 50 साल का कर्मचारी बूढ़ा और 50 साल का नेता जवान होता हैं ? यह कौन सा मानक हैं ? नेताओं के पास क्या राहु व केतु वाला अमृत कलश हैं क्या ? जिससें यह पचास की उम्र में युवा नेता हो जाते हैं ?

     *देश को कितना गर्त में आप नेताजी लोग ले जायेंगे?* जब स्वयं की तनख्वाह लाखों में करते हैं तो सभी पार्टियों के कोई भी नेता विरोध नहीं करता सभी मिलकर मेज थपथपा देते हैं । क्या देश पर आप की तनख्वाह की बेतहाशा वृद्धि से अरबों रूपये का भार नहीं पडता ? गजब की सोच हैं आप नेताओं की जब कर्मचारियों, अधिकारियों, शिक्षकों को पचास वर्ष में हटाने पर विचार किया जा सकता तो यह उपरोक्त बिन्दुओं पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता हैं !!  

ब्राह्मण’ तिलक के विचार* महिला शिक्षा

*दिमाग के जाले साफ करो और पढ़ो, महिला शिक्षा के बारे में ‘चालाक ब्राह्मण’ तिलक के विचार*


नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

इतिहास ने हमें जिसके बारे में जैसा बता दिया हम बचपन से उसे वैसा ही देखते चले आ रहे हैं. बाल गंगाधार तिलक को भी हम स्कूल के समय से लोकमान्य बुलाते आए हैं. लेकिन उनकी खुद की लिखी हुई किताब बताती है कि तिलक घोर जातिवाद को बढ़ावा देने वाले इंसान थे. आजकल वरिष्ठ पत्रकार सत्येन्द्र पीएस अपनी फेसबुक वॉल पर बाल गंगाधर तिलक की परतें खोल रहे हैं आप भी पढ़िए.


तिलक स्त्री शिक्षा के विरोधी थे- 
बाल गंगाधर तिलक ने 1885 में लड़कियों का पहला हाई स्कूल खोले जाने के क्रांति ज्योति सावित्रीबाई फुले के  प्रयासों के खिलाफ अभियान चलाया।
उसमें सफलता नहीं मिली तो तिलक ने लड़कियों के 11 बजे से 5 बजे तक घर से बाहर रहने का विरोध किया और लिखा कि कोई भी अपनी लड़की को इतने समय तक घर से बाहर नहीं रहने देगा। उन्होंने सुबह 7 से 10 या दोपहर 2 से 5 बजे तक कक्षाएं चलाने का सुझाव दिया और कहा कि शेष समय लड़कियों को घर के काम में हाथ बटाने में देना चाहिए।


लड़कियां पढ़ लिख गईं तो पतियों का विरोध करेंगी- 

तिलक ने कहा कि पढ़ लिखकर लड़कियां रख्माबाई जैसी हो जाएंगी जो अपने पतियों का विरोध करेंगी।उन्होंने पाठ्यक्रम में बदलाव कर लड़कियों को पुराण, धर्म और घरेलू काम जैसे बच्चों की देखभाल, खाना बनाने की शिक्षा तक सीमित रखने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इसके अलावा लड़कियों को शिक्षा देना करदाताओं के धन की बर्बादी है। लड़कियों का पहला विश्वविद्यालय 1915-16 में खोले जाने की दोन्धो केशव करवे की कवायद तक तिलक का यह रुख कायम रहा

हिन्दू लड़की को बेहतरीन बहू के रूप में विकसित किय जाना चाहिए- 

20 फरवरी 1916 को उन्होंने अपने मराठा अखबार में इंडियन वूमेन यूनिवर्सिटी शीर्षक से लिखे लेख में कहा,

” हमे प्रकृति और सामाजिक रीतियों के मुताबिक चलना चाहिए। पीढ़ियों से घर की चहारदीवारी महिलाओं के काम का मुख्य केंद्र रहा है। उनके लिए अपना बेहतर प्रदर्शन करने हेतु यह दायरा पर्याप्त है। एक हिन्दू लड़की को निश्चित रूप से एक बेहतरीन बहू के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। हिन्दू औरत की सामाजिक उपयोगिता उसकी सिम्पैथी और परंपरागत साहित्य को ग्रहण करने को लेकर है। लड़कियों को हाइजीन, डोमेस्टिक इकोनॉमी, चाइल्ड नर्सिंग, कुकिंग, sewing आदि की बेहतरीन जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए ”
*
*दिमाग के जाले साफ करो और पढ़ो, महिला शिक्षा के बारे में 'चालाक ब्राह्मण' तिलक के विचार - नेशनल जनमत*

