Tuesday, 4 April 2017

जानो और जागो

 * *72 करोड़ ओबीसी और 32 करोड़ एस.सी/एस.टी जागो **


जो बोलते है आरक्षण की वजह से जॉब नही मिल रही वो अवश्य जानले कि तुम्हारी जॉब कोन हडप रहा है..

* *जानो और जागो **

"आरक्षण --- जिसकी जितनी संख्या भारी,
उसकी उतनी हिस्सेदारी"

* *देश का SC/ST/OBC समाज जिनकी संख्या (87.5%) है वो अब जाग गया है.**

* *भारत में लोकतंत्र लागू है पर इन 66 वर्ष में सरकारों ने यहां ब्राह्मणतंत्र स्थापित कर लिया है, ये रहे सबूत *

(1) राष्ट्रपति - प्रणव मुखर्जी - ब्राह्मण

(2) प्रधानमंत्री - नरेंद्र मोदी - बनिया

(3) ग्रहमंत्री - राजनाथ सिंह - ठाकुर

(4) विदेशमंत्री - सुषमा स्वराज - ब्राह्मण

(5) वित्तमंत्री - अरूण जेटली - ब्राह्मण

(6) रक्षामंत्री - मनोहर पारीकर - ब्राह्मण

(7) सड़क एवं परिवाहन मंत्री - नितिन गडकरी - ब्राह्मण

(8) महिला एवं बालविकास मंत्री - मेनका गांधी - वैश्य

(9) लोकसभा स्पीकर - सुमित्रा महाजन - ब्राह्मण

(10) प्रधानमंत्री के मुख्यसचिव - न्रपेंद्र मिश्रा - ब्राह्मण

(11) राष्ट्रपति कार्यालय में कुल 49 अधिकारी काम करते है. जिनमें SC/ST/OBC के होने थे 45, जबकि है केवल 0.सामान्य के होने थे 5, जबकि है 49.

(12) प्रधानमंत्री कार्यालय में कुल 53 अधिकारी काम करते है, जिनमें SC/ST/OBC के होने थे 47, जबकि हैं केवल 0. सामान्य के होने थे 6, जबकि है 53.

(13) विदेशी दूतावास में कुल 140 अधिकारी काम करते हैं, जिनमें SC/ST/OBC के होने थे 91, जबकि है केवल 0, सामान्य के होने थे 21 , जबकि है 140.

(14) भारत सरकार में कुल 84 सचिव हैं, जिनमें SC/ST/OBC के होने थे 75, जबकि है केवल 0. सामान्य के होने थे 8 , जबकि है 84.

(15) भारत सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल में कुल 27 मंत्री हैं. जिनमें SC/ST/OBC के होने थे 24 , जबकि है केवल 1, सामान्य के होने थे 3, जबकि है 20.

टाप 10 मंत्रीयों में सो एक भी ओबीसी नहीं.

(16) भारत में कुल 4657 आई.ए.एस. हैं. जिनमें ओबीसी के होने थे 3027, जबकि हैं केवल 655. सामान्य के होने थे 699, जबकि है 2993.

(17) देश के 18 राज्यों के हाईकोर्ट में कुल 481 जज हैं, जिनमें ओबीसी के होने थे 313, जबकि हैं केवल 36. सामान्य जाति को होने थे 72, जबकि है 426.

(18) मध्यप्रदेश के हाईकोर्ट में कुल 30 जज हैं. जिनमें से SC/ST/OBC के होने थे 20, जबकि है केवल 0. सामान्य जाति के होने थे 5 , जबकि है 30.

(19) भारत के सुप्रीम कोर्ट में कुल 23 जज हैं. जिनमें ओबीसी के होने थे 15, जबकि हैं केवल 0. सामान्य जाति के होना थे 3, जबकि हैं 23.

(20) भारत के 46 विश्वविद्यालयों में कुल 108 कुलपति हैं . जिनमें ओबीसी के होने थे 70, जबकि है केवल 0. सामान्य के होने थे 16, जबकि है 108

(21) बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU ) में कुल 670 प्रोफेसर हैं, जिनमें ओबीसी के होने थे 435, जबकि हैं केवल 0. सामान्य जाति के होने थे 100, जबकि हैं 670.

(22) दिल्ली विश्वविद्यालय ( DU) में  कुल 249 प्रोफेसर हैं. जिनमें ओबीसी के होने थे 162, जबकि हैं केवल 0. सामान्य जाति के होने थे 37, जबकि हैं 249.

(23) जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में कुल 470 प्रोफेसर हैं. जिनमें से ओबीसी के होने थे 305, जबकि हैं केवल 2. सामान्य जाति के होने थे 70, जबकि हैं 426.

(24) आई.आई.एम. लखनऊ में कुल 40 प्रोफेसर हैं, जिनमें से ओबीसी के होने थे 26, जबकि हैं केवल 1. सामान्य जाति के होने थे 6, जबकि है 30.

(25) भारत सरकार के कार्मिक मंञालय की रिपोर्ट 13 फरवरी 2012 के अनुसार दिनांक 01/12/10 तक विभिन्न वर्गों की नौकरी में संख्या और प्रतिनिधित्व निम्न है.

प्रथम श्रेणी में  :-
वर्ग.     संख्या    आरक्षण अस्तित्व मे
Open (12.5%) - 0%     75.5%,
OBC   (65%) - 27%      8.4%
SC/ST(22.5%)22.5%   16.1%

द्वितीय श्रेणी में :- आरक्षण अस्तित्व
Open (12.5%) - 0%    82.2%,
OBC    (65%) - 27%     6.1%
SC/ST(22.5%)22.5%   11.7%

तीसरी श्रेणी में :- आरक्षण अस्तित्व
Open (12.5%) - 0%  71.9%
OBC  (65%) - 27%  14.8%
SC/ST(22.5%)22.5% 13.3%

चतुर्थ श्रेणी में :- आरक्षण अस्तित्व
Open (12.5%) - 0%         69%
OBC (65%) - 27%        15.2%
SC/ST(22.5%) 22.5%  15.8%

(26) देश के उद्योग जगत की विभिन्न कंपनियों के बोर्ड मेम्बरों की स्थिति निम्न हैं.
Gen -12.5% -  है -92.6%
Sc/St-22.5%- है -3.5%
OBC- 65% -   है-3.8%


(29) देश में आरक्षण की स्थिति :-

वर्ग.      संख्या   आरक्षण
Sc -   15% -    15%
St -    7.5% -   7.5%
Obc-  65%  -   27%

(30) मध्यप्रदेश में वर्तमान में आरक्षण की स्थिति :-

वर्ग.      संख्या      आरक्षण
एससी -  16%   -  16%
एसटी -   20%   - 20%
ओबीसी- 65%   - 14%

जबकि ओबीसी को केरल में 40%, बिहार में 34%, कर्नाटका में 32% और महाराष्ट्रा में 32% आरक्षण है.

(31) सवर्णों का नौकरी में 79% हिस्सा होने के बाद भी हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट ने संविधान के विरूद्ध जाकर उन्हे 14% आरक्षण दिया है.

(33) संविधान द्वारा गठित मंडल कमीशन ने SC/ST/OBC के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण दिया, परन्तु सुप्रीमकोर्ट ने 16 नबम्वर 1992 को फैसला देकर उस पर रोक लगा कर  धोका किया है.

(33) हाल ही में गुजरात, राजस्थान और उ.प्र. हाईकोर्ट ने तथा सुप्रीमकोर्ट ने आरक्षण के संबंध में संविधान के विरूद्ध फैसले दिये हैं. इससे लगता है कि लोकतंत्र , संविधान और आरक्षण बड़े खतरे में है.

