Sunday, 25 February 2018

सूर्य को फल समझकर निगल गये थे।

 हनुमान जी जब छोटे थे तो बचपन में सूर्य को फल समझकर निगल गये थे।


सूर्य से पृथ्वी की दूरी -149.6 million km.

149600000 km
ध्यान दीजियेगा,और ये मेसेज पढने वाले आप अपना दिमाग लगाकर सोचना।

श्री लंका से हिमालय की दूरी 2400km
और वापस आना जाना हो गया 4800km
जब हनुमान जी बडे थे तो एक रात में हिमालय से लंका तक पहाड उठा लाये थे तो इस हिसाब से उनके उडने की स्पीड हुयी  4800÷12=400km per hr

जब हनुमान जी बडे थे तो 400 km की स्पीड से उडते थे ये मान लिया जाये कि बच्चा बडों से कमजोर होता है तो बचपन में वो 300 km की स्पीड से उडते होंगे
तो सूर्य की दूरी तय करने में लगा  समय

149600000÷300=498666 घण्टे

498666÷24=20777दिन

20777÷365=57साल
एक तरफ से विज्ञान के मुताबिक लगे 57 साल और दोनों तरफ से लगे 114 साल।
अब यहाँ कुछ प्रश्न हैं मेर
प्रश्न नम्बर एक

*जब वो 114 साल बाद वापस आये तो हनुमान जी बच्चे ही थे या बडे हो गये थे ?*

प्रश्न 2- *जब हनुमान जी ने सूर्य खाया था तो अन्धेरा केवल भारत में हुआ था या पूरी पृथ्वी पर,अगर हाँ तो दूसरे देशों जैसे अमेरिका, जापान,ब्रिटेन में हनुमान जी को कोई क्यों नहीं जानता?*

प्रश्न-3 *जब 114 साल बाद वो वापस पृथ्वी पर लौटे तो सभी लोग उतने ही बडे थे या सबकी उम्र 114 साल बढ चुकी थी?*

2-4 प्रश्न आप खुद जोड लीजिये और हमारे देश को अन्धविश्वास से मुक्त कराने में सहायता कीजिये, क्योंकि अब हमारा देश शिक्षित हो रहा है झूट पकड लेता है ।


 भगवान से_सवाल
1:- क्या तुम कायर हो जो हमेशा छिपे रहते हो , कभी किसी के सामने नहीं आते ?
2:-क्या तुम खुशामद परस्त हो जो लोगो से दिन रात पुजा-अर्चना करवाते हो ?
3:- क्या तुम हमेशा भुखे रहते हो जो लोगो से मिठाई , दुध , घी आदी लेते रहते हो ?
4:- क्या तुम मांसाहारी हो जो लोगो से निर्बल पशुओं की बलि मांगते हो ?
5:- क्या तुम सोने के व्यापारी हो जो मंदिरो मे लाखों टन सोना दबाये बैठे हो ?
6::- क्या तुम व्याभिचारी हो जो मंदिरो मे देवदासिया रखते हो ?
7:- क्या तुम कमजोर हो जो हर रोज होने वाले बलात्कारो को नहीं रोक पाते ?
8:-क्या तुम मुर्ख हो जो जो विश्व के देशो मे गरीबी-भुखमरी होते हुए भी अरबो रूपयो का अन्न , दुध , घी , तेल बिना खाएे ही नदी नालो मे बहा देते हो ?
9:- क्या तुम बहरे हो जो बे वजह मरते हुए आदमी , बलात्कार होती हुयी मासुमो कि अवाज नही सुन पाते ?
10:- क्या तुम अंधे हो जो रोज अपराध होते हुए नही देख पाते ?
11:- क्या तुम आंतकवादी से मिले हुऐ हो जो रोज धर्म के नाम पर लाखों लोगो को मरवाते रहते हो ?
12:- क्या तुम आंतकवादी हो जो ये चाहते हो कि लोग तुम से डरकर रहें ?
13:- क्या तुम गुंगे हो जो एक शब्द नही बोल पाते लेकिन करोड़ो लोग तुमसे लाखो सवाल पुछते है ?

14:- क्या तुम भ्रष्टाचारी हो जो गरीबो को कभी कुछ नही देते जबकी गरीब पशुवत काम करके कमाये गये पैसे का कतरा-कतरा तुम्हारे ऊपर न्यौछावर कर देते है !


क्या सरस्वती ज्ञान की देवी है? अगर है तो इन
शंकाओं का समाधान करें.🌡

1.इसके बिना ईसाई, मुसलमान, प्रकृति पूजक,
नास्तिक आदि कैसे ज्ञान प्राप्त कर पा रहे हैं.🌡

2. सरस्वती कितनी भाषायें जानती है?🌡

3. हड़प्पा सभ्यता की लिपि अब तक नहीं पढ़ी
गई. इस संबंध में सरस्वती का क्या प्लान है?🌡

4. सरस्वती के होते हुए स्कूलों में शिक्षकों की
जरूरत क्यों पड़ती है?🌡
5. अंग्रेजों के पहले भारत में अंग्रेजी क्यों नहीं थी.
क्या सरस्वती पहले अंग्रेजी नहीं जानती थी?🌡

6. कई देश शत प्रतिशत साक्षर हो गए, जबकि
भारत सरस्वती के होते हुए भी साक्षरता में पीछे
है, क्यों?🌡

7. मनु ने मनुस्मृति में शूद्रों का पढ़ना दंडनीय
माना है. 🌡आज तक इस मामले में सरस्वती ने कोई
एक्शन क्यों नहीं लिया? 🌡
क्या सरस्वती भी इस
षड़यंत्र में शामिल थी?🌡 ज्ञान तो सरस्वती देती है.
क्या यह ज्ञान मनु को सरस्वती ने ही दिया था?🌡

8. कई भाषायें लुप्त हो गईं और कई लुप्त हो रही हैं.
सरस्वती उन्हें क्यों नहीं बचा पा रही हैं? 🌡क्या
इतनी सारी भाषाओं को याद रखना उनके लिए
मुश्किल है?🌡

9 .कुछ बच्चे मेहनत करने पर भी पढ़ाई में कमजोर
होते हैं, क्यों? 🌡क्या वह भेदभाव करती हैं?🌡

10. सरस्वती के होते हुए मटरगस्ती करने वाले, भ्रष्ट
लोग शिक्षक कैसे बन जाते हैं?🌡

11. वसंत पंचमी पर ब्राह्मण ही सरस्वती की पूजा
संपन्न करवाते हैं तथा सरस्वती की मूर्ति स्थापना
भी पंडित ही करते हैं. 🌡सरस्वती दूसरी जातियों से
पूजा क्यों नहीं करवाती है? 🌡क्या सरस्वती
भेदभाव करती हैं? या सरस्वती ब्राह्मण जाति की
हैं.🌡

12. हिंदुओं के अलावा बाकी धर्म के लोग सरस्वती
को क्यों नहीं पूजते? 🌡क्या यह हिंदुओं के द्वारा
कल्पित की गई हिंदुओं की ऐसी देवी है जो हिन्दू
हितों का ध्यान रखने के साथ हिंदू धर्म का प्रचार
करती हैं?🌡

13. कहीं इसके पीछे मुसलमानों को पिछड़ा बनाये
रखने की चाल तो नही है 🌡कि सरस्वती के कारण
मुसलमान अपने बच्चों को स्कूलों में भेजने से
कतराएंगे.🌡

14. सरस्वती महिला है फिर भी महिलओं की
साक्षरता दर बहुत कम है, क्यों?🌡

15. सरस्वती के होते हुए आम बच्चों के लिए
खस्ताहाल स्कूल और अमीरजादों के लिए
डीपीएस जैसे कोंवेन्ट स्कूल क्यों हैं? 🌡इस मामले में
सरस्वती जी ने आज तक कोई समुचित निर्णय क्यों
नहीं लिया —🌡


अब आप लोग ही सोचिये कि क्या सरस्वती नाम की कोई देवी है क्या?🌡

गुमराह OBC

*डॉ. बाबासाहब आंबेडकरजी की हत्या होने के कारण भारतिय लोकतंत्र मे सबसे बडा नुकसान OBC का हुआ!*
इसका मूलकारण बाबा साहब अम्बेडकर के बारे मे और OBC के लिए बाबा साहब अम्बेडकर के संघर्ष के बारे मे OBC को ब्राहम्णों ने जानकारी नहीं होने दी और ब्राहम्ण धर्म के जाल और उंच निच मे फंसा कर रखा

इसको मात्र एक सामान्य उदाहरण से समझा जा सकता है

ब्राहम्णों ने पिछडा वर्ग को शूद्र बनाया
शूद्र नामकरण किया
और शिक्षा सम्पत्ति और आत्मरक्षा के अधिकार से वंचित किया(गुलाम बनाया)