 http://nationaljanmat.com/women-education-tilak/


 क्रमिक असमानता – जाति बंधन डालने के बाद उसे बनाये रखना संभव नहीं था। गुलाम को गुलाम बनाये रखने के लिए हर किसी के ऊपर किसी को रखना ही इस समस्या का समाधान था। सारे मूलनिवासी आपस में लड़ते रहे, मूलनिवासी कभी ब्राह्मणों के खिलाफ खड़े ना हो जाये। इसीलिए ब्राह्मणों ने मूलनिवासियों को ऊँची और नीची जातियों में बाँट दिया। उंच नीच की भावना मानवता की भावना को खत्म कर देती है। इसीलिए ब्राह्मणों ने क्रमिक असमानता के साथ जाति व्यवस्था का निर्माण किया है। और आज भी हर मूलनिवासी जाति और धर्म के नाम पर लड़ता रहता है और ब्राह्मण मज़े से तमाशा देख कर हँसता है।
अस्पृश्यता – जातिव्यवस्था बुद्ध पूर्व काल में नहीं थी इसीलिए उस समय के साहित्य में जाति या वर्ण व्यवस्था का वर्णन नहीं आता। इसीलिए यह भ्रान्ति फैली हुई है जिन बौद्धों ने ब्राह्मण धर्म का अनुसरण किया, और ब्राह्मणों ने जिन बौद्धों को अपना लिया वो आज के समय में ओबीसी में आते है। उन पर आज भी ब्राह्मणों का प्रभाव है जिसके कारण ओबीसी में आने वाले लोग दूसरे मूलनिवासियों से अपने आप को उच्च समझते है। ओबीसी भी पुष्यमित्र शुंग की प्रतिक्रांति के बाद बनाया गया मूलनिवासी लोगों का समूह है।
सिंधु घाटी की सभ्यता पैदा करने वाले भारतीय लोगो से इतनी बड़ी महान सभ्यता कैसे नष्ट हुई,जो 4500-5000 ईसा पूर्व से स्थापित थी?ये इंग्रेजो ने पूछा था, एक अंग्रेज अफसर को इस का शोध करने के लिए भी बोला गया था। बाद में इसके शोध को राघवन और एक संशोधक ने शुरू किया। पत्थर और ईंटों के परिक्षण में पता चला कि ये संस्कृति अपने आप नहीं मिटी थी। बल्कि सिंधु घटी की सभ्यता को मिटाया गया था। दक्षिण राज्य केरल में हडप्पा और मोहनजोदड़ों 429 अवशेष मिले। ब्राम्हण भारत में ईसा पूर्व 1600-1500 शताब्दी पूर्व आया।
ऋग्वेद में इंद्र के संदर्भ में 250 श्लोक आतें हैं। ब्राह्मणों के नायक इन्द्र पर लिखे सभी श्लोकों में यह बार बार आता है कि “हे इंद्र उन असुरों के दुर्ग को गिराओं” “उन असुरों(बहुजनों) की सभ्यता को नष्ट करो”। ये धर्मशास्त्र नहीं बल्कि ब्रहामणों के अपराधों से भरेदस्तावेज हैं।
भाषाशास्त्र के आधार पर ग्रिअरसन ने भी ये सिद्ध किया की अलग-अलग राज्यों में जो भाषा बोली जाती हैं,वो सारी भाषाओँ का स्त्रोतपाली है।
DNA के परिक्षण से प्राप्त हुआ सबूतनिर्विवाद और निर्णायक है। क्योकि वो किसी तर्क या दलील पर खड़ा नहीं किया गया है। इस शोध को विज्ञान के द्वारा कभी भी प्रमाणित किया जा सकता है। विज्ञान कोई जाति या धर्म नहीं है। इस शोध को करने वाले पूरी दुनिया से 265 लोग थे। बामशाद का यह शोध 21 मई 2001 के TIMES OF INDIA में NATURE नामक पेज पर छपा, जो दुनिया का सबसे ज्यादा वैज्ञानिक मान्यता प्राप्त अंक है।
बाबासाहब आंबेडकर की उम्र सिर्फ 22 साल थी जब उन्होंने विश्व का जाति का मूलक्या है, इसकी खोज की थी।  और 2001 में जो DNA परिक्षणहुआ था, बाबासाहब का और माइकल बामशाद का मत एक ही निकला था।
ब्राम्हण सारी दुनिया के सामने पुरे बेनकाबहो चुके थे। फिर भी ब्राह्मणों ने अपनी असलियत को छुपाने के लिए अपनी ब्रह्माणी सिद्धांत को अपनाया और ऐसा प्रचारित किया कि भारत में दक्षिणी ब्राह्मण दो नस्लों के होते है। ब्राह्मणों ने DNA के परिक्षण को पूरी तरह ख़ारिज नहीं किया और एक और झूठ मीडिया द्वारा प्रचारित करना शुरू कर दिया कि अब कोई मूलनिवासी नहीं है सभी लोग संमिश्र हो चुके है। उन्होंने कहा मापदंड ढूंढा? ब्राह्मणों ने दलील देकर कहा कि अन्डोमान और निकोबार द्वीप समूह की जो आदिवासी जनजाति है वो अफ्रीकन के वंशज है, वो उधर से आया था, और यूरेशियन देशों में चला गया है, इस पर भी शोध होना चाहिए। बामशाद के द्वारा किये गये शोध को नकारने के लिए ब्राह्मणों ने सिर्फ विज्ञान शब्द का प्रयोग किया और उसे झूठा प्रचारित किया। ब्राह्मण अगर यह झूठी कहानी सुनाये तो उस से पूछो कि दोनों ब्राह्मण नस्लों में से विदेश से कौन आया है? विदेशी का DNA बताओ? DNA के आधार पर ब्राह्मण अपनी बातों को सिद्ध नहीं कर सकता।
ब्राह्मण मुसलमान विरोधी घृणा आंदोलन क्यों चलता है?
क्योकि ब्राह्मणवाद और बुद्धिज्म के टकराव के समय बहुत से बौद्धिष्ट मुसलमान बन गये थे उन्होंने ब्राह्मण धर्म को नहीं अपनाया था। ब्राह्मण जनता है कि आज भारत में जितने भी मुसलमान है वो सब मूलनिवासी है इसीलिए ब्राह्मण मुसलमानों के खिलाफ घृणा का आंदोलन चलता रहता है ताकि ब्राह्मण किसी भी तरह मूलनिवासियों की एक शाखा को पूरी तरह खत्म कर सके।
अंग्रेजों के गुलाम ब्राह्मण था और उनके गुलाम मूलनिवासी थे। आज़ादी की जंग में आज़ादी के लिए आंदोलन करने वाले लोगों के सामने यह सबसे बड़ी समस्या थी। इसीलिए डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने अंग्रेजों को कहा कि ब्राह्मणों को आज़ाद करने से पहले मूलनिवासी बहुजनों को जरुर आज़ाद कर देना चाहिए। अगर ब्राह्मण मूलनिवासियों से पहले आज़ाद हो गया तो ब्राह्मण मूलनिवासियों को कभी आज़ाद नहीं करेगा। ये आशंका सिर्फ डॉ. भीम राव अम्बेडकर के मन में ही नहीं थी बल्कि मुसलमान नेताओं के मन में भी थी। इसीलिए 14 अगस्त को पाकिस्तान बना। मुसलमानों ने अंग्रेजों को कहा कि गाँधी से एक दिन पहले हमे आज़ादी देना और हमारे बाद गाँधी को देना। अगर तुमने पहले गाँधी को आज़ादी दे दी तो गाँधी बनिया है हमको कुछ नहीं देगा। ब्राह्मणों ने अपनी आज़ादी की लड़ाई मूलनिवासियों को सीडी बनाकर लड़ी और वो अंग्रेजों को भगा कर आज़ाद हो गये।