(34) 100 दिन के लिये मुझे सत्ता दे दो. यदि काला धन वापस नहीं ला पाया तो मुझे फांसी दे देना -- नरेंद्र मोदी -- 3 फरवरी 2013

(35) 3% ब्राह्मण, जो ग्राम पंचायत का चुनाव भी नहीं जीत सकता है वो देश की पंचायत ( संसद) पर कब्जा जमायें बैढ़ा है..

(36) सरकारी विद्यालयों का निजीकरण नहीं बल्कि निजी विद्यालयों का राष्ट्रीयकरण होना चाहिये.

(37) पाकिस्तान में पेट्रोल 26 रू. लीटर है तो भारत में 78 रू. लीटर क्यों ?

(38) संस्क्रत से पी.एच.डी. किया हुआ एक ओबीसी को मंदिर में पूजा करवाने का अधिकार नहीं है, लेकिन एक पांचवी फेल ब्राह्मण को सभी अधिकार है , क्यों ? 5000 सालो से चला से चला आ रहा ये कैसा आरक्षण है ?

(39) देश के 4 बड़े मंदिरों में प्रतिदिन 8 करोंड़ रू.की चढौत्री आती है. इस पर 100% अधिकार ब्राह्मणों का ही क्यों ? मंदिरों की संपत्ति देशवासियों में बाट दी जाये तो सभी करोड़पति हो जायें.

(40) म.प्र. सरकार पर 125 हजार करोड़ का कर्ज है. प्रत्येक व्यक्ति पर 12000 रू.है.

(41) अमेरिका देखा, पेरिस देखा, और देखा जापान .कनाडा देखा, चाईना देखा, सब देखा मेरी जान..

मगर न देखी उजड़ी खेती, और मरता किसान ......

(42) किसान प्रेम प्रसंग के कारण आत्महत्या कर रहें - राधामोहन सिंह - केंद्रीय क्रषिमंत्री

(43) म.प्र. में किसानों की फसल का 2136 करोड़ का बीमा हुआ. 141 करोड़ रू. की प्रीमियम कंपनी को दी गई. जब किसानों को मुआबजा देने की बारी आई तो केवल 1.65 करोड़ रू ही क्यों  दिये गये ??

(44) केंद्र की पिछली सरकार में क्रषि बजट 20,208 करोड़ रू. था, मोदी सरकार ने 13,523 करोड़ रू. कर दिया. कटौती - 7685 करोड़ रू. की.

(45) भारत में एक दिन में 46 किसान आत्महत्या करते है.1995 से 2013 के बीच 2,96,438 किसान आत्महत्या कर चुके हैं.

(46) भारत सरकार के स्वास्थ बजट में पिछली सरकार में 35,163 करोड़ रू. का प्रावधान था. इस बार मोदी सरकार ने 29,653 करोड. रू. का प्रावधान किया है. कटौती - 5510 करोड़ रू.की.

(47) पुलिस सुधार फंड में 1500 करोड़ की कटौती.

(48) इस सरकार नें एससी/एसटी के बजट में 32000 करोड़ की कटौती की है.

(49) करदाताओं के पैसे पर मौज कर रहे है उद्योगपति- रघुराज रंजन - गवर्नर भारतीय रिजर्व बैंक.

(50) देश में प्रतिवर्ष 35 लाख युवा ग्रेजुएट होते है, तथा 65 लाख युवा 12 वीं पास करते हैं. परन्तु सरकार ने 30 लाख जॉव की छटनी की है.

(53) अर्जुन सेन गुप्ता कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार :- देश में 29 करोड़ लोग भुखमरी के शिकार हैं, 83 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन जी रहे हैं.

लेख की साम्रगी - विभिन्न समाचार पत्रों, मंडल आयोग की रिपोर्ट, लोकसभा में लगाये प्रश्न, आर.टी.आई.,विभिन्न कमीशनों की रिपोर्ट और विभिन्न लेखकों की पुस्तकों पर आधारित है.


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ओबीसी महासभा

🙏🙏जय भारत 🙏🙏  

बड़ा खुलासा EVM पर शक

बड़ा खुलासा...

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मायावती और केजरीवाल का EVM पर शक करना कोई अँधेरे में तीर नहीं है....इसके पीछे कारण है और सॉलिड कारण है....
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ये सभी EVM मशीनें गुजरात के गांधीधाम के इलेक्ट्रॉनिक जोन में स्थित एक कंपनी में बनी हैं....जिसका मालिक मोदी जी का सहपाठी है..ये ऑर्डर इस कंपनी को इसलिए मिला क्योंकि उसने सबसे कम बोली लगाई थी...टेंडर्स पहले से लीक कर दिए गए थे.....जयतिभाई नाम के इस कंपनी मालिक का कहना है कि इस डील में वो घाटे में रहे और मशीने लागत से कम मूल्य पर बेची गई.......आगे उन्होंने बताया कि इस घाटे की पूर्ती अम्बानी और अडानी मिलकर मिलकर कर रहे हैं.....मशीन में एक ख़ास चिप बिठाई गई है जिसकी प्रोग्रामिंग कुछ इस प्रकार है कि कमल के अलावा पड़ने वाला हर दूसरा वोट ऑटोमैटिकली कमल के खाते में चला जाता है.....इससे विरोधियों को आधे वोट्स पड़ते हैं जिससे कि शक की गुंजाइश कम हो जाती है...
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यू पी और उत्तराखंड में इन मशीनों का प्रयोग टेस्टिंग के तौर पर किया गया जबकि पंजाब में इनमें से एक भी मशीन नहीं भेजी गई...वहीँ मणिपुर और गोवा में नई और पुरानी दोनों तरह की मशीनों का प्रयोग हुआ ताकि इन मशीनों के परिणामों की विस्तृत जांच हो सके और वास्तव में परिणाम वैसे ही आये जैसे भाजपा चाहती थी....ये एक सोची समझी साजिश थी ताकि मिश्रित परिणामों के कारण लोगों का ध्यान मशीनों की ओर ना जाए.....

सोमनाथ में हुई मीटिंग के दौरान भी जयति भाई मौजूद था, नीले घेरे में खड़ा हुआ शख्स ही जयति भाई है।   


  EVM विवाद पर 24 मार्च को सुनवाई के लिए तैयार सुप्रीम कोर्ट

नेशनल दस्तक ब्यूरो
2017-11-21

नई दिल्ली। ईवीएम से छेड़छाड़ मामले की सुनवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय 24 मार्च को इस मामले की सुनवाई करेगा। गौरतलब है कि पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद कई राजनीतिक पार्टियों ने ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोप लगाए। सबसे पहले बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि बीजेपी के इशारे पर ईवीएम में छेड़छाड़ की गई है। बाद में आम आदमी पार्टी ने भी चुनावों में हार के लिए ईवीएम को जिम्मेदार ठहराया।

यूपी के चुनाव नतीजे आने के बाद सबसे पहले मायावती ने कहा कि ईवीएम में छेड़छाड़ की गई है। उसके बाद अखिलेश यादव ने कहा था कि मायवाती के आरोपों में सच्चाई है, या नहीं, इसे कुछ दिनों के बाद बताएंगे। इसके बाद उनकी पार्टी के नेता ने कहा कि सपा के पास ईवीएम से छेड़छाड़ के सबूत हैं वे इन्हें लेकर कोर्ट जाएंगे। वहीं उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी छेड़छाड़ के आरोप से इंकार नहीं किया था।