दूसरी तरफ़
बाबा साहब अम्बेडकर ने पिछडे वर्ग को OBC संवैधानिक नाम दिया

 उसके लिए संविधान मे आर्टिकल 340 लिखा
जिसके अन्दर उनको सामाजिक और शैक्षणिक पिछडेपन कि वजह से शासन प्रशासन मे अपनी जनसंख्या के अनुसार भागीदारी का अधिकार लिखा

इसी आर्टिकल 340 के अनुसार बाबा साहब के दबाव मे इनको काका कालेकर कमीशन बनाना पडा
परन्तु उसको लागू नहीं किया
बाबा साहब के परिनिर्वाण के बाद
इस कमिशन को लागू करनेवाले के बजाय ठंडे बस्ती मे डाल दिया

काका कालेलकर कमीशन की जगह ओबीसी नेताओं के दबाव मे मंडल कमीशन बनाया और उसको लागू नहीं किया

मान्यवर काशीराम जी ने इसको लागू कराने के लिए पुरे देशभर मे आंदोलन चलाया

वीपी सिंह को मंडल कमीशन लागू करना पडा

परन्तु इसमें भी फिर षड्यंत्र किया

1931 कि जनगणना के अनुसार ओबीसी 52% है तो आर्टिकल 340 के अनुसार जनसंख्या के अनुसार 52% शासन प्रशासन मे भागीदारी मिलनी चाहिए
परन्तु ओबीसी को इसका आधा 27% प्रतिनिधित्व दिया

उस आधे प्रतिनिधित्व मे भी कोर्ट के माध्यम से संविधान के विरोध मे क्रिमलेयर(आर्थिक आधार) लगाया
जबकि भारतिय संविधान मे आर्टिकल 340 ओबीसी को सामाजिक और शैक्षणिक पिछडेपन की वजह से शासन प्रशासन और शिक्षा मे जनसंख्या के अनुसार भागीदारी की बात करता है

तिसरा षड्यंत्र नौकरियों मे भागीदारी दी परन्तु शिक्षा मे लागू नहीं किया

फिर चौथा षड्यंत्र SC/ST कि तरह प्रमोशन मे भागीदारी नहीं दी तो ऊंचे पद जहां पर सिर्फ प्रमोशन से पहुचां जा सकता है
वहाँ ओबीसी का प्रतिनिधि नहीं पहुंचा और जहां देश कि नितियां बनती है
वहां नहीं गया और देश का निति निर्माता ब्राहम्ण ही बना और 
2017 आते आते ओबीसी की भागीदारी मात्र 2% कर दी जिसका उदाहरण नीट मेडिकल परीक्षा है

सुनिए लिंक पर जाकर बाबरी मस्जिद 6 दिसम्बर को क्यों गिराई गई।इसका मकसद बाबा साहब का परिनिर्वाण दिवस को धूमिल करना  नहीं बल्कि मंडल कमीशन को लागू करते समय ओबीसी को क्रिमलेयर(आर्थिक आधार)का षड्यंत्र ना पता हो
इसलिए 6 दिसम्बर को बाबरी मस्जिद गिराई गई
इतना भयंकर षड्यंत्र ओबीसी के साथ हुआ
परन्तु अभी भी ओबीसी इस षड्यंत्र को समझ कर अपने ही भाइयों का आंदोलन मे साथ देने को तैयार नहीं है
यही सबसे बडा दुर्भाग्य है
नहीं तो 52% ओबीसी आज लोकतंत्र मे बहुमत के आधार पर देश का शासक होता
https://youtu.be/CzcZoJmRLYI

कन्हैय्या कुमार की असलियत.


साथीयों,
कन्हैया कुमार झा यह बिहार का ब्राम्हण है | और वह ब्राह्मणों की कम्युनिष्ट पार्टी के SFI संघटन का जेएनयु यूनिवर्सिटी मे कार्य कर्ता भी है |

हमारे एससी, एसटी, ओबीसी लोगों को गुमराह करणे के लिए आजतक आरएसएस के द्वारा बहुत सारे आंदोलन चलाये थे |

१) अण्णा हजारे - अण्णा हजारे ने आरएसएस के कहने पर भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन चलाया | लेकिन वह आंदोलन भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन नही था | बल्की ओबीसी की जातिनिहाय गिणती रोखणे का आंदोलन था | यह आंदोलन चलाणे की वजह से कुछ दिनों के लिए मिडीया ने अण्णा हजारे को महत्मा गांधी बनाया था | लेकीन अण्णा हजारे यह ओबीसी होणे के कारण आज वह कहाँ है?

२) अरविंद केजरीवाल - अरविंद केजरीवाल ने आरएसएस के कहने पर ही अण्णा हजारे का साथ दिया था | उसने अण्णा हजारे ने बनाये हुये माहौल का पुरी तरह से इस्तेमाल करके अपनी खुद्द की पार्टी बनाई | उस वक्त मिडीया ने बडी चलाखी से अण्णा को दिखाना कम किया और कजरी को ही ज्यादा दिखाया | जिसका नतिजा यह हुआ की कजरी दिल्ली का मुख्यमंत्री बन गया | केजरीवाल बनिया होणे के कारण आज वह कहा है?

३) हार्दिक पटेल - हार्दिक पटेल ने भी पाटीदारो को आरक्षण मिलना चाहिए यह आंदोलन आरएसएस के कहने पर चलाया | मिडीया ने उसे बहोत बडा किया | लेकिन आज वह कहा है?

बिल्कुल वैसे ही डॉ. रोहित वेमुला कि हत्या का मुद्दा दबाने / दिशा बदलने / ध्यान हटाने / नजर हटाने / भटकाव मे चले जाने के लिए ही आरएसएस ने कन्हैय्या कुमार को बडा किया है |

यह बात मै दावे के साथ इसलिए कह रहा हुँ | क्योंकी आज तक जितने भी ब्राह्मण - बनियों की चैनल ने कन्हैय्या कुमार को लाईव दिखाया है | उन सबके मालिक बीजेपी / आरएसएस से मिले - जुले है | इसलिए कन्हैय्या कुमार आंदोलन भी अण्णा हजारे, अरविंद केजरीवाल, हार्दिक पटेल की तरह ही बाय प्रोडक्ट है |

डॉ. रोहित वेमुला की हत्या के बाद मैने निरंतर लोगों को देश मे चल रही माहौल की असलियत बताने काम किया है | मैने और कुछ कार्यकर्ताओं ने भी आज तक बहुत सारे सवाल भी उठाये थे | वही हमारे कुछ साथीयों के / मेरे सवाल और कुछ जानकारी को मै फिरसे दोहरणा चाहता हुँ |

१) डॉ. रोहित वेमुला की माताजी रोहित की हत्या हुयी यह बात हमेशा कहती है | हम सब भी जानते है की, उसकी हत्या ही हुयी है | फिर भी कन्हैय्या कुमार डॉ. रोहित वेमुला के हत्या को बार - बार आत्महत्या क्यों बोलता है?

२) कन्हैय्या कुमार नागपुर मे १४ एप्रिल को किसकी जयंती मनाने गया था? क्योंकी उसी दिन उसके संघटन के पूर्व मार्गदर्शक पी. सी. जोशी का भी जन्मदिन था | यदी वह बाबासाहब की ही जयंती मनाना चाहता था तो उसने अपने भाषण में ऐसा क्यों कहाँ की, आज जैसे बाबासाहब की जयंती है बिल्कुल वैसेही आज पी. सी. जोशी की भी जयंती है | तो सवाल यह निर्माण होता है की, उसने बाबासाहब कि जयंती दिन पर एक जोशी नामक ब्राह्मण को याद क्यो किया? आँखिर क्या कारण हो सकता है?

३) कन्हैय्या कुमार ने नागपुर में बाबासाहब की जयंती दिन पर ही ऐसा क्यों कहाँ की, राम हमारी कण कण में बसे है | और हम उनकी संतान है | क्या यह बनायेगे मंदिर का नारा देणेवाली बीजेपी और आरएसएस को खुश करणे जैसा नही है? १५ एप्रिल को रामनवमी आती है | यह जानते हुये भी उसने एक दिन पहले काळाराम मंदिर का सत्याग्रह करणेवाले / मंदिर को ताला लगाने वाले डॉ. बाबासाहब आंबेडकर की जयंती दिन पर ही राम क्यों याद किया? क्या यह डॉ बाबासाहब आंबेडकर की बाविस प्रतिज्ञा के खिलाफ नही है? उसने बाबासाहब की राम के खिलाफ दि हुयी प्रतिज्ञा क्यों नही कही? आँखिर कौनसा कारण हो सकता है?

४) कन्हैय्या कुमार ने नागपुर दिये हुये भाषण मे ही बाबासाहब की जयंती दिन पर गांधी का समर्थन क्यों किया? क्या वजह हो सकती है?