DNA संशोधन से सामने आया कि ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य भारत के मूलनिवासी नहीं है। व्यवहारिक रूप से भी देखा जाये तो ब्राह्मणों ने कभी भारत को अपना देश माना भी नहीं है। ब्राह्मण हमेशा राष्ट्रवाद का सिद्धांत बताता आया है लेकिन खुद कितना देशभक्त है ये बात किसी को नहीं बताता। इसका मतलब एक विदेशी गया और दूसरा विदेशी मालिक हो गया, DNA ने सिद्ध कर दिया। दूसरे विदेशी ब्राह्मणों ने ये प्रचार किया कि भारत आज़ाद हो गया। लेकिन आज भी भारत पर आज भी ब्राह्मणों का राज है। इससे यह साबित होता है कि मूलनिवासियों को भविष्य में आज़ादी हासिल करने का कार्यक्रम चलाना ही पड़ेगा। DNA परिक्षण के आधार पर यह भी कहा जा सकता है कि आज भी देश के 130 करोड में से 32 करोड लोग बाकि 98 करोड़ लोगों पर राज कर रहा है। कल्पना करो कितना मुलभुत और महत्वपूर्ण संशोधन है।

"स्तन" शब्द पढ़ने से आपको घिन है, शर्म आती है...?
और जिन महिलाओं ने घिनौनी त्रासदी को भोगा, वे क्या महसूस करती थी..?

★ स्तन ढकने का अधिकार पाने के लिए केरल में महिलाओं का ऐतिहासिक विद्रोह

केरल के त्रावणकोर इलाके, खास तौर पर वहां की महिलाओं के लिए 26 जुलाई का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। इसी दिन 1859 में वहां के महाराजा ने अवर्ण औरतों को शरीर के ऊपरी भाग पर कपड़े पहनने की इजाजत दी। अजीब लग सकता है, पर केरल जैसे प्रगतिशील माने जाने वाले राज्य में भी महिलाओं को अंगवस्त्र या ब्लाउज पहनने का हक पाने के लिए 50 साल से ज्यादा सघन संघर्ष करना पड़ा।

इस कुरूप परंपरा की चर्चा में खास तौर पर निचली जाति नादर की स्त्रियों का जिक्र होता है क्योंकि अपने वस्त्र पहनने के हक के लिए उन्होंने ही सबसे पहले विरोध जताया। नादर की ही एक उपजाति नादन पर ये बंदिशें उतनी नहीं थीं। उस समय न सिर्फ अवर्ण बल्कि नंबूदिरी ब्राहमण और क्षत्रिय नायर जैसी जातियों की औरतों पर भी शरीर का ऊपरी हिस्सा ढकने से रोकने के कई नियम थे। नंबूदिरी औरतों को घर के भीतर ऊपरी शरीर को खुला रखना पड़ता था। वे घर से बाहर निकलते समय ही अपना सीना ढक सकती थीं। लेकिन मंदिर में उन्हें ऊपरी वस्त्र खोलकर ही जाना होता था।

नायर औरतों को ब्राह्मण पुरुषों के सामने अपना वक्ष खुला रखना होता था। सबसे बुरी स्थिति दलित औरतों की थी जिन्हें कहीं भी अंगवस्त्र पहनने की मनाही थी। पहनने पर उन्हें सजा भी हो जाती थी। एक घटना बताई जाती है जिसमें एक निम्न जाति की महिला अपना सीना ढक कर महल में आई तो रानी अत्तिंगल ने उसके स्तन कटवा देने का आदेश दे डाला।