हालांकि इन आरोपों को चुनाव आयोग ने सिरे से नकार दिया था। चुनाव आयोग ने साफ शब्दों में कहा था कि ईवीएम में किसी प्रकार की कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। ईवीएम और चुनावों में शुचिता रखने के लिए टेक्निकल और प्रशासनिक स्तर पर पूरी तरह से सावधानी रखी जाती है। जबकि 2009 में ईवीएम पर खुद भाजपा ने सवाल खड़े किए थे। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में ईवीएम के साथ वीवीपीएटी लगाने के भी निर्देश दिये थे जिसके लिए सरकार द्वारा पर्याप्त फंड नहीं दिया गया।


चुनाव आयोग ने कहा था कि जिन राजनितिक दलों या फिर व्यक्तियों के पास ऐसा कोई सबूत हैं, जिससे साबित होता हो कि ईवीएम में छेड़छाड़ हो सकती है, तो वो इनको लेकर के आये। आयोग इन सबूतों को गंभीरतापूर्वक देखने के बाद ही किसी तरह का कोई निर्णय लेगा। आपको बता दें कि इस बार गोवा में वीवीपीएटी से चुनाव हुए थे। वहीं यूपी और उत्तराखंड में सिर्फ कुछ सीटों पर इन मशीनों का इंतजाम किया गया था।



  कितने अमीर हैं यूपी के सीएम
आदित्यनाथ और उनके मंत्री
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री महंत आदित्यनाथ योगी ने शपथ लेने के
बाद पहली बैठक में ही अपने मंत्रियों से संपत्ति
का ब्योरा मांग लिया है। अधिकारियों से भी
उन्होंने 15 दिन के अंदर यह ब्योरा देने को कहा है।
योगी के मंत्रिमंडल में अधिकतर सदस्य करोड़पति
हैं।
यह हम उन हलफनामों के आधार पर कह रहे हैं जो
मंत्रिमंडल के सदस्यों ने चुनाव में नामांकन के
दौरान दिए हैं। मुख्यमंत्री खुद करोड़पति नहीं हैं
लेकिन 46 मंत्रियों में से 34 करोड़पति और दस की
संपत्ति एक करोड़ से कम है।
सबसे धनी मंत्रियों में राजा जय प्रताप सिंह का
नाम सबसे ऊपर है। उनके पास 49 करोड़ पांच लाख
से अधिक की संपत्ति है। सबसे कम संपत्ति वाले
मंत्रियों में गिरीश यादव हैं। उनके पास 13 लाख
50 हजार रुपये की संपत्ति है।
गोरखपुर से सांसद व मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की
कुल संपत्ति 72 लाख 17 हजार रुपये है जो उन्होंने
2014 के लोकसभा चुनाव में नामांकन के दौरान
बताया था।


🔴 EVM_Scam 🔴

१) EVM_Scam से नजर हटाने के लिए ब्राह्मणों ने सबसे पहले योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री (CM) बनाया |


२) EVM_Scam से नजर हटाने के लिए ब्राह्मणों ने प्रदेश में किसान कर्जमाफी का मुद्दा उठाया |


३) EVM_Scam से नजर हटाने के लिए ब्राह्मणों ने प्रदेश में आरक्षण खत्म किया |


४) EVM_Scam से नजर हटाने के लिए ब्राह्मणों ने मोहन भागवत की राष्ट्रपती पद को लेकर चर्चा को बढावा दिया |


५) EVM_Scam से नजर हटाने के लिए ब्राह्मणों ने कुलभुषण जाधव का मुद्दा उठाया |


६) EVM_Scam से नजर हटाने के लिए ब्राह्मणों ने पाकिस्तान + भारत का नकली विवाद खडा किया |


७) EVM_Scam से नजर हटाने के लिए ब्राह्मणों ने भारत पर आतंकी हमले की खबर फैलाई |


८) EVM_Scam से नजर हटाने के लिए ब्राह्मणों ने मिडीया के माध़्यम से चुनाव आयोग की इव्हिएम को हैक करणे की खबर फैलाई |


९) EVM_Scam से नजर हटाने के लिए ब्राह्मणों ने दिल्ली मेट्रो स्टेशन के Led Screen पर Porn Film चलाई |


१०) EVM_Scam से नजर हटाने के लिए ब्राह्मणों ने सोनु निगम से मुँह से मुसलमानों के खिलाफ गलत टिप्पनी दी |



११) EVM_Scam से नजर हटाने के लिए ब्राह्मणों ने खुद्द की पार्टी सेना और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को साथ लेकर जानबुझकर पुर्णा में डॉ. बाबासाहब आंबेडकर की जयंती पर पत्थरबाजी की |


EVM_Scam से नजर हटाने के लिए ब्राह्मणों ने और बहुत सारे मुद्दो को उठाया है | उन मुद्दों का विरोध (पोलखोल) तो जारी रहेगा | साथ में हमारा BanEVM अभियान भी जारी रहेगा |



हथियार बन्द आंदोलन क्यों चलाया?

अनु- सूचित जाति या जन- जाति   से सम्बन्धित  लोगो के लिए  पढना मैनडेटरी  है ।
क्योंकि   इस  ब्राह्मणवाद   को खत्म करने  के  लिए  यह  जानना जरूरी  है कि  ब्राह्मणवादी लोगों ने  इस  वर्ण  पर   क्या क्या  अत्याचार  किए थे।  जान कर आपके रोंगटे  खड़े हो जाएंगे।  इस   देश मे अंग्रेजी    शासन   नही   आता    तो    अनुमान    नही लगा    सकते  आज  क्या    हालत   होती । वैसे   अभी  भी   कोई   कसर   बाकि नही है।    आप      से   करबद्ध  अनुरोध  है  कि आप को   जब   भी  समय मिले   तो  यह   पोस्ट  जरूर जरुर  पढे ।
🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

अंग्रेजों ने भारत पर 150 वर्षों तक राज किया ब्राह्मणों ने उनको भगाने का हथियार बन्द
आंदोलन क्यों चलाया?
जबकि भारत पर सबसे पहले हमला मुस्लिम
शासक मीर काशीम ने 712 ई. में किया! उसके बाद महमूद   गजनबी, मोहमंद गौरी, चन्गेज खान ने हमला किए और फिर  कुतुबदीन   एबक, गुलामवंश, तुगलकवंश, खिलजीवंश, लोदीवंश
फिर मुगल आदि वन्शो
ने भारत पर राज किया
और   खूब    अत्याचार
किए  लेकिन ब्राह्मण ने
कोई क्रांति या आंदोलन
नही चलाया ! फिर
अन्ग्रेजो के खिलाफ़ ही
क्यों क्रांति कर दी ।

जानिये  क्रांति   और  आंदोलन की वजह ।

1- अंग्रेजो  ने    1795
में अधिनयम 11  द्वारा
शुद्रों  को   भी    सम्पत्ति
रखने का कानून बनाया।

2- 1773 में ईस्ट इंडिया
कम्पनी ने रेगुलेटिग एक्ट पास किया जिसमें न्याय
व्यवस्था समानता    पर
आधारित थी ।  ।6 मई 1775 को  इसी  कानून द्वारा बंगाल के सामन्त ब्राह्मण  नन्द कुमार देव को फांसी हुई थी ।

3- 1804 अधिनीयम 3 द्वारा   कन्या  हत्या   पर रोक   अंग्रेजों  ने  लगाई (लडकियों के पैदा होते ही तालु में अफीम चिपकाकर, माँ के
स्तन पर धतूरे का
लेप लगाकर, एवम्
गढ्ढा बनाकर उसमें दूध डालकर डुबो कर मारा जाता था ।