५) कन्हैय्या कुमार नागपुर मे आरएसएस का मुख्यालय है यह बात जानते हुये भी उसने ऐसा क्यों कहाँ की, मैं आरएसएस का विरोधी नहीं हुँ | उनके सिद्धान्त के विरोध में हुँ | यह बात क्या दर्शाती है?

६) १४ अप्रैल बाबासाहब के जयंती दिन के अवसर पर ही डॉ. रोहित वेमुला कि माँ और भाई ने बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी | मिडीया ने  उन्हे लाईव दिखाने के बजाये सिर्फ कन्हैय्या कुमार को ही लाईव दिखाया | आँखिर क्या कारण हो सकता है?

साथीयो,
ईस सवाल के जवाब मै कन्हैय्या कुमार का समर्थन करणे वाले लोगों से माँगणा चाहता हुँ |

जितने भी लोगों ने डॉ. रोहित वेमुला हत्या के बाद अपनी - अपनी तरीके से लिखा है | ऐसा नही है की, मै उन सभी दोस्तों की प्रतिक्रिया / राय / सुझाव से सेहमत नही हुँ | मै सेहमत हुँ | किंतु उन्हे भी मेरी बातों पर गौर से सोचना ही होगा |

देखना / याद रखना..! अब यह वक्त ही तय करेगा की, कन्हैय्या कुमार का आंदोलन कितना ईमानदार था? और है?

डॉ. रोहित वेमुला हो | चाहे मुझफ्फरनगर के पिडीत मुसलमान लोगों को न्याय दिलाने के लिए चला हुआ आंदोलन हो | ईस मुल इश्यू को आरएसएस के लोगो द्वारा रोहित वेमुला कि हत्या करकर उसके देशव्यापी इश्यू को नॉन इश्यू बनाकर कन्नैया कुमार के नॉन इश्यू को ब्राह्मणी मिडिया ने देशव्यापी इश्यू बनाया है | ईस बात पर भी हमे गंभीरता से सोचना ही होगा |

क्योंकी, यह सोचने का और सोचकर निर्णय लेणे का ही वक्त है | नही तो आपका इस्तेमाल होणा तय है |

इसलिए मै सवाल पुँछना चाहता हुँ उन लोगों से जो इश्यू को छोडकर नॉन इश्यू का समर्थन करते है | तो क्या ऐसा समर्थन गलत नही है?

देशव्यापी संघटन का नेतृत्व करना तो दूर कि बात है | यहा हमारे लोगों को इश्यू और नॉन इश्यू को पहचानना भी नही आ रहा है | अर्थात यह समजने के लिए दुरदृष्टी और तर्कबुध्दी की बहुत ही आवश्यकता है | जो की हमारे लोगों के पास नही है | यही हमारी सबसे बडी दुख की बात है |

आज तक का आरएसएस का इतिहास देखा जाये तो वह किसी भी इश्यू को नॉन इश्शू बनाकर समाज और देश भर में प्रचलित करते आये है | और हमारे लोग भी उनके षढयंत्र को फँसते ही गये है |

इसलिए जो लोग अपनी देश मे सामाजिक तथा समाज का कार्य करणा चाहते है ऐसे लोगों को देश और समाज का आकलन होणा जरुरी है | क्योंकी, जिसके पास ये आकलन नही होता वह शत्रू के षडयंत्र के झाँसें मे आकर अपनी खुद्द की तो खुद्दखुशी करता ही है, साथ में अपने समाज का भी सत्यानाश करता है.

कही कन्हैय्या कुमार का आंदोलन हमारे लोगों की खुद्दखुशी और सत्यानाश का कारण तो नही बन रहा है | अगर ऐसा है तो हमे सावधानी बरतकर डॉ. रोहित वेमुला की आंदोलन पर फिरसे वापस आणे की जरुरत है. ऐसा मेरा स्पष्ट रुप से कहना है.

मुसलमान एक धार्मिक समूह है

किसी ने लिखा है कि मुसलमानों की एकता देखनी हो तो किसी नामालूम से मौलवी के इस्लाम खतरे में है के नारे के बाद उमडी हुई मुसलमानों की भीड़ में देखिये ,
या किसी मुशायरे में एक दुसरे पर गिरते पड़ते मुसलमानों को देख लीजिये ,
लेकिन आप किसी राजनैतिक लड़ाई के लिए मुसलमानों को एक साथ इकट्ठा होते हुए नहीं देख पायेंगे ,
ऐसा क्यों है ?
क्योंकि मुसलमान राजनैतिक समूह हैं ही नहीं ,
मुसलमान एक धार्मिक समूह है ,
मुसलमानों को कोई राजनैतिक एजेंडा है ही नहीं ,
मुसलमानों का बस धार्मिक एजेंडा है वह भी व्यक्तिगत,
सामूहिक एजेंडा है ही नहीं ,
जबकि इसके बरक्स हिन्दू एक राजनैतिक समूह है ,
इस समुदाय का एक राजनैतिक एजेंडा है ,
इसका एक सुगठित राजनैतिक प्रशिक्षण का कार्यक्रम है ,
हिन्दू धर्म नहीं है ,
हिन्दू एक राजनैतिक शब्द है ,
पांच सौ साल पहले अकबर के समय में तुलसीदास जब रामचरित मानस लिख रहे थे ,
तब तक भी उन्होंने अपने लिए हिन्दू शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था ,
क्योंकि तब तक भी कोई हिन्दू धर्म नहीं था ,
कोई भी हिन्दू दुसरे हिन्दू जैसा नहीं है ,
कोई हिन्दू मूर्ती पूजा करता है कोई नहीं करता , कोई मांस खाता है , कोई नहीं खाता ,
आदिवासी ईश्वर को नहीं मानता , गाय खाता है , मूर्ती पूजा नहीं करता , लेकिन भाजपा को हिन्दुओं की रक्षा के राजनैतिक मुद्दे पर वोट देता है ,
अंग्रेजों नें भारत में अपने खिलाफ उठ रही आवाज़ को दबाने के लिए एक तरफ मुस्लिम लीग को बढ़ावा दिया दूसरी तरफ हिन्दू नाम की नई राजनैतिक चेतना को उकसावा दिया ,
आज़ादी के बाद पाकिस्तान बनने के साथ मुस्लिम लीग की राजनीति भी भारत में समाप्त हो गयी ,
लेकिन संघ की अगुवाई में ज़मींदार , साहूकार , जागीरदारों ने अपनी अमीरी और ताकत को बरकरार रखने को अपना राजनैतिक एजेंडा बनाया ,
लेकिन ये लोग सत्ता में इस लिए नहीं आ पा रहे थे क्योंकि यह मात्र चार प्रतिशत थे ,
संघ के नेतृत्व में इन लोगों नें लम्बे समय तक मेहनत करी ,
राम जन्म भूमि मुद्दे पर संघ ने दलितों , आदिवासियों , ओबीसी को हिन्दू अस्मिता के साथ सफलतापूर्वक जोड़ा .
संघ नें करोड़ों दलितों , आदिवासियों और ओबीसी के मन में यह बिठा दिया की देखो यह बाहर से आये मुसलमान हमारे राम जी का मन्दिर नहीं बनने दे रहे हैं ,
इस तरह जो दलित पास के आदिवासी को नहीं जानता था , या जो ओबीसी हमेशा दलित से नफरत करता था वह सब हिंदुत्व के छाते के नीचे आ गए ,
मुसलमानों का हव्वा खड़ा कर के अलग अलग समुदायों को इकट्ठा करना और असली राजनैतिक मुद्दों को भुला देना संघ की राजनीति की खासियत रही ,
संघ इस के सहारे सत्ता हासिल करने में पूरी तरह सफल हो गया ,
दूसरी तरफ भारत का मुसलमान बिना किसी राजनैतिक एजेंडे के चलता रहा ,
भारत के मुसलमानों को लगता था कि आजादी की लड़ाई के बाद हमारे नाम पर पाकिस्तान मांग लिया गया और गांधी जी की हत्या भी हमारे कारण हो गयी है ,
इसलिए हमारे समुदाय को तो किसी बात पर मांग करने का कोई हक बचा ही नहीं है,
हांलाकि न तो बंटवारे के लिए और ना ही गांधी की हत्या के लिए मुसलमान किसी भी तरह से कसूरवार ठहराए जा सकते थे ,
भारत के बंटवारे की नींव सावरकर की हिन्दू महासभा और हेडगवार के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा रखी गयी ,
यहाँ तक कि मुस्लिम लीग की राजनीति भी हिन्दुओं की मुखालफत करना नहीं थी ,
जबकि हिन्दू महासभा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का शुरुआत से ही मुख्य एजेंडा मुसलमानों , ईसाईयों और कम्युनिस्टों की मुखालफत करने का तय किया गया था,
हिन्दू महासभा और संघ की पूरी राजनीति यह थी की भारत के लोगों को मुसलमानों और ईसाईयों का डर दिखाया जाय और मजदूरों किसानों और दलितों की बराबरी वाली राजनीति मांग को समाप्त किया जाय ,
ताकि पुराने ज़मींदार , साहूकार और जागीरदार अपनी पुरानी अमीरी और ताकतवर हैसियत आजादी के बाद भी बरकरार रख सकें ,
अपनी राजनीति को जारी रखने के लिए संघ आज भी यही नफरत भारत के नौजवानों के दिमागों में नियमित रूप से डालता है ,
भारत के मुसलमान आज भी किसी राजनैतिक एजेंडे के बिना भारत की मुख्यधारा की राजनीति में जुड़ने की कोशिश करते हैं ,
ध्यान दीजिये भारत के मुसलमान किसी भी साम्प्रदायिक दल को वोट नहीं देते ,
क्योंकि मुसलमानों का कोई राजनैतिक एजेंडा नहीं है ,
इसलिए आप मुसलमानों को राजनैतिक मुद्दों पर इकट्ठा होते हुए नहीं देख पाते ,
इसलिए जेएनयु में नजीब नामके लड़के को जब संघ से जुड़े संगठन ने पीटा और गायब कर दिया ,
तो उसकी लड़ाई धर्मनिरपेक्ष ताकतों नें लड़ी ,
नजीब के लिए कोई मुसलमानों की भीड़ नहीं उमड़ पड़ी,
हम मानते हैं की भारत की राजनीति का एजेंडा समानता और न्याय होना चाहिए ,
लेकिन संघी राजनीति इन्ही दो शब्दों से खौफ खाती है,
इसका उपाय यही है की बराबरी और इन्साफ के लिए देश भर में जो अलग अलग आन्दोलन चल रहे हैं , जैसे छात्रों का आन्दोलन , महिलाओं का आन्दोलन , मजदूरों का आन्दोलन , किसानों का आन्दोलन , दलितों का आन्दोलन , आदिवासियों का आन्दोलन ,
उन सब के बीच संपर्क बने और वे मिल कर इस नफरत की राजनीती को खत्म कर के बराबरी और न्याय की राजनीति से युवाओं को जोड़ दें। - शमीम अंसारी -