इस अपमानजनक रिवाज के खिलाफ 19 वीं सदी के शुरू में आवाजें उठनी शुरू हुईं। 18 वीं सदी के अंत और 19 वीं सदी के शुरू में केरल से कई मजदूर, खासकर नादन जाति के लोग, चाय बागानों में काम करने के लिए श्रीलंका चले गए। बेहतर आर्थिक स्थिति, धर्म बदल कर ईसाई बन जाने औऱ यूरपीय असर की वजह से इनमें जागरूकता ज्यादा थी और ये औरतें अपने शरीर को पूरा ढकने लगी थीं। धर्म-परिवर्तन करके ईसाई बन जाने वाली नादर महिलाओं ने भी इस प्रगतिशील कदम को अपनाया। इस तरह महिलाएं अक्सर इस सामाजिक प्रतिबंध को अनदेखा कर सम्मानजनक जीवन पाने की कशिश करती रहीं।

यह कुलीन मर्दों को बर्दाश्त नहीं हुआ। ऐसी महिलाओं पर हिंसक हमले होने लगे। जो भी इस नियम की अहेलना करती उसे सरे बाजार अपने ऊपरी वस्त्र उतारने को मजबूर किया जाता। अवर्ण औरतों को छूना न पड़े इसके लिए सवर्ण पुरुष लंबे डंडे के सिरे पर छुरी बांध लेते और किसी महिला को ब्लाउज या कंचुकी पहना देखते तो उसे दूर से ही छुरी से फाड़ देते। यहां तक कि वे औरतों को इस हाल में रस्सी से बांध कर सरे आम पेड़ पर लटका देते ताकि दूसरी औरतें ऐसा करते डरें।

लेकिन उस समय अंग्रेजों का राजकाज में भी असर बढ़ रहा था। 1814 में त्रावणकोर के दीवान कर्नल मुनरो ने आदेश निकलवाया कि ईसाई नादन और नादर महिलाएं ब्लाउज पहन सकती हैं। लेकिन इसका कोई फायदा न हुआ। उच्च वर्ण के पुरुष इस आदेश के बावजूद लगातार महिलाओं को अपनी ताकत और असर के सहारे इस शर्मनाक अवस्था की ओर धकेलते रहे।

आठ साल बाद फिर ऐसा ही आदेश निकाला गया। एक तरफ शर्मनाक स्थिति से उबरने की चेतना का जागना और दूसरी तरफ समर्थन में अंग्रेजी सरकार का आदेश। और ज्यादा महिलाओं ने शालीन कपड़े पहनने शुरू कर दिए। इधर उच्च वर्ण के पुरुषों का प्रतिरोध भी उतना ही तीखा हो गया। एक घटना बताई जाती है कि नादर ईसाई महिलाओं का एक दल निचली अदालत में ऐसे ही एक मामले में गवाही देने पहुंचा। उन्हें दीवान मुनरो की आंखों के सामने अदालत के दरवाजे पर अपने अंग वस्त्र उतार कर रख देने पड़े। तभी वे भीतर जा पाईं। संघर्ष लगातार बढ़ रहा था और उसका हिंसक प्रतिरोध भी।

सवर्णों के अलावा राजा खुद भी परंपरा निभाने के पक्ष में था। क्यों न होता। आदेश था कि महल से मंदिर तक राजा की सवारी निकले तो रास्ते पर दोनों ओर नीची जातियों की अर्धनग्न कुंवारी महिलाएं फूल बरसाती हुई खड़ी रहें। उस रास्ते के घरों के छज्जों पर भी राजा के स्वागत में औरतों को ख़ड़ा रखा जाता था। राजा और उसके काफिले के सभी पुरुष इन दृष्यों का भरपूर आनंद लेते थे।

आखिर 1829 में इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया।

कुलीन पुरुषों की लगातार नाराजगी के कारण राजा ने आदेश निकलवा दिया कि किसी भी अवर्ण जाति की औरत अपने शरीर का ऊपरी हिस्सा ढक नहीं सकती। अब तक ईसाई औरतों को जो थोड़ा समर्थन दीवान के आदेशों से मिल रहा था, वह भी खत्म हो गया। अब हिंदू-ईसाई सभी वंचित महिलाएं एक हो गईं और उनके विरोध की ताकत बढ़ गई। सभी जगह महिलाएं पूरे कपड़ों में बाहर निकलने लगीं।

इस पूरे आंदोलन का सीधा संबंध भारत की आजादी की लड़ाई के इतिहास से भी है। विरोधियों ने ऊंची जातियों के लोगों दुकानों और सामान को लूटना शुरू कर दिया। राज्य में शांति पूरी तरह भंग हो गई। दूसरी तरफ नारायण गुरु और अन्य सामाजिक, धार्मिक गुरुओं ने भी इस सामाजिक रूढ़ि का विरोध किया।