4- 1813 में ब्रिटिश सरकार ने कानून बनाकर शिक्षा ग्रहण करने का सभी जातियों और धर्मों के लोगों को अधिकार दिया।


5- 1813 में  ने दास प्रथा का अंत कानून बनाकर किया।

6-  1817  में     समान नागरिक संहिता कानून बनाया ।   1817    के पहले सजा का प्रावधान वर्ण के आधार पर था। ब्राह्मण को कोई   सजा नही होती थी ओर   शुद्र को   कठोर   दंड   दिया
जाता था। अंग्रेजो      ने सजा का प्रावधान समान कर दिया।

7- 1819 में अधि- नियम  नम्बर  7 द्वारा ब्राह्मणों  द्वारा    शुद्र  स्त्रियों के शुद्धिकरण पर रोक लगाई।  (शुद्रों की शादी होने पर दुल्हन को अपने यानि दूल्हे  के घर न जाकर कम से कम तीन रात  ब्राह्मण के घर शारीरिक   सेवा देनी पड़ती थी।)

8- 1830 नरबलि प्रथा पर रोक - (देवी देवता को प्रसन्न करने के लिए ब्राह्मण शुद्रों,  स्त्री   व् पुरुष दोनों को मन्दिर
में सिर पटक पटक कर
चढ़ा देता था। )

9- 1833   अधिनियम 87 द्वारा सरकारी सेवा में भेद भाव   पर   रोक अर्थात  योग्यता ही सेवा का  आधार     स्वीकार किया गया तथा कम्पनी केअधीन किसी भारतीय
नागरिक     को     जन्म स्थान, धर्म, जाति या रंग के आधार   पर   पद  से वंचित  नही   रखा    जा सकता है।

10- 1834  में   पहला भारतीय  विधि  आयोग का गठन हुआ । कानून
बनाने   की     व्यवस्था जाति,  वर्ण,  धर्म  और क्षेत्र की भावना से ऊपर उठकर  करना   आयोग का प्रमुख उद्देश्य था।

11-  1835  प्रथम  पुत्र को गंगा दान पर रोक !   (ब्राह्मणों ने नियम बनाया  की शुद्रों के घर यदि पहला बच्चा लड़का पैदा हो तो  उसे गंगा में फेंकदेना चाहिये।
पहला पुत्र ह्रष्ट-पृष्ट एवं
स्वस्थ पैदा होता है।यह
बच्चा ब्राह्मणों से लड़ न
पाए इसलिए पैदा होते ही गंगा को दान करवा देते थे। )

12- 7 मार्च 1835 को
लार्ड मैकाले ने   शिक्षा
नीति राज्य  का  विषय
बनाया और उच्च शिक्षा
को   अंग्रेजी   भाषा का
माध्यम  बनाया  गया।

13- 1835 को कानून बनाकर अंग्रेजों ने शुद्रों को कुर्सी पर बैठने का अधिकार दिया।


14- दिसम्बर 1829 के
नियम 17 द्वारा विधवाओं को जलाना अवैध घोषित कर सती प्रथा का अंत किया।

15- देवदासी   प्रथा पर
रोक लगाई। ब्राह्मणों के
कहने   से  शुद्र   अपनी
लडकियों को मन्दिर की
 सेवा के लिए  दान  देते थे। मन्दिर  के   पुजारी उनका शारीरिक शोषण करते थे। बच्चा पैदा होने पर उसे  फेंक देते थे।और उस बच्चे को हरिजन नाम  देते थे।
1921 को जातिवार जनगणना के आंकड़े के अनुसार अकेले मद्रास में कुल जनसंख्या 4 करोड़
 23 लाख थी जिसमें 2
लाख देवदासियां मन्दिरों में पड़ी थी।  यह प्रथा अभी भी दक्षिण भारत के मन्दिरो  में  चल रही है।

16- 1837 अधिनियम द्वारा ठगी प्रथा का अंत किया।

17- 1849 में कलकत्ता
 में एक बालिका विद्यालय जे ई डी बेटन ने स्थापित  किया।

18-  1854 में अंग्रेजों ने  3 विश्वविद्यालय कलकत्ता मद्रास और बॉम्बे में स्थापित किये। 1902 मे विश्वविद्यालय आयोग   नियुक्त किया गया।

19- 6 अक्टूबर 1860
को अंग्रेजों  ने  इंडियन
पीनल    कोड  बनाया।
लार्ड मैकाले ने सदियों
से  जकड़े   शुद्रों    की
जंजीरों  को  काट दिया
ओर भारत में जाति, वर्ण और धर्म के बिना  एक
समान   क्रिमिनल   लॉ
लागु कर दिया।

20- 1863 अंग्रेजों   ने कानून बनाकर   चरक पूजा पर रोक लगा दिया (आलिशान भवन एवं पुल निर्माण पर शुद्रों को
पकड़कर जिन्दा चुनवा
दिया जाता था इस पूजा
में मान्यता थी की भवन
और पुल ज्यादा दिनों
तक  टिकाऊ  रहेगें।

21- 1867 में  बहू विवाह प्रथा पर पुरे देश में  प्रतिबन्ध लगाने के
उद्देश्य से बंगाल सरकार
ने एक कमेटी गठित किया ।

22- 1871 में अंग्रेजों ने भारत में जातिवार गणना प्रारम्भ की। यह जनगणना 1941 तक हुई । 1948 में पण्डित नेहरू ने कानून बनाकर जातिवार गणना पर रोक लगा दी।

23- 1872 में सिविल
मैरिज एक्ट द्वारा 14
वर्ष से कम आयु की कन्याओं एवम् 18 वर्ष से कम आयु के लड़को
का विवाह वर्जित करके
बाल  विवाह  पर   रोक
लगाई।

24- अंग्रेजों ने महार और चमार रेजिमेंट बनाकर इन जातियों को सेना में  भर्ती किया लेकिन 1892  में ब्राह्मणों के दबाव के कारण सेना में अछूतों की भर्ती बन्द हो गयी।

25- रैयत वाणी पद्धति अंग्रेजों    ने    बनाकर प्रत्येक पंजीकृत भूमिदार को  भूमि का स्वामी स्वीकार  किया।

26- 1918 में साऊथ
बरो कमेटी को भारत मे
अंग्रेजों ने भेजा ।   यह कमेटी भारत में   सभी जातियों का विधि
मण्डल (कानून बनाने
की संस्था) में भागीदारी
के लिए आया था। शाहू
जी महाराज   के  कहने पर  पिछङो    के   नेता भाष्कर   राव जाधव ने एवम् अछूतों के नेता डा
अम्बेडकर ने   अपने लोगों को विधि मण्डल में  भागीदारी के लिये
मेमोरेंडम दिया।

27- अंग्रेजो ने 1919 में भारत सरकार अधिनियम का गठन किया ।

28- 1919 में अंग्रेजो ने ब्राह्मणों के जज बनने पर रोक लगा दी थीऔर
कहा था की इनके अंदर
न्यायिक चरित्र नही होता है।

29- 25 दिसम्बर1927
को डा अम्बेडकर द्वारा
मनु समृति का दहन किया। मनु स्मृति में
शूद्रों और   महिलाओं   को गुलाम   तथा  भोग  की वस्तु समझा जाता था एक  पुरूष   को अनगिनत  शादियां करने का धार्मिक अधिकार है। महिला अधिकार विहीन तथा दासी की स्थिति में थी। एक - एक औरत के अनगिनत  सौतने   हुआ करती थी   औरतो- शूद्रों को सिर्फ   और    सिर्फ गुलामी लिखा है जिसको एक  राक्षस मनु  ने  धर्म का नाम दिया है।