ब्राह्मण विदेशी है या स्वदेशी?

ब्राह्मण विदेशी है या स्वदेशी?

अगर विदेशी है तो फिर भारत पर राज कैसे कर रहा है ?

अगर ब्राह्मण विदेशी नही है तो फिर आरोप लगने पर वो खामोश क्यों है? मुसलमानों पर जब- जब झूठे आरोप लगते है सारी मुस्लिम संघटनाए, धर्म गुरू , नेता उस आरोप का पूरी शक्ति से खंडन करते है। परंतु ब्राह्मणो को विदेशी कहने पर किसीने भी इस आरोप का खंडन नही किया है। जान बूझकर यह विषय  टाला जाता है क्यो ?

अगर हा तो फिर क्यों टाला जाता है?  किसी भी ब्राह्मण की TC पर जाती ब्राह्मण ही लीखी होती है। ब्राह्मण जाति हिन्दू नही लिखता। यानी ब्राह्मण हिन्दू नही है और  शुद्र भी नही है।

फिर अखिर यह ब्राह्मण है कौन ?

ब्राह्मणों का हिंदुओं के शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक समस्या के समाधान के लिय आज तक का क्या योगदान है? आज हिन्दू किसान भूख से परेशान होकर खुदकुशी कर रहा है। संसद भवन के सामने (तमीळनाडू) किसान अपनी पीड़ा से अवगत कराने के लिए पुरा नंगा हो चुका है।


यहाँ तक कि मल मूत्र पीकर अपना दुख बताने पर मजबुर हुआ। फिर भी ब्राह्मणों की पेशानी पर कोई बल नही पडता। आखिर क्या बात है कि ब्राह्मण हिंदू किसान की पीड़ा देखकर भी व्यथित नहीं होते? आज लाखों हिंदू किसान खदकुशी कर रहे हैं, बच्चे कुपोषण से मर रहे हैं। इलाज के लिय पैसे नहीं हैं। इसलिए गरीब  अस्पताल के बाहर तड़प कर मर रहा है। करोडो हिंदू युवक बेरोजगार हैं।

इन सारी हिंदुओं की समस्या के ननिवारण  में ब्राह्मणों का क्या योगदान है? आजतक कभी ब्राह्मण महासभा ने हिन्दुओ के सामाजिक, शैक्षणिक आर्थिक विकास के लिय कोई हिंदू विकास परिषद का आयोजन किया क्या?

अगर नहीं तो क्यों नहीं किया?

ब्राह्मणों को हिंदूओ का विकास नहीं करना है क्या? हिंदू अपने कोई लगते नहीं क्या? या फिर ब्राह्मण ही यहाँ भारत का मूलनिवासी ना होने से हिन्दुओ  को मरता हुवा देख उन्हे कोई दुख नही होता?

इसलिए कि हिंदूओ से  सिर्फ सांप्रदायिक दंगे ही कराना है क्या? फिर मराठा हिंदूओ के आरक्षण के लिय पाकिस्तान आंदोलन करेगा क्या? धनगर हिंदूओ को आरक्षण दिया जाये इसके लिए अफगाणिस्तान उपोषण करेगा क्या? हचकर, जाट, पटेल, गुज्जर, यादव आदि को आरक्षण मिले इसके लिए इराक ने मोर्चे निकालने चाहिए क्या?

मंडल आयोग ने कहा कि  OBC की जातिवार जनगणना, इसके लिए दुबई के लोग जेल भरो आंदोलन करेंगे क्या? नही हरगिज नहीं भारत की जनता की समस्या के लिय विदेशी क्यों आंदोलन करेंगे? भारत की जनता की पीड़ा से विदेशियों को क्या लेना?

अगर ब्राह्मण भारत के मूलनिवासी हैं तो वो हिंदूओ के आंदोलन को समर्थन क्यों नही देते?

अगर हिंदू ब्राह्मणों के कहने पर दंगे कर सकते हैं, तो फिर ब्राह्मण हिंदूओ के आरक्षण के लिए किसानों के कर्ज माफी के लिय आंदोलन क्यों नहीं कर सकते? जब सत्ता ही ब्राह्मणों के पास है फिर हिंदू किसानो को क्यों आत्महत्याएँ करनी पड़ रही हैं? क्यों मराठा, जाट, पटेल, धनगर, गुज्जर रास्ते पर आ रहे हैं?

हिंदूओ को आरक्षण देने से कौन सा मुसलमान ब्राम्हणों को रोक रहा है? अब इस पर भी कोई मुस्लिम हिंदूओ के आरक्षण के सभर्थन में आता है तो ब्राह्मण कहते है इन्हें पाकिस्तान भेज दो।

अगर मुसलमान यह कहता है कि किसानो कर्ज माफी होना चाहिए। तो वे कहते है मुसलमान आतंकवादी है, देशद्रोही है इन्हें पाकिस्तान भेज दो। अब हिंदूओ के समर्थन मे ब्राह्मण भी नही आयेगा और मुसलमानों को भी नही बोलने  देगा, तो क्या हिंदूओ के समर्थन मे चीन, जापान बोलेंगे क्या?

बात स्पष्ट है जिनके पुर्वजो ने महात्मा बस्वेश्वर महाराज को नही स्वीकारा, संत तुकाराम, संत कबीर, संत रविदास, छत्रपति शिवाजी महाराज, संभाजी महाराज, शाहु महाराज, महात्मा फुलेजी, सावित्री मॉ फुले, बाबासाहेब अंबेडकरजी को नही स्वीकारा, उनके वारिस हमे स्वीकार करेंगे क्या?

ब्राह्मणों को मुख्तार अब्बास नकवी, शाह नवाज हुसैन जैसा मनुवादी मुसलमान दामाद तो चलता है लेकीन शिव-शाहु-फुले-अंबेडकरजी के बहुजन विचार धारा का मुसलमान नही चलता।

(नोट- आज तक भारत के किसी भी ब्राह्मण ने मुख्तार अब्बास नक़वी और शाह नवाज हुसैन जैसे मुसलमान दामादो का विरोध नही किया है। किसी ने यह नही कहा के यह लव जिहादी है इन्हें पाकिस्तान भेज दो। याने जो दामाद है उन्हें रहने दो और जो दामाद नही है उन्हें पाकिस्तान भेज दो? यानी भारत मे मुसलमानों को अगर रहना होगा तो उन्हें ब्राह्मणों का दामाद बनना ही होगा?)