मद्रास के कमिश्नर ने त्रावणकोर के राजा को खबर भिजवाई कि महिलाओं को कपड़े न पहनने देने और राज्य में हिंसा और अशांति को न रोक पाने के कारण उसकी बदनामी हो रही है। अंग्रेजों के और नादर आदि अवर्ण जातियों के दबाव में आखिर त्रावणकोर के राजा को घोषणा करनी पड़ी कि सभी महिलाएं शरीर का ऊपरी हिस्सा वस्त्र से ढंक सकती हैं। 26 जुलाई 1859 को राजा के एक आदेश के जरिए महिलाओं के ऊपरी वस्त्र न पहनने के कानून को बदल दिया गया। कई स्तरों पर विरोध के बावजूद आखिर त्रावणकोर की महिलाओं ने अपने वक्ष ढकने जैसा बुनियादी हक छीन कर लिया।
[8/5, 7:49 PM] RAJNISH PRINCE: चाहे मायावती हो या लालू चाहे कोई भी कम्यूनिष्ट पार्टी किसी ने भी एक बार भी RSS की जड़ खोदने का वास्तविक प्रयास कभी नही किया है।सिर्फ और सिर्फ लोगो को सुनाने के लिए लोगो को खुस करने के लिये मुँह से ही विरोध करते है।

सिर्फ बोल कर ही विरोध किया
कर के कभी विरोध नही किया

भारत में सिर्फ RSS ही एक मात्र  ऐसा संगठन है जो पूरी ईमानदारी और पूरी मेहनत से अपना काम कर रहा है।
और असम्भव चीज को भी सम्भव कर दे रहा है।बस आँख खोल कर देखने की जरूरत है।

[8/5, 7:49 PM] RAJNISH PRINCE: प्रिय साथियों जय भीम नमो बुध्दाय: आने वाले 2019 से 2022 तक भारत के जितने भी संगठन और जितनी भी सेकुलर पार्टियां है सभी को अपना मतभेद भुलाकर आने वाले चुनाव मे rss और भाजपा मुक्त बनाने के लिए एकजुट हो अगर हम ऐसा नही कर सके तो ये भाजपा के बागडबिल्ले हमारे इस भारत खा जायेगें जिस तरह से इन लोगों की कार्यसैली पूरे भारत मे चल रही है इससे लगता है कि वो दिन दुर नही है जब ये मनुवादी बिचारधारा के लोग हमारे बहुजन समाज को फिर से गुलामों की तरह जिवन जिने पर मजबुर होना पडेगा जिस तरह भारत मे भाजपा और उसके सहयोगी कर रहे है आने वाले समय मे बिपछ नाम मात्र भी नही बचेगा और फिर भारत मे चारो तरफ मनुवादियों का बोलबाला होगा हमारे महपुरूषों की सारी की सारी कुर्बानियां बेकार चली जायेगी मै ये तो नही कहुगां की आप इसे शेयर करे लेकिन इसे आप एक बार दिल से मंथन जरूर करें अपने देश मे मची उठापटक पर बारीकी से समझेगें तो आप खुदबखुद समझ जायेगें फिर आप फैसला लें

विश्वयुद्ध और भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की तैयारियां

 ​तीसरा विश्वयुद्ध और भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की तैयारियां

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आलेख थोड़ा बड़ा है, लेकिन एक पैरा पढ़ लिया तो फिर आखिरी तक छोड़ नहीं पाएंगे। हर भारतीय को इसे जरूर पढ़ना चाहिए और पढ़कर आगे बढ़ाना चाहिए।