30- 1 मार्च 1930 को
डा अम्बेडकर द्वारा काला राम मन्दिर (नासिक)  प्रवेश का आंदोलन  चलाया।

31- 1927 को अंग्रेजों ने कानून बनाकर शुद्रों के सार्वजनिक स्थानों पर जाने का अधिकार दिया।

32- नवम्बर 1927   में साइमन   कमीशन   की नियुक्ति की। जो 1928 में भारत के अछूत लोगों की  स्थिति का सर्वे करने और उनको अतिरिक्त अधिकार देने के लिए आया। भारत के लोगों को अंग्रेज अधिकार न दे सके इसलिए इस कमीशन के भारत पहुँचते ही गांधी और लाला लाजपत राॅय ने इस कमीशनके विरोध में बहुत बड़ा आंदोलन चलाया। जिस कारण
साइमन कमीशन अधूरी
रिपोर्ट लेकर वापस
चला गया। इस पर
अंतिम फैसले के लिए
अंग्रेजों ने भारतीय
प्रतिनिधियों को 12
नवम्बर 1930 को लन्दन गोलमेज सम्मेलन में  बुलाया।

33- 24 सितम्बर 1932 को अंग्रेजों ने कम्युनल
अवार्ड घोषित किया
जिसमें प्रमुख अधिकार
निम्न दिए----

A--वयस्क मताधिकार

B--विधान मण्डलों और
संघीय सरकार में जन संख्या   के  अनुपात
में अछूतों को आरक्षण
का अधिकार

C--सिक्ख, ईसाई और मुसलमानों की तरह अछूतों (SC/ST )को  भी स्वतन्त्र निर्वाचन के क्षेत्र का अधिकार मिला। जिन क्षेत्रों में अछूत प्रतिनिधिखड़े होंगे उनका चुनाव केवल अछूत ही करेगें।

D--प्रतिनिधियोंको चुनने के लिए दो बार वोट का
अधिकार मिला  जिसमें
एक   बार  सिर्फ  अपने
प्रतिनिधियों को वोट देंगे
दूसरी   बार    सामान्य
प्रतिनिधियों   को   वोट देगे।

34- 19 मार्च 1928 को बेगारी प्रथा के विरुद्ध डा अम्बेडकर ने मुम्बई
विधान परिषद मेंआवाज
उठाई , जिसके बाद
अंग्रेजों ने इस प्रथा को
समाप्त कर दिया।

35- अंग्रेजों ने 1 जुलाई 1942 से लेकर 10 सितम्बर 1946 तक डाॅ अम्बेडकर को वायसराय की कार्य साधक कौंसिल में   लेबर   मेंबर बनाया। लेबरो को डा अम्बेडकर ने 8.3 प्रतिशत आरक्षण दिलवाया।

36-- 1937 में अंग्रेजों
ने भारत में प्रोविंशियल गवर्नमेंट   का    चुनाव करवाया।

37-- 1942 में अंग्रेजों
से डा. अम्बेडकर ने 50
हजार हेक्टेयर भूमि को
अछूतों एवम् पिछङो में
बाट देने के लिए अपील
किया ।  अंग्रेजों ने 20 वर्षों की समय सीमा तय किया था।

38- अंग्रेजों   ने  शासन प्रसासन में ब्राह्मणों  की भागीदारी को 100% से 2.5% पर लाकर खड़ा
कर दिया था।

इन्ही सब वजाह से ब्राह्मणों  ने अन्ग्रेजो के खिलाफ़  क्रांति शुरू कर दी क्योकि  अन्ग्रेजो  ने शुद्रो और महिलाओं को सारे अधिकार दे दिये थे और  सब जातियो के लोगो को एक समान अधिकार देकर सबको बराबरी मे लाकर खडा किया
   ☸जय भीम ☸
जनजागरण  हेतु  ज्यादा से ज्यादा ग्रुपों में शेयर करो  ताकि  ज्यादा से ज्यादा  अनुसूचित जाति और जनजाति  के भाई लोग अपना  ज्ञानवर्धन कर सकें । पढेंगे   त
भी तो जानेंगे ।  इज्जत  से जीना चाहते  हो तो  देश से पाखण्ड वाद  हटाओ देश      की   अखण्डता बचाओ    पाखण्ड  मुक्त  भारत बनाओ ।

यह सब जानकर अगर आप समझते  हैं कि मैने आपका समय व्यर्थ  किया माफी चाहता हूँ । आगे से आपको  इस तरह की जानकारी वाली पोस्ट  नही भेजी जाऐगी ।
महेंद्र रोकडे 📝📝📝📝📝📝📝
  जय भीमजय भारत
🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼    

हिन्दू और मुसलमान

हिन्दू और मुसलमान.  

दोनो सुनें , थोडा धीरज से और थोडा ध्यान से पढ़े ?

* 250 वर्ष का इतिहास खंगालने पर पता चलता है , कि आधुनिक विश्व मतलब 1800 के बाद , जो दुनिया मे तरक़्क़ी हुई , उसमें पश्चिमी मुल्को यानी सिर्फ *यहूदी और ईसाई लोगो का ही हाथ है ! हिन्दू और मुस्लिम का इस विकास मे 1% का भी योगदान नही है !
* आप देखिये के 1800 से लेकर 1940 तक *हिंदू और मुसलमान सिर्फ बादशाहत या गद्दी के लिये लड़ते रहे !
अगर आप दुनिया के 100 बड़े वैज्ञानिको के नाम लिखें , तो बस एक या दो नाम हिन्दू और मुसलमान के मिलेंगे !
* पूरी दुनिया मे *61 इस्लामी मुल्क है , जिनकी जनसंख्या 1.50 अरब के करीब है और कुल 435 यूनिवर्सिटी है !
दूसरी तरफ हिन्दू की जनसंख्या 1.26 अरब के क़रीब है और 385 यूनिवर्सिटी है !
जबकि अमेरिका मे 3 हज़ार से अधिक और जापान मे 900 से अधिक यूनिवर्सिटी है !
ईसाई दुनिया के 45% नौजवान यूनिवर्सिटी तक पहुंचते हैं ! वहीं मुसलमान नौजवान 2% और हिन्दू नौजवान 8 % तक यूनिवर्सिटी तक पहुंचते हैं !
दुनिया के 200 बड़ी यूनिवर्सिटी मे से 54 अमेरिका , 24 इंग्लेंड , 17 ऑस्ट्रेलिया , 10 चीन , 10 जापान ,  10 हॉलॅंड , 9 फ़्राँस , 8 जर्मनी , 2 भारत और 1 इस्लामी मुल्क में हैं !
** अब हम आर्थिक रूप से देखते है !
अमेरिका का जी. डी. पी 14.9 ट्रिलियन डॉलर है !
जबकि पूरे इस्लामिक मुल्क का कुल जी. डी. पी 3.5 ट्रिलियन डॉलर है ! वहीं भारत का 1.87 ट्रिलियन डॉलर है !
दुनिया मे इस समय 38,000 मल्टिनॅशनल कम्पनियाँ हैं ! इनमे से 32000 कम्पनियाँ सिर्फ अमेरिका और युरोप में हैं !
अब तक दुनिया के 15,000 बड़े अविष्कारों मे 6103 अविष्कार अकेले अमेरिका में और 8410 अविष्कार ईसाइयों या यहूदियों ने किये हैं !
दुनिया के 50 अमीरो में 20 अमेरिका , 5 इंग्लेंड , 3 चीन , 2 मक्सिको , 2 भारत और 1 अरब मुल्क से हैं !
* अब आपको बताते है , कि हम *हिन्दू और मुसलमान जनहित , परोपकार या समाज सेवा मे भी ईसाईयों और यहूदियों से पीछे हैं !  रेडक्रॉस दुनिया का सब से बड़ा मानवीय संगठन है , इस के बारे मे बताने की जरूरत नहीं है !
* बिल गेट्स ने *10 बिलियन डॉलर से बिल- मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन की बुनियाद रखी , जो कि पूरे विश्व के 8 करोड़ बच्चो की सेहत का ख्याल रखती है !
जबकि हम जानते है , कि भारत में कई अरबपति हैं !
मुकेश अंबानी अपना घर बनाने मे 4000 करोड़ खर्च कर सकते हैं और अरब का अमीर शहज़ादा अपने स्पेशल जहाज पर 500 मिलियन डॉलर खर्च कर सकते हैं ! मगर मानवीय सहायता के लिये दोनों ही आगे नही आ सकते हैं !
* यह भी जान लीजिये की *ओलंपिक खेलों में अमेरिका ही सब से अधिक गोल्ड जीतता है ,  हम खेलो में भी आगे नहीं !
* *हम अपने अतीत पर गर्व तो कर सकते हे , किन्तु व्यवहार से स्वार्थी ही है ! आपस में लड़ने पर अधिक विश्वास रखते हैं !
* *मानसिक रूप में आज भी हम विदेशी व्यक्ति से अधिक प्रवाभित हैं ! अपनी संस्कृति को छोड़ कर , विदेशी संस्कृति अधिक अपनाते हैं !
*" बस हर हर महादेव और अल्लाह हो , अकबर के नारे लगाने मे , हम सबसे आगे हैं ! अब जरा सोचिये , कि हमें किस तरफ अधिक ध्यान देने की जरुरत है ! क्यों ना हम भी दुनिया में मजबूत स्थान और भागीदारी पाने के लिए प्रयास करें , बजाय विवाद उत्पन्न करने के और हर समय हिन्दु - मुस्लिम करने के , खुद कि और देश की ऊन्नती पे ध्यान दे !
समय देने के लिए , धन्यवाद !
👏🙏🙏👏🙏🙏👏            