मेरा उद्देश्य यह है के अब यह बात साफ होनी चाहिए कि हिंदू-मुस्लिम और ब्राह्मण-हिंदू संबंध स्पष्ट होना चाहिए। भारत के 25-30 करोड़ कबाड बेचने वाले फल-सब्जियाँ बेचने वाले मजदुरी-हमाली करने वाले, चुड़ियाँ बेचने वाले, गुब्बारे बेचने वाले पंक्चर निकालने वाले, मोटर दुरूस्त करने वाले आदि मुसलमान आये तो आए कहाँ से?

अगर यह मुसलमान बाहर के मुस्लिम देशो से आये हैं, तो फिर भारत में जो मुसलमानो की जातियाँ पायी जाती हैं- बागबान, अतार, मणीयार, तांबोली, लाला, मंसुरी, छप्परबंद, जुलहा, नाईकवाडी, यह जातियाँ सिर्फ भारत में ही क्यों पायी जाती हैं?

मुस्लिम देशो मे क्यो नही कोई बागबान, छप्परबंद जाति नहीं मिलती? अगर मान लो मुसलमान बाहर से आये भी हों तो कितने? फिर 700-800 सालों में मुसलमानो की संख्या 25-30 करोड कैसे हो गई? 15-20% कैसे? और अगर ब्राह्मण भारत का मूलनिवासी है तो फिर ब्राम्हण मात्र 3% ही कैसे?

(भारत के 97% मुस्लिम ब्राम्हणवाद के अन्याय अत्याचारी वर्णव्यवस्था को त्याग कर समतावादी इस्लाम स्वीकार कर धर्मांतरित हैं। यानि भारत का मुस्लिम भारत का मूलनिवासी ही है)


अगर ब्राम्हण भारत का मूलनिवासी है तो फिर हजारों साल से भारत में होकर ब्राम्हण 3% ही क्यों है?

यह पहेली  तो मुझे समझ में नहीं आ रही है। अगर यह पहेली सुलझे तो भारत की सभी समस्या का समाधान हो जायेगा। मुझे तो लगता है नाम बदलकर हिंदू बनकर हिटलर ही भारत पर राज कर रहा है। वैसे भी कहा जाता है हिटलर ने ही खुद को किडनेप किया था दुनिया को मूर्ख बनाने के लिय। अब हम हिंदू  (शुद्र) –मुस्लिम,  भाई-भाई कहें या ब्राम्हण  (श्रेष्ठ)- हिंदू  (शुद्र) भाई-भाई कहें? भारत मेरा देश है सारे शुद्र भारतीय मेरे भाई हैं।

… .जय भारत …..

 ब्राह्मण विदेशी है कितना सच?😊😊😊
1. ऋग्वेद में श्लोक 10 में लिखा है कि हम (वैदिक ब्राह्मण ) उत्तर ध्रुव से आये हुए लोग है। जब आर्य व् अनार्यो का युद्ध हुआ ।
2. The Arctic Home At The Vedas बालगंगाधर तिलक (ब्राह्मण) के द्वारा लिखी पुस्तक में मानते है कि हम बाहर आए हुए लोग है ।
3. जवाहर लाल नेहरु ने (बाबर के वंशज फिर कश्मीरी पंडित बने) उनकी किताब Discovery of India में लिखा है कि हम मध्य एशिया से आये हुए लोग है। यह बात कभी भूलना नही चाहिए। ऐसे 30 पत्र इंदिरा जी को लिखे जब वो होस्टल में पढ़ रही थी।
4. वोल्गा टू गंगा में “राहुल सांस्कृतयान” (केदारनाथ के पाण्डेय ब्राहम्ण) ने लिखा है कि हम बाहर से आये हुए लोग है और यह भी बताया की वोल्गा से गंगा तट (भारत) कैसे आए।
5. विनायक सावरकर ने (ब्राम्हण) सहा सोनरी पाने “इस मराठी किताब में लिखा की हम भारत के बाहर से आये लोग है।
6. इक़बाल “काश्मीरी पंडित ” ने भी जिसने “सारे जहा से अच्छा” गीत लिखा था कि हम बाहर से आए हुए लोग है।
7. राजा राम मोहन राय ने इग्लेंड में जाकर अपने भाषणों में बोला था कि आज मै मेरी पितृ भूमि यानि अपने घर वापस आया हूँ।
8. मोहन दास करम चन्द गांधी (वेश्य) ने 1894 में दक्षिणी अफ्रीका के विधान सभा में लिखे एक पत्र के अनुसार हम भारतीय होने के साथ साथ युरोशियन है हमारी नस्ल एक ही है इसलिए अग्रेज शासक से अच्छे बर्ताव की अपेक्षा रखते है।
9. ब्रह्म समाज के नेता सुब चन्द्र सेन ने 1877 में कलकत्ता की एक सभा में कहा था कि अंग्रेजो के आने से हम सदियों से बिछड़े चचेरे भाइयों का (आर्य ब्रह्मण और अंग्रेज ) पुनर्मिलन हुआ है।

इस सन्दर्भ में अमेरिका के Salt lake City स्थित युताहा विश्वविधालय (University of Utaha’ USA) के मानव वंश विभाग के वैज्ञानिक माइकल बमशाद और आंध्र प्रदेश के विश्व विद्यापीठ विशाखा पट्टनम के Anthropology विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा सयुक्त तरीको से 1995 से 2001 तक लगातार 6 साल तक भारत के विविध जाति-धर्मो और विदेशी देश के लोगो के खून पर किये गये DNA के परिक्षण से एक रिपोर्ट तैयार की। जिसमें बता गया कि भारत देश की ब्राह्मण जाति के लोगों का DNA 99:96 %, कश्त्रिय जाति के लोगों का DNA 99.88% और वेश्य-बनिया जाति के लोगो का DNA 99:86% मध्य यूरेशिया के पास जो “काला सागर ’Blac Sea” है। वहां के लोगो से मिलता है। इस रिपोर्ट से यह निष्कर्ष निकालता है कि ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य-बनिया विदेशी लोग है और एस सी, एस टी और ओबीसी में बंटे लोग (कुल 6743 जातियां) और भारत के धर्म परिवर्तित मुसलमान, सिख, बुध, ईसाई आदि धर्मों के लोगों का DNA आपस में मिलता है। जिससे साबित होता है कि एस सी, एस टी, ओबीसी और धर्म परिवर्तित लोग भारत के मूलनिवासी है। इससे यह भी पता चलता है कि एस सी, एस टी, ओबीसी और धर्मपरिवर्तित लोग एक ही वंश के लोग है। एस सी, एस टी, ओबीसी और धर्म परिवर्तित लोगों को आपस में जाति के आधार पर बाँट कर ब्राह्मणों ने सभी मूलनिवासियों पर झूटी धार्मिक गुलामी थोप रखी है। 1900 के शुरुआत से आर्य समाज ब्राह्मण जैसे संगठन बनाने वाले इन लोगो ने 1925 से हिन्दु नामक चोला पहनाकर घुमाते आ रहे है। उक्त बात का विचार हमे बहुत ही गहनता से करने की आवश्यकता है।

ये भारत देश है मेरा

आज का पूरा ही इंडियन एक्सप्रेस देखें . 
उसका लिंक नीचे दिया हा, हम सौ-पचास रूपये की घूस य कोताही वालों को गरियाने में सारा जिंदगी बीता देते हैं और कुछ लोग हमारी कई जिंदगियों के बराबर कि कमाई एक झटके में उगाह लेते हैं
यह आलेख रवीश कुमार का है, लेकिन इंडियन एक्सप्रेस को पहले पधेया और फिर देखें कि - "ये भारत देश है मेरा
इडियन एक्सप्रेस में छपे पैराडाइस पेपर्स और द वायर की रिपोर्ट pando.com के बिना अधूरा है... हिन्दी के पाठकों को आज का अंग्रेज़ी वाला इंडियन एक्सप्रेस ख़रीद कर रख लेना चाहिए। एक पाठक के रूप में आप बेहतर होंगे। हिन्दी में तो यह सब मिलेगा नहीं क्योंकि ज्यादातर हिन्दी अख़बार के संपादक अपने दौर की सरकार के किरानी होते हैं। कारपोरेट के दस्तावेज़ों को समझना और उसमें कमियां पकड़ना ये बहुत ही कौशल का काम है। इसके भीतर के राज़ को समझने की योग्यता हर किसी में नहीं होती है। मैं तो कई बार इस कारण से भी हाथ खड़े कर देता हूं। न्यूज़ रूम में ऐसी दक्षता के लोग भी नहीं होते हैं जिनसे आप पूछकर आगे बढ़ सकें वर्ना कोई आसानी से आपको मैनुपुलेट कर सकता है।
इसका हल निकाला है INTERNATIONAL CONSORTIUM OF INVESTIGATIVE JOURNALISTS ने। दुनिया भर के 96 समाचार संगठनों को मिलाकर एक समूह बना दिया है। इसमें कारपोरेट खातों को समझने वाले वकील चार्टर्ड अकाउंटेंट भी हैं। एक्सप्रेस इसका हिस्सा है। आपको कोई हिन्दी का अख़बार इसका हिस्सेदार नहीं मिलेगा। बिना पत्रकारों के ग्लोबल नेटवर्क के आप अब कोरपोरेट की रिपोर्टिंग ही नहीं कर सकते हैं।