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तीसरा विश्वयुद्ध कैसे होगा और इसमें भारत और मोदी की क्या भूमिका होगी और ये मोदी देश को जलता छोड़कर बार-२ विदेश में काहे को जाता है जैसे सवालों का जवाब देता देवेन्द्र सिकरवार जी का SAVE करके रखने योग्य वो लेख जो जिसने नहीं पढ़ा उसने '' कल क्या होने वाला है '' को आज ही जानने का अवसर खो दिया
--------------- " The Great Game " ----------
विशेषज्ञों की मानें तो पृथ्वी के संसाधन अब चुक रहे हैं जिसमें फिलहाल दो चीजें सबसे मुख्य हैं --
.............." पैट्रोल और पानी "...............
वर्तमान जंग पैट्रोल की है और भविष्य का संघर्ष पानी को लेकर होगा और इसमें दो धड़े होंगे --
----------- चीन v / s अमेरिका ---------
-अब इसमें शेष विश्व और भारत की क्या स्थिति है ? -विश्व राजनीति की शतरंज में महाशक्तियां अपने -क्या क्या मोहरे चल रहीं हैं ?
-भारत की स्थिति क्या है ?
-क्यों मोदी ताबड़तोड़ विदेश दौरे कर रहे हैं ?
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संसाधनों की इस होड़ में हम कहाँ हैं ?
आपको बुरा लगेगा पर सत्य ये है कि कहीं नहीं ।
क्यों ?
क्योंकि आजादी के बाद के 15 साल हमने नेहरू की बेवकूफाना आदर्शवादी विदेशनीति की भेंट चढ़ा दिये और तिब्बत जैसे कीमती संसाधन को खो दिया वरना आज चारों ओर से भारत से घिरा नेपाल भारत का हिस्सा बन चुका होता और हिमालय के पूरे संसाधनों पर हमारा कब्जा होता ।
इसके बाद से शास्त्री जी के लघु शासनकाल को छोड़कर शेष समय सरकारें विशेषतः गांधी खानदान बिना भविष्य की ओर देखे सिर्फ " प्रशासन के लिये शासन " करते रहे जिसमें जनता सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिये वोटों की संख्या और उनकी विलासिता के लिये ' उत्पादक ' मात्र थी ।
दूसरी ओर विशाल और बढती हुई जनसंख्या जिसके लिये इतने संसाधन जुटाना असंभव भी है खासतौर पर जब देश में बहुसंख्यकों के प्रति शत्रु मानसिकता रखने वाली 20 करोड़ से ज्यादा की जनसंख्या व एक छोटा पर बहुत प्रभावी कुटिल बिका हुआ देशद्रोही बुद्धिजीवी वर्ग हो जो राष्ट्रहित की प्रत्येक नीति में रोड़े अटकाता हो ।
भारत की स्थिति : तो कुल मिलाकर भारत इस
समय अभूतपूर्व खतरे का सामना कर रहा है ।
-- दक्षिण में हिंद महासागर की तरफ से भारत सुरक्षित है पर यह स्थिति दिएगो गर्सिया पर काबिज अमेरिका पर निर्भर है |
-- पश्चिम में पाकिस्तान
-- पूर्व में बांग्लादेश
-- उत्तर में स्वयं चीन
-- ' पांचवीं दिशा ' का खतरा सबसे भयानक है और भारत के अंदर ही मौजूद है । 20 करोड़ की भारत विरोधी सेना ।
-- कश्मीर में पूरी तरह बढ़त में , केरलमें निर्णायक ,
-- पूर्वोत्तर , असम व बंगाल में प्रबल स्थिति में ,
-- उत्तरप्रदेश और बिहार में वे कांटे की टक्कर देने की स्थिति में है ।
--शेष भारत में भी वे विभिन्न स्थानों पर परेशानी खड़ा करने की स्थिति में हैं ।
**** केरल में तो वे " पॉपुलर फ्रंट " के नाम से वे सैन्य रूप भी ले चुके हैं ।
ये वामपंथी , ये अरुंधती टाइप के साहित्यकार , भांड टाइप के अभिनेता और महेश भट्ट जैसे एडेलफोगैमस लोग , बिंदी गैंग आदि सऊदी पैट्रो डॉलर्स और चीन के हाथों बिके हुये वे लोग हैं जो मोदी का रास्ता रोकने के लिये देशविरोधी घरेलू और विदेशी शक्तियों का ' हरावल दस्ता ' है ताकि मोदी की गति कम करके इस ' Great Game ' में पछाड़ जा सके ।
Now great game is near to start -----
भारत को छोड़कर शेष विश्व इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ खड़ा हो चुका है और अब वो मृतप्रायः है इस्लाम का संकुचन अरब देशों में पैट्रोल के खतम होते ही प्रारम्भ हो जायेगा ।
अब मारामारी शुरू होगी पानी के ऊपर और दुर्भाग्य से इसकी शुरूआत भारत से ही होगी क्योंकि चीन ना केवल ब्रह्मपुत्र नदी पर अपनी निर्णायक पकड़ बना चुका है बल्कि यह तक कहा जा रहा है कि हिमालय क्षेत्र के मौसम और ग्लेशियरों को प्रभावित करने की टेक्नोलॉजी विकसित कर चुका है ।
चीन की तीन कमजोरी हैं --
1--निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था
2--टेक्नोलॉजी
3--हिंद महासागर