क्या मायने हैं योगी आदित्यनाथ

क्या मायने हैं योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री  बनाये जाने के ?

आदित्यनाथ कट्टर हिंदुत्व का चेहरा है। मतलब हिन्दूराष्ट्र का प्रतीक।

RSS का 90 साल पुराना एजेंडा, हिन्दू राष्ट्र की स्थापना।

क्या है हिन्दू राष्ट्र ?

मनुस्मृति के अनुसार शासन का चलाना ही हिन्दू राज है। मतलब संविधान में बदलाव और उसे कमजोर करने की और पहला कदम है आदित्यनाथ।

आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने के पीछे बहुत बड़ी योजना है। इससे हिंदुओं का ध्रुवीकरण होगा और मुस्लिमों और दलितों को कमजोर किया जायेगा। आदित्यनाथ का चेहरा कट्टर हिंदुओं को एक साथ लाएगा और जोड़े रखेगा। दूसरी तरफ मोदी उदारवाद का झूठा चोला ओढ़कर हर वर्ग को अपने साथ जोड़ने का नाटक जारी रखेगा। मौर्य को उपमुख्यमंत्री बनाया जाना इसी योजना का हिस्सा है।

मोदी का यह नाटक तब तक जारी रहेगा जब तक मुसलमान और दलित बिलकुल टूट नहीं जाते, बिलकुल कमजोर नहीं हो जाते। इसमें कई साल भी लग सकते हैं, कोई आजकल में नहीं होने वाला। दलित आंदोलन को ख़त्म किया जायेगा और विपक्ष को भी उभरने नहीं दिया जाएगा।

आदित्यनाथ कट्टर हिंदुओं को BJP के साथ जोड़े रखने के काम आएगा और मोदी विकास के नाम पर बचे लोगों को अपने साथ जोड़कर BJP को सबसे शक्तिशाली बनाने का काम जारी रखेगा।

वैसे यह सिर्फ एक दिखावा होगा, लोगों को मूर्ख बनाये रखने के लिए कि यहाँ लोकतंत्र चल रहा है, लोग अपने वोट से BJP को चुन रहे हैं। लेकिन असली काम करेगी EVM, जिसका उदाहरण अभी UP चुनाव में देखने को मिला। लोग सोचते रहेंगे की मुस्लिम ने BJP को वोट दिया, दलित BJP के साथ हैं और पूरे भारत का साथ BJP को है।

दरअसल BJP सत्ता में बने रहेगी लोगों को इसी तरह से उल्लू बनाकर ताकि कोई बगावत ना हो जाए, लोग विरोध में ना उतर आएं।

इधर दलितों को भगवान् और कर्मकांडों में उलझा कर ब्राह्मणवाद की नींव मजबूत की जाएगी, दलित भी अब जमकर जय श्री राम करेंगे और राम की रक्षा के लिए जान देंगे। दलितों का इस्तेमाल मुस्लिमों को कमजोर करने में किया जाएगा। जब तक मुस्लिम टूट नहीं जाते, ख़त्म नहीं हो जाते,वोट बैंक बिखर नहीं जाता, दलित काम के रहेंगे।

मुस्लिमों को कमजोर करने के बाद अगले नंबर दलितों का आएगा। दलितों को बहुत ही चालाकी से कमजोर किया जायेगा। इसके लिए OBC का सहारा लिया जाएगा और दलितों पर जुल्म होंगे ताकि वे अपने अधिकार भूलें।

दलितों को कमजोर करने के लिए कई स्तर पर काम होगा। आरक्षण में बदलाव किये जायेंगे और प्रयास किया जाएगा कि 15-20 साल में इसे बिलकुल कमजोर कर दिया जाये। शिक्षा को दलितों की पहुँच से दूर करने की कार्यवाही शुरू होगी और इस बात के पूरे इंतजाम किये जायेंगे की दलितों को कभी भी सर्वोच्च पदों पर ना पहुँचने दिए जाये।

बस ज्यादा कुछ नहीं होगा इतना ही होगा की दलित फिर से गुलाम जैसे हो जाएंगे। नौकरियां कम हो जाएंगी और बेरोजगारी बढ़ जायेगी। इससे गरीबी बढ़ेगी और दलित ना चाहते हुए भी गुलामी करने को मजबूर हो जाएंगे।   

 "विरोधी हैं इसलिए विरोध करना चाहिए " ये नीति हमेशा कल्याणकारी नहीं होती है। मैं भी समाज के ऐसे दलालों का घोर विरोधी हूँ पर यहां पर अठ्टावले का समर्थन करता हूं क्योंकि आरक्षण का प्रावधान जाति के लिए किया गया है किसी व्यक्ति के लिए नहीं ।अट्ठावले ने आरक्षण समाप्ति के पूर्व पूर्ण रूपेण जाति समाप्ति का शर्त रखी है जो एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और ब्राह्मण एवं ब्राह्मणवाद का विनाश का मुद्दा है ।
इस देश में ब्राह्मण इसलिए शासक वर्ग बना हुआ है कि यहां जाति है । जाति एवं जातिवाद ही ब्राह्मणों की जीवनी शक्ति है ।
    जाति का निर्माण ब्राह्मणों मूलनिवासी (शूद्रों)  के विनाश के लिए ही किया है। गौतमबुद्ध की बौद्धिक क्रांति इसलिए सफल हुई थी कि उस समय भारत का मूल निवासी (शूद्र) की एक ही जाति थी और वह थी शुद्र एवं आर्यों अपने को तीन वर्णों बांट रखा था।
प्रति क्रांति के बाद शूद्रों को 6743 जातियों में बांट दिया गया और उनके बीच क्रमिक- असमानता पैदा कर गैर बराबरी पैदा कर दी गई, जो आजतक कायम है। जाति के अन्दर गैरबराबरी (Graded inequality) ही ब्राह्मण एवं ब्राह्मणवाद की जीवनी शक्ति है।