1 करोड़ 30 लाख कारपोरेट दस्तावेज़ों को पढ़ने समझने के बाद दुनिया भर के अख़बारों में छपना शुरू हुआ है। इंडियन एक्सप्रेस में आज इसे कई पन्नों पर छापा है। आगे भी छापेगा। पनामा पेपर्स और पैराडाइस पेपर्स को मिलाकर देखेंगे तो पांच सौ हज़ार लोगों का पैसे के तंत्र पर कब्ज़ा है। आप खुद ही अपनी नैतिकता का कुर्ता फाड़ते रह जाएंगे मगर ये क्रूर कुलीन तंत्र सत्ता का दामन थामे रहेगा। उसे कोई फर्क नहीं पड़ता है। उसके यहां कोई नैतिकता नहीं है। वो नैतिकता का फ्रंट भर है।

राज्य सभा में सबसे अमीर और बीजेपी के सांसद आर के सिन्हा का भी नाम है। जयंत सिन्हा का भी नाम है। दोनों ने जवाब भी दिया है। नोटबंदी की बरसी पर काला धन मिटने का जश्न मनाया जाने वाला है। ऐसे मौके पर पैराडाइस पेपर्स का यह ख़ुलासा हमें भावुकता में बहने से रोकेगा। अमिताभ बच्चन, अशोक गहलोत, डॉ अशोक सेठ, कोचिंग कंपनी फिट्जी, नीरा राडिया का भी नाम है। आने वाले दिनों में पता नहीं किस किस का नाम आएगा, मीडिया कंपनी से लेकर दवा कंपनी तक मालूम नहीं।

एक्सप्रेस की रिपोर्ट में जयंत सिन्हा की सफाई पढ़ेंगे तो लगेगा कि कोई ख़ास मामला नहीं है। जब आप इसी ख़बर को PANDO.COM पर 26 मई 2014 को MARKS AMES के विश्लेषण को पढ़ेंगे तो लगेगा कि आपके साथ तो खेल हो चुका है। अब न ताली पीटने लायक बचे हैं न गाली देने लायक। जो आज छपा है उसे तो MARK AMES ने 26 मई 2014 को ही लिख दिया था कि ओमेदियार नेटवर्क मोदी की जीत के लिए काम कर रहा था। यही कि 2009 में ओमेदियार नेटवर्क ने भारत में सबसे अधिक निवेश किया, इस निवेश में इसके निदेशक जयंत सिन्हा की बड़ी भूमिका थी।

2013 में जयंत सिन्हा ने इस्तीफा देकर मोदी के विजय अभियान में शामिल होने का एलान कर दिया। उसी साल नरेंद्र मोदी ने व्यापारियों की एक सभा मे भाषण दिया कि ई-कामर्स को खोलने की ज़रूरत है। यह भाजपा की नीति से ठीक उलट था। उस वक्त भाजपा संसद में रिटेल सेक्टर में विदेश निवेश का ज़ोरदार विरोध कर रही थी। भाजपा समर्थक व्यापारी वर्ग पार्टी के साथ दमदार तरीके से खड़ा था कि उसके हितों की रक्षा भाजपा ही कर रही है मगर उसे भी नहीं पता था कि इस पार्टी में एक ऐसे नेटवर्क का प्रभाव हो चुका है जिसका मकसद सिर्फ एख ही है। ई कामर्स में विदेश निवेश के मौके को बढ़ाना।

मुझे PANDO.COM के बारे में आज ही पता चला। मैं नहीं जानता हूं क्या है लेकिन आप भी सोचिए कि 26 मई 2014 को ही पर्दे के पीछे हो रहे इस खेल को समझ रहा था। हम और आप इस तरह के खेल को कभी समझ ही नहीं पाएंगे और न समझने योग्य हैं। तभी नेता हमारे सामने हिन्दू मुस्लिम की बासी रोटी फेंकर हमारा तमाशा देखता है। जब मोदी जीते थे तब ओमेदियार नेटवर्क ने ट्वीट कर बधाई दी थी। टेलिग्राफ में हज़ारीबाग में हे एक प्रेस कांफ्रेंस की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। जिसमें स्थानीय बीजेपी नेता शिव शंकर प्रसाद गुप्त कहते हैं कि जयंत सिन्हा 2012-13 में दो साल मोदी की टीम के साथ काम कर चुके हैं। इस दौरान जयंत सिन्हा ओमिदियार नेटवर्क में भी काम कर रहे थे। उन्होंने अपने जवाब में कहा है कि 2013 में इस्तीफा दिया।

इसमें मार्क ने लिखा है कि जयंत सिन्हा ओमेदियार नेटवर्क के अधिकारी होते हुए भी बीजेपी से जुड़े थिंक टैंक इंडिया फाउंडेशन में निदेशक हैं। इसी फाउंडेशन के बारे में इन दिनों वायर में ख़बर छपी है। शौर्य डोवल जो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवल के बेटे हैं, वो इस फाउंडेशन के सर्वेसर्वा हैं। जयंत सिन्हा ई कामर्स में विदेशी निवेश की छूट की वकालत करते रहते थे जबकि उनकी पार्टी रिटेल सेक्टर में विदेशी निवेश को लेकर ज़ोरदार विरोध करने का नाटक करती थी। जनता इस खेल को कैसे देखे। क्या समझे। बहुत मुश्किल है। एक्सप्रेस की रिपोर्ट को the wire.in और PANDO.COM के साथ पढ़ा जाना चाहिए।

क्या सही में आप इस तरह के खेल को समझने योग्य हैं? मेरा तो दिल बैठ गया है। जब हम वायर की रिपोर्ट पढ़ रहे थे तब हमारे सामने PANDO.COM की तीन साल पुरानी रिपोर्ट नहीं थी। तब हमारे सामने पैराडाइस पेपर्स नहीं थे। क्या हम वाकई जानते हैं कि ये जो नेता दिन रात हमारे सामने दिखते हैं वे किसी कंपनी या नेटवर्क के फ्रंट नहीं हैं? क्या हम जानते हैं कि 2014 की जीत के पीछे लगे इस प्रकार के नेटवर्क के क्या हित रहे होंगे? वो इतिहास का सबसे महंगा चुनाव था।

क्या कोई इन नेटवर्कों को एजेंट बनकर हमारे सामने दावे कर रहा था? जिसे हम अपना बना रहे थे क्या वो पहले ही किसी और का हो चुका था? इसलिए जानते रहिए। किसी हिन्दी अख़बार में ये सब नहीं मिलने वाला है। इसलिए गाली देने से पहले पढ़िए। अब मैं इस पर नहीं लिखूंगा। यह बहुत डरावना है। हमें हमारी व्यक्तिगत नैतिकता से ही कुचल कर मार दिया जाएगा मगर इन कुलीनों और नेटवर्कों का कुछ नहीं होगा। इनका मुलुक एक ही है। पैसा। मौन रहकर तमाशा देखिए।
http://epaper.indianexpress.com/1420242/Indian-Express/November-06,-2017#page/1
पकंज चतुर्वेदी का पोस्ट है


भगत सिंह ने जब असेम्बली पर बम मारा तो अंग्रेज़ हुकूमत की तरफ़ से उन पर मुकदमा चलाया गया !
भगत सिंह जब पेशी पर अदालत मे हाज़िर हुए तो भरी कोर्ट मे अंग्रेज़ जज ने उनसे सुवाल किया कि,
"भगत सिंह तुमने हमारे लोगों पर बम मारा जब की हमें आये हुए सिर्फ़ 150 साल हुए हैं और ये मुसलमान तुम पर 800 साल से हुकूमत कर रहे थे तुमने कभी इन पर बम क्यों नहीं मारा ?"
भगत सिंह मुस्कुराये और कहा,
"मुसलमानों ने हम पर हुकूमत की, और ऐसी हुकूमत की कि हमारे देश को सोने की चिड़िया बना दिया, और ऐसा सोने की चिड़िया बनाया कि इस चिड़िया की चहचहाहट आप को सात समंदर पार से यहां खींच लायी, और जज साहब आपने 150 साल यहाँ कैसे राज किया,
 उसको एक लाइन मे कहना चाहूं तो आपने एक स्पंज की तरह राज किया, ये स्पंज गंगा के किनारे से हीरे मोती चूस कर ले जाता और इसे जब थेम्स (लंदन की नदी) के किनारे निचोड़ा जाता तो दौलत बरसने लगती,
ये जो दौलत आप यहां से भिगो-भिगो कर ले गये हैं आज (आपके यहां) सारी औधोगिक क्रांति और कारखाने उसी से आये हैं और इन मुग़लों और पठानों ने हमारे देश पर ऐसा राज किया कि इसे अपना घर बना लिया और इसी की धूल (मिट्टी) मे अपने आपको मिला दिया जो पैसा यहां से लिया यहीं पर खर्च कर दिया और इस देश को सोने की चिड़िया बना दिया"