पहली कमजोरी से निबटने के लिये चीन ने विदेशी मुद्रा का बड़ा भंडार और ट्रेजरी बॉन्ड खरीद रखे हैं जिसके जरिये वह अमेरिका के डॉलर को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दो दिन में कौड़ियों के भाव का कर सकता है परंतु भारत के संदर्भ में उसका कदम उल्टा बैठेगा और साथ ही भारत चीन के माल पर किसी भी ' बहाने ' से रोक लगाकर उसकी अर्थव्यवस्था को गड्ढे में धकेल सकता है । इसलिये आर्थिक मोर्चे पर तो सभी पक्ष " रैगिंग वाली रेल " बने रहेंगे जिसमें झगड़ा बस इस बात का है कि " इंजन " कौन बनेगा और " पीछे वाला डिब्बा " कौन रहेगा ।
( मेहरबानी करके रैगिंग की रेल का मतलब ना पूछियेगा )
अब बात टेक्नोलॉजी की जिसमें चीन दिनरात एक किये हुए है पर मिसाइल और न्यूक्लियर टेक्नीक को छोड़कर वह पश्चिम के सामने कहीं नहीं टिकता विशेषतः सामरिक तकनीक के क्षेत्र में । इसीलिये चीन " पश्चिम की सामरिक तकनीक के गले की नस " अर्थात टेलीकम्यूनिकेशन को बर्बाद करने के लिये " सैटेलाइट किलर मिसाइल्स " का सफल परीक्षण कर चुका है जिसके जवाब में अमेरिका ने " नैनो सैटेलाइट " लॉन्च किये हैं ।यानि इस क्षेत्र में पश्चिम अभी भी भारी बढ़त में है परंतु चीन और पश्चिम दोनों ही जानते हैं कि टैक्नोलॉजी से चीन को रोका तो जा सकता है पर निर्णायक रूप से परास्त नहीं किया जा सकता ।
अब तीसरी कमजोरी ' हिंदमहासागर ' और उसमे भारत , अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया का प्रभुत्व जिसके तोड़ के रूप में चीन ने " पर्ल स्ट्रिंग " विकसित की है जिसका एक सिरा पाकिस्तान स्थित ' ग्वादर बंदरगाह ' है तो दूसरा सिरा ' सेशेल्स ' में है । इसके बावजूद भारत अंडमान स्थित नौसैनिक अड्डे से पूरे हिंदमहासागर में चीन पर बढ़त में है और बाकी का काम मोदी ने ताबड़तोड़ विदेश दौरों और सफल कूटनीति से कर दिया । जरा याद कीजिये विदेश दौरों में देशों का क्रम और अबऑस्ट्रेलिया ,जापान , विएतनाम , भारत , दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका के साथ एक हिंदमहासागरीय संगठन बनाने की कोशिश हो रही है जो चीन की ' पर्ल स्ट्रिंग ' का मुंहतोड़ जवाब होगी ।हालांकि ऑस्ट्रेलिया की झिझक के कारण इसका सैन्यस्वरूप विकसित नहीं हो पाया है ।
इस तरह चीन को घेरने के बावजूद अपनी " हान जातीयता " पर आधारित विशाल जनशक्ति के कारण पश्चिम उसपर निर्णायक विजय हासिल नहीं कर सकता । उसपर विजय पाने का एकमात्र तरीका जमीन के रास्ते से हमला करना ही है जिसके मात्र तीन रास्ते हैं ।
1- रूस द्वारा मध्य एशिया की ओर से
2- पाकिस्तान के रास्ते
3- भारत की ओर से
--अब आपको समझ आ गया होगा कि चीन रूस की खुशामद क्यों कर रहा है और क्यूँ अपनी पूर्वनीति के विपरीत सीरिया में रूस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ' एयर स्ट्राइक ' में भाग लेने को तैयार हो गया है । चीन का पूरा पूरा प्रयास रूस के साथ गठ बंधन करने का या कम से कम उसे ' न्यूट्रल ' रखने का होगा ताकि रूस की ओर से निश्चिंत हो सके ।
--पाकिस्तान की तरफ के रास्ते को चीन POK में सैन्य जमावड़ा करके और ग्वादर तक अबाध सैन्यसप्लाई की व्यवस्था द्वारा बंद कर चुका है । अगर सियाचिन पाकिस्तान के कब्जे में पहुंच गया तो चीन इस पूरे क्षेत्र को पूरी तरह " लॉक " कर देगा ।
--भारत के संदर्भ में दोनों पक्ष जानते हैं कि समझौता संभव नहीं क्योंकि ' तिब्बत की फांस ' दोनों के गले में अड़ी है । भारत को हतोत्साहित करने और सामरिक रूप से निर्णायक महत्वपूर्ण स्थानों को कब्जा करने हेतु ही वह अक्सर सीमा उल्लंघन करता रहता है ।
तो कुल मिलाकर ' भारत ' ही है जो चीन को रोकने के लिये पश्चिम का ' प्रभावी हथियार ' बन सकता है और यही कारण है कि पश्चिमी देशभारत में इतना ' इंट्रेस्ट ' दिखा रहे हैं ।
पश्चिम की इस विवशता को मोदी ने पकड़ लिया है इसीलिये संघर्ष से पूर्व 'अर्थववस्था और सैन्य टेक्नोलॉजी ' की दृष्टि से सक्षम बना देना चाहते हैं इसीलिये उनके दौरों में निरंतर दो बातें परिलक्षित हो रहीं हैं - आर्थिक निवेश और हथियारों की ताबड़तोड़ खरीदी के साथ सैन्य टेक्नोलॉजी का हस्तांतरण ।
इसी तरह कूटनीतिक विदेश दौरों के द्वारा लामबंद करते हुए चीन विरोधी पूर्वी देशों का संगठित करने की कोशिश करते हुए चीन के ' पर्ल स्ट्रिंग ' को तोड़ दिया है जिससे चिढकर ही चीन ने नेपाल में मधेशियों के विरुद्ध माहौल खड़ाकर भारत के नेपाल में बढ़ते प्रभाव को रोका है और इसका असर मोदी पर इंग्लैंड दौरे के दौरान दिखाई दिया ।
भारत की तैयारियां --
1-- भारी मात्रा में निवेश को आमंत्रित करना ।
2-- आर्थिक मोर्चे पर सुदृढ़ता हासिल करना ।