त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार का वह भाषण जिसे भारत के संघीय ढाँचे के सिद्धांतों का नग्न उल्लंघन करते हुए स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर आकाशवाणी ने प्रसारित करने से इंकार कर दिया :

त्रिपुरा के प्रियजनो,

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आप सबका अभिनंदन और सबको शुभकामनाएं । मैं भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के शहीदों की अमर स्मृतियोंको श्रद्धांजलि देता हूँ । उन स्वतंत्रता सेनानियों में जो आज भी हमारे बीच मौजूद है उन सबके प्रति अपनी आंतरिक श्रद्धा व्यक्त करता हूँ ।

स्वतंत्रता दिवस को मनाना कोई आनुष्ठानिक काम भर नहीं है । इसके ऐतिहासिक महत्व और इस दिन के साथ जुड़ी भारतवासियों की गहरी भावनाओं के चलतेइसे राष्ट्रीय आत्म - निरीक्षण के एक महत्वपूर्ण उत्सव के तौर पर मनाया जाना चाहिए ।

इस स्वतंत्रता दिवसके मौक़े पर हमारे सामने कुछ अत्यंत प्रासंगिक, महत्वपूर्ण और समसामयिक प्रश्न उपस्थित हैं । विविधता में एकता भारत की परंपरागत विरासत है । धर्म निरपेक्षता के महान मूल्यों ने भारत को एक राष्ट्र के रूप में एकजुट बनाये रखा है । लेकिन आज धर्म-निरपेक्षता की इसी भावना पर आघात किये जा रहे हैं । हमारे समाज में अवांछित जटिलताएँ और दरारें पैदा करने के षड़यंत्र और प्रयत्न किये जा रहे हैं ; धर्म, जाति और संप्रदाय के नाम पर, भारत को एक खास धर्म पर आधारित देश में बदलने तथा गाय की रक्षा खाके नाम पर उत्तेजना फैला कर हमारी राष्ट्रीय चेतना पर हमला किया जा रहा है । इनके कारण अल्प-संख्यक और दलित समुदाय के लोगों पर भारी हमले हो रहे हैं । उनके बीच सुरक्षा का भाव ख़त्म हो रहा है । उनके जीवन में भारी कष्ट हैं । इन नापाक रुझानों को कोई स्थान नहीं दिया जा सकता है, न बर्दाश्त किया जा सकता है । ये विभाजनकारी प्रवृत्तियाँ हमारे स्वतंत्रता संघर्ष के उद्देश्यों, स्वप्नों और आदर्शों के विरुद्ध हैं । जिन्होंने कभी स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया, उल्टे उसमें भीतरघात किया, जो अत्याचारी और निर्दयी अंग्रेज़ लुटेरों के सहयोगी थे और राष्ट्र-विरोधी ताक़तों से मिले हुए थे,, उनके अनुयायी अभी विभिन्न नामों और रंगों की ओट में भारत की एकता और अखंडता पर चोट कर रहे हैं ।प्रत्येक वफ़ादार और देशभक्त भारतवासी के आज एकजुट भारत के लिये और इन विध्वंसक साज़िशों और हमलों को परस्त करने के लिये शपथ लेनी चाहिए ।

हम सबको मिल कर संयुक्त रूप में अल्प-संख्यकों, दलितों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने और देश की एकता और अखंडता को बनाये रखने की कोशिश करनी चाहिए ।

आज ग़रीबों और अमीरों के बीतता फर्क तेज़ी से बढ़ रहा है । मुट्ठी भर लोगों के हाथ में राष्ट्र के विशाल संसाधान और संपदा सिमट रहे हैं । आबादी का विशाल हिस्सा ग़रीब है । ये लोग अमानवीय शोषण के शिकार हैं । उनके पास न भोजन है, न घर, न कपड़ें, न शिक्षा, न चिकित्सा और न निश्चित आय के रोजगार की सुरक्षा । यह भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के लक्ष्यों और उद्देश्यों के विपरीत है । इन परिस्थितियों के लिये हमारी आज की राष्ट्रीय नीतियाँ सीधे ज़िम्मेदार हैं । इन जन-विरोधी नीतियों को ख़त्म करना होगा । लेकिन यह काम सिर्फ बातों से नहीं हो सकता ।  इसके लिये वंचित और पीड़ित जनों को जागना होगा, आवाज उठानी होगी, और निर्भय हो कर सामूहिक रूप से बिना थके प्रतिवाद करना होगा । हमारे पास निश्चित तौर पर ऐसी वैकल्पक नीति होनी चाहिए जो भारत के अधिकांश लोगों के हितों की सेवा कर सके । इस वैकल्पिक नीति को रूपायित करने के लिये वंचित, पीड़ित भारतवासियों को इस स्वतंत्रता दिवस पर एकजुट होकर एक व्यापक आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन शुरू करने की प्रतिज्ञा करनी होगी ।

बेरोज़गारी की बढ़ती हुई समस्या ने हमारे राष्ट्रीय मनोविज्ञान में निराशा और हताशा के भाव को पैदा किया है । एक ओर लाखों लोग अपना रोजगार गँवा रहे हैं, दूसरी ओर करोड़ों बेरोज़गार नौजवान काम की प्रतीक्षा में हैं, जो उनके लिये मृग मरीचिका की तरह है । राष्ट्रीय आर्थिक नीतियों को बिना बदले इस विकराल समस्या का समाधान संभव नहीं है । यह नीति मुट्ठी भर मुनाफ़ाख़ोर कारपोरेट के स्वार्थ को साधती है । भारत की आम जनता की क्रय शक्ति में कोई वृद्धि नहीं हो रही है । इसीलिये इस स्वतंत्रता दिवस पर छात्रों, नौजवानों और मेहनतकशों को इन विनाशकारी नीतियों को बदलने के लिये सामूहिक और लगातार आंदोलन छेड़ने का प्रण करना होगा ।

केंद्र की सरकार की जन-विरोधी नीतियों की तुलना में त्रिपुरा की सरकार अपनी सीमाओं के बावजूद दबे-कुचले लोगों के उत्थान पर विशेष ध्यान देते हुए सभी लोगों के कल्याण की नीतियों पर चल रही है । यह एक पूरी तरह से भिन्न और वैकल्पिक रास्ता है । इस रास्ते ने न सिर्फ त्रिपुरा की जनता को आकर्षित किया है बल्कि  देश भर के दबे हुए लोगों में सकारात्मक प्रतिक्रिया पैदा की है । त्रिपुरा में प्रतिक्रियावादीमताकतों को यह सहन नहीं हो रहा है । इसीलिये शांति, भाईचारे और राज्य की अखंडता को प्रभावित करने के लिये जनता के दुश्मन एक के बाद एक साज़िशें रच रहे हैं । विकास के कामों को बाधित करने की भी कोशिश चल रही है । इन नापाक इरादों का हमें मुक़ाबला करना होगा और प्रतिक्रियावादियों ताक़तों को अलग-थलग करना होगा । इसी पृष्ठभूमि में, स्वतंत्रता दिवस पर, त्रिपुरा के सभी शुभ बुद्धिसंपन्न, शांतिप्रिय और विकासकामी लोगों को इन विभाजनकारी ताक़तों के खिलाफ आगे आने और एकजुट होकर काम करने का संकल्प लेना होगा ।

भारत का रतन केवल पंडा,पूजारी

 भारत का रतन केवल पंडा,पूजारीओंही है ???