जिसको भी भगत सिंह के इस कथन पर संदेह है वह जाकर उस किताब को पढ़ ले -
Avaidance In Book
(ग्रोवर एंड ग्रोवर पेज 169)

आज के झूटे भक्त उस सच्चे भगत से सबक लें जिसने मुग़लों को देश का गद्दार और लुटेरा नहीं बल्कि सच्चा देशभक्त माना और उनके अहसानों को भी सच्चे दिल से कुबूल किया !
अंग्रेज जज ने हालाँकि वहां भी हिंदू मुस्लिम कार्ड खेला और सोचा कि यहाँ भी हिन्दू मुस्लिम को लड़ाने की कोई बात की जाये लेकिन भगतसिंह की मज़बूत दलील और ठोस बातों ने उसके मुंह पर ऐसा करारा तमाचा मारा जिससे उसकी बोलती बंद हो गयी !
भगत सिंह ने आज के जाहिलों की तरह ये नहीं कहा कि
मुसलमान बादशाह भारत को लूटने आये थे और हिन्दुओं को मारनी आये थे क्योंकि वो इन बादशाहों का इतिहास जानते थे !
न ये कहा कि बाबर देश का खज़ाना लूटने आया था और हिन्दुओं को मारने आया था क्योंकि वो जानते थे जिस मुस्लिम बादशाह ने गाय की कुर्बानी पर पाबंदी लगवाई थी उसका नाम बाबर था !
न उन्होंने ये कहा था कि औरंगजेब कट्टरपंथी था क्योंकि वो जानते थे कि जिस मुगल बादशाह ने सबसे जियादा हिन्दू मंदिरों को जागीरें और वजीफे (Patte) दिये वो औरंगजेब ही था !
न उन्होंने बाबरी मस्जिद को किसी मंदिर पर बना हुआ माना न ताजमहल को तेजो मंदिर कहा !
क्योंकि वो भारत का और मुगलों का सारा इतिहास जानते थे,
अगर आज भी भगत सिंह जैसे लोग हों तो किसकी मजाल जो मुग़लों को देश का गद्दार कह सके, और किसकी हिम्मत जो मुसलमानों को भारत का लुटेरा साबित कर सके !
आज हम लोगों मे ये कमी है कि हम अपना इतिहास पढ़ते नहीं न हमें अपना इतिहास पता है न दूसरों का,
तो फिर कैसे हम आज खुद को पहचान पायेंगे और कैसे झूठे और मक्कारों को जवाब दे सकेंगे !
हमें पढ़ने की ज़रूरत है, क्योंकि

"जो अपना इतिहास भुला देता है उसे इतिहास भुला देती है"

*पीपल और बौद्ध सभ्यता*

*पीपल  और बौद्ध सभ्यता*

पीपल में भूत बसते हैं । यह किस सभ्यता का विरोध है ? बौद्ध सभ्यता का ही तो है ।

मृतकों की आत्मा पीपल में बसती है । कौन टँगवाता है पीपल में घंट ? यह किस सभ्यता का विरोध है ?

वेदों का इंद्र पिपरु की हत्या करते हैं । पिपरु कौन था ? पीपल - पूजक ही तो था ।

बुद्ध को पीपल के नीचे क्यों मिला ज्ञान ? बुद्ध के गाँव का नाम आज पिपरहवा क्यों है ?

हिंदी क्षेत्र के पीपरा , पीपरी , पिपरियाँ जैसे गाँव किस सभ्यता के प्रतीक हैं ?

पीपल की उपाधि आज भी भारत के कौन से लोग धारण करते हैं ? वही शूद्र - अतिशूद्र ।

सिंधु घाटी की सभ्यता का सर्वाधिक पवित्र वृक्ष कौन है ? पीपल ही तो है ।

मोहनजोदड़ो - हड़प्पा नगरों की मुहरें , मिट्टी के बर्तनों पर किसके चित्र सर्वाधिक हैं ? वही पीपल की शाखाओं एवं पत्तों के ।

सिंधु सभ्यता के देवता सिर पर क्या लगाए हैं ? पीपल ही तो ।

मिथक इतिहास नहीं है , मगर संकेत तो देता ही है ।



बुद्ध से ब्राम्हण नाराज क्यों है ????

*क्या अड़चन थी ब्राह्मणनो को बुद्ध या महावीर के साथ : “महावीर और बुद्ध को ब्राह्मण (पोंगापंथी) समाज माफ़ नहीं कर सकता। आखिर क्यों? क्योंकि उन्होंने(सम्मयक सम्मबुद्ध औऱ महावीर) युवकों को सत्य और तर्क दिया, पाखंड और पाखंडियो से आजादी दी। बच्चे और युवक नैतिक और तर्कशील बन गए। वे बुद्ध बनने लगे। तो सदियों से ब्राह्मण हीत मे बनाया समाज का ढांचा बिखरने लगा। *ब्राह्मण पुरोहितों का क्या होगा। वह चाहता है कि जन्म से लेकर मृत्यु तक वह तुम्हारा सारा क्रिया कांड करे। वह चाहता है जन्म से लेकर मृत्यु तक वह तुम्हारा शोषण करे। उसने इस तरह का जाल बिछाया है कि तुम पैदा हो तो उसकी जरूरत, नामकरण हो तो उसकी जरूरत, यज्ञोपवीत हो तो उसकी जरूरत, विवाह हो तो उसकी जरूरत, फिर तुम्हारे बच्चे पैदा हो तो उसकी जरूरत, उसने तुम्हारी पूरी जिंदगी को जकड लिया है। वह मर जाने के बाद भी तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ता, तीसरा करवाएगा, तेरहवी करवाएगा इतना ही नहीं, वह हर साल पितृ पक्ष में तुम्हारा शोषण करेगा, मर गए उनको भी नहीं छोड़ता, जिन्दा है तो उनको तो कैसे छोड़ सकता है। बुद्ध और महावीर ने इनकी चार वर्ण व्यवस्था तोड़ दी। बुद्ध का अर्थ होता है जो ब्राह्मणों पंडित पुरोहितों से मुक्त हो गया। और बुद्ध का कोई धर्म नहीं होता। ब्राह्मणों की व्यवस्था वर्ण पर खड़ी थी। चार वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र। जैसे ही कोई व्यक्ति बुद्ध होता है। वह वर्ण से बाहर हो जाता है। फिर उस पर कोई पाखंड लागु नहीं होता। बुद्ध ने हिन्दू वर्ण व्यवस्था को इस कदर तोडा, फिर भी पंडितों के लिए उन्हें इंकार करना कोई साधारण बात नहीं थी। बुद्ध की महानता ही इतनी है कि अगर बुद्ध को इंकार कर दो तो भारत की प्रतिभा क्षीण हो जाती है आज दुनिया में भारत की अगर कोई प्रतिष्ठा है तो उसमें हाथ बुद्ध का है। अगर सारा विश्व भारत को सम्मान की दृष्टि से देखता है तो केवल और केवल बुद्ध के कारण। आज भी भारतीय अपनी पहचान विश्व में बुद्ध और बुद्ध की धरती से कराते हैं। ताजा उदाहरण नरेन्द्र मोदी का ही ले लो । विदेश जाकर अपने हर भाषण मे बुद्ध का सहारा लेते हैं । क्योंकि राम कृष्ण विष्णु को बाहर देशों में कोई नही जानता। ब्राह्मणों के लिए बुद्ध को इंकार करना संभव न था। और ब्राह्मणों को इससे बचने की तरकीब निकाल ली। तरकीब यह थी की हिंदुओं ने बुद्ध को विष्णु का नौंवा अवतार ही घोषित कर दिया”*:::::::

पुराणों का परस्पर विरोधाभास

 पुराणों का परस्पर विरोधाभास


18 पुराणों में इतना विरोधाभास है कि एक बात अपनी दूसरी बात को ही काटती है। किसी एक पुराण में अपने इष्ट की स्तुति है तो अन्य दूसरे देवों की निंदा है। इससे स्पष्ट है कि ये पुराण (भागवत, शिव, मार्कण्डेय आदि) सांप्रदायिक लोगों के द्वारा रचित हैं। जिसमें अपने देव का बखान और दूसरों को नीच मानकर उनकी निंदा कि है। जैसे वैष्णव संप्रदाय शैवों की निंदा करते हैं तो शैव रामस्नेहीयों की, रामस्नेही गुसाँईयों की ऐसे ही ये पुराणों की रचना अपने देव तो श्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए समय समय पर की जाती रही है।