( सेनायें भूखे पेट युद्ध नहीं कर सकतीं )
3-- नौसेना का आधुनिकीकरण
4-- वायुसेना को एशिया में सर्वश्रेष्ठ बनाना और उज़्बेकिस्तान में भारत के सैन्य हवाई ठिकाने को मजबूत बनाना
5-- अंतरमहाद्वीपीय तथा मल्टीपल वारहैड मिसाइलों का विकास व आणविक शस्त्रागारों का विकास ।
6-- बलूचिस्तान व अफगानिस्तान में भारत के प्रभाव को बढ़ाना ।
7-- इलैक्ट्रोनिक वार के लिए " काली 5000 " जैसी तकनीक का उन्नतीकरण ।
8-- अंतरिक्षीय संसाधनों के उपयोग की संभावनाओं के मुद्देनजर " मार्स मिशन " व अन्य " अंतरिक्ष कार्यक्रमों " का संचालन ।
पर इतनी तैयारियों के बावजूद अभी भी भारत बहुत पिछड़ा हुआ है और पश्चिमी शक्तियों के ऊपर निर्भर है और उसे निर्भर रहना पड़ेगा ।
अब कल्पना कीजिये कि भारत में किसी भी मुद्दे पर देशव्यापी दंगे शुरू हो जाते हैं और उसी समय पाकिस्तान भी अघोषित हमला शुरू कर देता जिसे समर्थन देते हुये चीन भी अपने दावे के अनुसार अरुणाचल पर कब्जा कर लेता है और लद्दाख में भी घुस जाता है । अब बताइये भारत क्या करेगा ?
भारत के पास ले देकर 11 लाख रेगुलर आर्मी और 32 लाख रिजर्व आर्मी है जबकि चीन की वास्तविक सैन्य संख्या हमारी कल्पना से परे है । और फिलहाल चीन अपने खरीदे हुए भारतीय बुद्धिजीवियों द्वारा और सऊदी फंड से प्रायोजित मुस्लिमों व ' सैक्यूलर राजनेताओं ' द्वारा भारत में ही भारत के विरुद्ध ' अप्रत्यक्ष युद्ध ' छेड़ चुका है और इसका अगला कदम होगा ' गृह युद्ध ' जिसका एक लघुरूप हम पश्चिमी उत्तरप्रदेश में देख चुके है । अगर ये गृहयुद्ध शुरू होता है और यकीन मानिये वो होगा ही ' और यह होगा संसाधनों ' के लिये परंतु ' धर्म ' के नाम पर होगा । इस स्थिति का फायदा उठाने से पाकिस्तान नहीं चूकेगा और ऐसी स्थिति में अगर चीन भी मैदान में उतरा तो अमेरिका व पश्चिम को भी हस्तक्षेप करना पड़ेगा और यह तीसरे विश्वयुद्ध की शुरूआत होगी
तो पूरा परिदृश्य क्या हो सकता है --
एक तरफ चीन + पाकिस्तान + अरब देश
दूसरी ओर अमेरिका + इजरायल +यूरोप +जापान
रूस संभवतः तटस्थ रहेगा लेकिन अगर वह चीन के साथ कोई गुट बनाता है , चाहे वह आर्थिक गुट ( शंघाई सहयोग संगठन ) या सैन्य गुट ( जिसकी शुरूआत सीरिया में दिख रही है ) तो चीन बहुत भारी पड़ेगा ।
इस परिस्थिति में भारत के सामने अमेरिका के सहयोग करने के अलावा कोई चारा नहीं और ना ही पश्चिम के पास भारत जैसी विशाल मानव शक्ति है और यही कारण है कि पश्चिमी शक्तियां आज मोदी की तारीफों के पुल बांध रही हैं , भारी निवेश कर रहीं हैं ( बुलेट ट्रेन में जापान की उदार शर्तों के बारे में पढ़िये ) और सैन्य तकनीक का हस्तांतरण कर रहीं हैं जबकि इजरायल द्वारा चीन को " अवाक्स राडार " देने से मना कर दिया जाता है ।
मोदी की कोशिश है कि इस स्थिति के आने से पूर्व ही भारत को पश्चिम की 'आर्थिक व सैन्य मजबूरी ' बना दिया जाये और मोदी की सारी व्याकुलता , बैचैनी और तूफानी विदेश दौरे उसी " महासंघर्ष " की तैयारी के लिये हैं ना कि ' तफ़रीह ' के लिये ।
मोदी की कोशिश चीन से त्रस्त वियतनाम , म्यामां , मंगोलिया , इंडोनेशिया , जापान आदि देशों के साथ मिलकर आक्रामक तरीके से घेरने की भी है और पहली बार भारत ने चीन को विएतनाम सागर जिसे चीन दक्षिण चीन सागर कहता है , में दबंगई से अंगूठा दिखाया है । ये है मोदी की विदेश दौरों की कूटनीति का परिणाम ।
तो मोदी के नादान और अधीर समर्थको , समझ गये ना कि मोदी विदेश दौरे पर दौरे क्यों कर रहे हैं ?
तो दोस्तो ---
- रामलला को कुछ दिन और तंबू में रह लेने दो
- कुछ दिन और गायमाता का दर्द बर्दाश्त कर लो
- कुछ दिन और समान संहिता का इंतजार कर लो
- कुछ दिन और कश्मीरी पंडितों की तकलीफ झेलो
- कुछ दिन और महंगी रोटी पैट्रोल से गुजारा करो
क्योंकि --
--पहले, भारत को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करना है
--दूसरा , भारत को सैन्य महाशक्ति बंन जाने दो
-- तीसरा , भारत को आंतरिक शत्रुओं से निबटने लायक क्षमता हासिल करने दो ।
-- चौथे , तुम खुद अपने आपको गृहयुद्ध की स्थिति में दोहरे आक्रमण का प्रतिरोध करने लायक तैयार कर लो
क्योंकि
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क्योंकि
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क्योंकि
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************ " Great Game " *********
अंहिसा परमो धर्मः धर्मः हिंसा तथैव च।