आदिवासी नक्सलवादी है
मुसलमान आतंकवादी है
दलित आरक्षणवादी है
OBC जातिवादी है
मतलब 85 प्रतिशत लोग राष्ट्र की एकता और अखंडता
को खतरा है !
6 प्रतिशत बनिया समानतावादी है
6प्रतिशत राजपूत समाजवादी है
और
3 प्रतिशत ब्राह्मण सच्चे राष्ट्रवादी है
तो भारत रतन के असली हक़दार भी यही हुए !
भारत के अर्थमंत्री ने जारी किये गए एक रिपोर्ट के
अनुसार
देश की सालाना आय 1 लाख करोड़ से ज्यादा हैं और
भारत के मंदिरों की सालाना आय 22 लाख 50 हजार
करोड़ रूपये
हैं ।
मतलब देश आर्थिक उत्पन्न से कई गुना ज्यादा
भारत सरकार के पास
3 हजार 250 टन सोना पड़ा हैं
मंदिरों में 30,000 टन सोना पड़ा हैं
( ये दुनिया के बाकि देशो से ज्यादा हैं अमीरीका के
पास भी इतना सोना नहीं हैं )
-विदेशी देशो का हमारे देश पे 15 लाख करोड़ का
कर्जा हैं
देश के अकेले केरल स्थित पद्यनाम मंदिर में 25 करोड़ से
ज्यादा संपत्ति जमा हैं '
मतलब देश का अकेला मंदिर देश का कर्जा चुकाने में
सक्षम हैं ।
ऐसे ही शिर्डी, तिरुपति बालाजी,
सिद्दिविनायक , जैसे बिग बजेट वाले मंदिर भारत में
हैं ।
इन मंदिरों में अरबो - करोडो का सम्पत्ति हैं ।
शिर्डी के साईबाबा मदिर में गए 5 साल में डेढ हजार
करोड़ मिले हैं l मंदिर में पैसो के साथ साथ हजारो
एकर जमीन , हीरे , सोना , बोहत सी संपत्ति हैं
इन सब का पैसो का हिसाब लगाया जाय तो
calculator भी कुछ देर के लिए चकरा जायेगा।
जागतिक बैंक के रिपोर्ट के अनुसार --भारत के कुल लोक
संख्या के हिसाब से 41.6 लोग अभी भी गरीबी में
जीवन बसर कर रहे हैं ।
उनकी रोज की आय 20 ₹ से ज्यादा नहीं ।
National Council Of Uplide Economic
के रिपोर्ट के अनुसार देश के 11 करोड़ 50 लाख
परिवारों के एक माह का इनकम साडे सात हजार से
कम हैं ।
सेन गुप्ता रिपोर्ट के अनुसार देशातील 70% लोगो
का रोज की उत्पन्न 20 ₹ हैं।
एक तरफ देश के मंदिरों में पैसा पड़ा हैं वही दूसरी तरफ
देश के लोग भुखमरी के कगार पर हैं ।
कुछ लोग स्विच बैंक में पड़े काले लाने के पीछे पड़े हैं ।
मगर उन्हें मंदिरों में सड रहा पिला धन नजर नहीं आ
रहा !
स्विस बैंक में भारत का करीबन 2.8 लाख करोड़ ₹ है
ऐसा अंदाज लगाया जा रहा है ।
मंदिरों के धन के सामने काला धन कुछ भी नहीं ।
स्विस बैंक से काला धन जरुर लाये पहले मंदिरों में पड़े धन
निकालने की जरुरत हैं ।
गँभीरता से विचार करें।
सोचो और देश के आर्थिक परिस्थिती के अनुसार
फैसला लेँ।
ये बात वो सभी को भी पता है लेकिन वो इस बात पर
कभी नही बोलते l
इन्ही कारणों से मैं ब्राह्मणवाद का विरोधी हूँ।

🎯 ज्ञान का द्वीप जलाओ 

सुनील जैसवार की कलम से

सुनील जैसवार की कलम से 📝

Up का मुख्यमंत्री बनते ही योगी आदित्यनाथ ने up के सभी भुच्चड़ खाने (गाय/ भैंस) के कत्लखाने बंद करना प्रारंभ कर दिए..! बहूत अच्छी बात है..👌 अब योगी जी को ऐसा भी करना चाहिए की up में मछली बिक्री, बकरा मटन बिक्री, मुर्गी चिकन बिक्री, सूअर मांस बिक्री पर भी रोक लगा देना चाहिए। मंदिरो/ डीह/ सैय्यद/ देवी/ देवताओं के नाम पर मुर्गी/ बकरा/ सूअर बलि पर भी रोक लगा देना चाहिए क्योंकि ये सभी जानवर है इनके पास भी प्राण है। जब योगी जी गया को माता भैंस को मौसी कहते है और इनके कत्लखाने बंद करवा रहे है तो बकरा/ मुर्गी को काकी/ भतीजी मानकर उनकी भी रक्षा करनी चाहिए उनके प्राण बचाना चाहिए। Up के सड़कों पर खुले आम योगी जी के पिता/ बाप (सांड) खुले आम घूमकर हुड़दंग मचाते है उन्हें इनके सांड पिता पर भी काबू पाना चाहिए। योगी जी की माता गाय और योगी जी की मौसी भैंस को दिन भर सुखा घास खाना पड़ता है उन्हें इसपर भी ध्यान देना चाहिए

up में योगी जी ने सभी की समस्या का निवारण करने के लिए online police help और twitter तकनिकी का जरिया अपनाया है, up में गुंडे और मनचलो पर रोक लगाने के लिए महिला सुरक्षा करने के लिए police को 24 घंटे अलर्ट रहने कहा है..! बहूत अच्छी बात है..!👌 लेकिन क्या आप इस प्रक्रिया को continue जारी रखेंगे..? योगी जी आप इस प्रक्रिया को जारी रखिये कही up का वह कहावत सच न हो जाये की नई नई दुल्हन "महाऊर लगावे" और कही आपका गुंडा राज up में स्थापित न हो जाये। up में बीजेपी की जीत और आपके मुख्यमंत्री बनने में सबसे बड़ा रोल सबसे बड़ा कार्य RSS का है और आज ही अजमेर बम ब्लास्ट के "आतंकवादी" अपराधियों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। इस बम ब्लास्ट को अंजाम देने वाले हिन्दू RSS संगठन के अपराधी आतंकवादी "देवेंद्र गुप्ता" "भावेश पटेल" है जिन्हें आज उम्र कैद की सजा सुनाई गई। योगी जी क्या आप ऐसे आतंकवादी संगठन RSS और RSS के कार्यकर्ताओं को UP में BANNED करेंगे..? क्या आप RSS का हस्तक्षेप UP में नही होने देंगे..? क्या आप RSS के किसी भी फैसले को अमान्य करेंगे..?

योगी जी गाय/ भैंस से पहले आपको UP की सड़क/ बिजली दुरुस्त करनी चाहिए, चुनाव से पहले बीजेपी ने जो किसान कर्ज माफी का ऐलान किया था वह कार्य पूरा करना चाहिए। जनता को मुद्दे से भटकाने का यह नाटक बंद करके सबसे पहले किसान कर्ज माफी कीजिये और UP में 24 घंटे बिजली पूर्ति कीजिये।
जय भीम