पुराणों के विरोधाभास संक्षेप में कुछ इस प्रकार हैं -

शिव की प्रशंसा :-
- शिवजी संपूर्ण सदाचारियों में सर्वश्रेष्ठ थे। वे ब्रह्मचारी, लोकव्यवहार को जानने वाले, धर्मानुकूल आचरण करने वाले संपूर्ण धन और ऐश्वर्यों के स्वामी है। (शिव पुराण- अध्याय ४१ श्लोक १२,१०६)
- मुक्तिदेने वाले तो केवल शिवजी ही हैं। ब्रह्मा, विष्णु मुक्तिदाता नहीं हैं, वे केवल धर्म, अर्थ और काम को देने वाले ही हैं। (शिव पुराण- कोटि रुद्रसंहिता, अध्याय ४१, श्लोक ४ )
- जो मनुष्य अनन्य भक्ति के साथ शिवजी का भजन करता है उसकी अंत में मुक्ति हो जाती है, इसमें संशय नहीं है। (शिव पुराण- कोटि रुद्रसंहिता, अध्याय ४३ श्लोक ३६)

शिव की निंदा :-
- यह शिव लम्पट और महाव्याभिचारी है। (मत्स्य पुराण- अध्याय १५४, श्लोक ३१)
- जिस शिव का लिंग (मूतेन्द्रिय) दारुवन में जाने व व्याभिचार करने के कारण भृगु के शाप से कटकर गिर गया, उस शिव की जो लोग भक्ति करेंगे उन्हें सुख कैसे मिलेगा? (देवी भागवत पुराण- स्कन्द ५ अध्याय १९, श्लोक १९)
- लिंगरूपी शिव की पूजा पाखंडियों में ही मान्यता प्राप्त करेगी। (पद्म पुराण- उमा खण्ड, अध्याय २२५, श्लोक ४२)
- शिवजी कहते हैं कि मेरे उपर अर्पित किया कोई भी पदार्थ फल, फूल, नेवैद्य आदि ग्रहण करने योग्य नहीं है,  मानो कि जैसे कूएँ में फेंकना है। (पद्म पुराण- पाताल खण्ड, अध्याय ११४ श्लोक २७५)
- शिव अपनी पत्नि सती के मर जाने पर कामातुर होकर भृगु के वन में गए और भृगु ने उनको शाप दिया जिससे कि उस निर्लज्ज शिव का लिंग कटकर भूमि पर गिर गया। (देवी भागवत पुराण- ४-२० श्लोक ३४,३६,३७)

ब्रह्मा की प्रशंसा :-
- ब्रह्मा जी ने सब शास्त्रों में से प्रथम पुराणों को बनाया जो कि नित्य एवं शब्दमय हैं और उनका विस्तार सौ करोड़ श्लोकों में है। भगवान ब्रह्मा इस भूलोक के पिता हैं, जिन्होंने सभी मनुष्यों को और जगत को उत्पन्न किया है।(मत्स्य पुराण ३/३-४)

ब्रह्मा की निंदा :-
- वेद का बनाने वाला जगत का रचयिता चार मूँह वाला ब्रह्मा भी अपनी ही पुत्री सरस्वती को देखकर कामदेव से विकल हो गया (देवी भागवत पुराण ४-२०/३३)
- ब्रह्मा जी ने अनेक बार शिवजी की माया से मोहित होकर आसक्त हुई अपनी पुत्री से भोग करने की इच्छा की। (शिव पुराण- उसा संहिता ४/२७)

विष्णु की प्रशंसा :-
- जो विश्वरूप प्रभु विश्व की स्थिति, उत्पत्ति और प्रलय का मूल कारण है उस भगवान विष्णु को नमस्कार है। (विष्णु पुराण १-२-४)
- भगवान विष्णु की आराधना करने से मनुष्य भूमण्डल सम्बन्धी समस्त मनोरथ, स्वर्ग, स्वर्गलोग निवासीयों के भी वन्दनीय ब्रह्मपद और परम निर्वाण को भी पा लेता है।(विष्णु पुराण- ३-८/६)

विष्णु की निंदा :-
- जिस विष्णु ने भृगु के शाप के कारण मत्स्य, कछुआ, सूअर और नरसिंह आदि अवतार लिया उसकी भक्ति जो करेगा वो क्यों न मृत्यु सागर में दुखित होगा ? (शिव पुराण- ११/१८)
- विष्णु तो शिवजी का नौकर है। (शिव पुराण- ४०/४)

तो बुद्धिमान लोग निश्चय करके हमें बता दें कि ऊपर किन बातों को माने और किनको न मानें ? कोई भी सूझवान व्यक्ति इसी निष्कर्ष पर पहुँचेगा कि ये मानवतावादी ग्रंथ न होकर निकृष्ट कोटि के सांप्रदायिक ग्रंथ हैं।


 ब्राहमणी भगवान...


ब्राह्मणी (हिन्दू) धर्म के भगवान् लोग ही औरतों की इज्जत नहीं करते तो उनको मानने वाले लोग क्या ख़ाक इज्जत करेंगे?

१. परशुराम : ब्राह्मण लोगों का और उनकी चाटने वालों का देवता, और मिस्टर विष्णु का अवतार परशुराम ने अपनी माँ का सर कुल्हाड़ी से उड़ा दिया था।

२. कृष्णा: विष्णु का अवतार। ये तो खुद औरतों को छेड़ता था।उनके कपडे नहाते समय लेके भाग जाता था। उनकी मटकिया फोड़ के उनको मानसिक कष्ट देता था (Mental Harassment) और मीरा को धोखा देके इसने राधा से ब्याह रचाया।

 ३. ब्रह्मा: सृष्टि की जिसने उत्पति की ब्रह्मा, ब्रह्मा ने तो अपनी पुत्री सरस्वती का ही बलात्कार कर डाला।

४. पांडव: पांडवों ने बेशर्मी की सभी हदें पार कर दी, अपनी बीवी को बेइज्जत करके, सरे आम उसको नीलाम कर दिया। दांव पे लगा दिया। जब उसकी इज्जत लूटी जा रही थी तो किसी ने भी अपनी पत्नी की इज्जत बचाने की कोशिश नहीं की, सब बेशर्मी से देखते रह गए।

५. राम: और एक विष्णु का अवतार, बहुत ही पॉपुलर, भगवान् श्री राम! पहले तो अपनी पत्नी सीता को अग्नि परीक्षा देने के लिए विवश किया, फिर भी इस भगवान का शक कम नहीं हुआ और एक धोबी के कहने पर अपनी पत्नी को घर से निकल दिया वो भी तब जब सीता गर्भवती थी। सीता को अग्नि से गुजार दिया लेकिन खुद कभी कोई परीक्षा नहीं दी।

ये सभी भगवानों के अवतार औरत जात की कोई इज्जत नहीं करते थे। उनको मानसिक कष्ट देना, उनकी बेइज्जती करना, उनका बलात्कार करना ये ही ब्रहमाणी धर्म (सनातन धर्म/वैदिक धर्म/हिन्दू धर्म) के देवता करते थे। जब ये भगवान खुद औरतों की छेड़खानी, बलात्कार, मानसिक उत्पीडन किया करते थे तो इनके भक्त इनकी ही राह पर ही तो चलेंगे ना? इसीलिए आज देखिये देश में औरतों पर अत्याचार कितना बढ़ रहा है, यह सब इन अवतारी भगवानों की ही देन, इन सभी अवतारी भगवानों ने मनुष्य जाति के प्रति अपराध किया है। (Crime Against Humanity)


असल में या जो भगवानों के नाम आप सभी ने सुने है कृष्ण, राम, ब्रह्मा या विष्णु ये कोई भगवान या देवता नहीं थे और न ही किसी भगवान के कोई अवतार थे।यह सब शूद्रों अर्थत मूलनिवासियों के खिलाफ लड़ने वाले आर्य लोग थे जिन्हीने छल कपट से मूलनिवासी राजाओं को हराया और ब्राहमणी सता देश में स्थापित की। बाद में ब्राह्मणों ने इन को देवता घोषित कर दिया। ब्राह्मण धर्म में ऐसा कोई देवता या भगवान नहीं है जो औरत जात की इज्ज़त करता था। यहाँ तक ब्राह्मण धर्म के ऋषि मुनियों, जिनको ज्ञान का भंडार कहा जाता था वो भी कभी किसी भी स्त्री का कोई सम्मान नहीं करते थे। स्त्रियों को सिर्फ भोग की वस्तु समझते थे। स्त्रियों के शोषण के लिए बहुत से तरीके ईजाद किये गए थे। जैसे अश्वमेघ यज्ञ, पुत्रेष्ठि यज्ञ, नियोग प्रथा, योनी अयोनी प्रथा आदि इन सभी प्रथाओं के द्वारा स्त्रियों का बहुत बुरी तरह शोषण किया जाता था।


अब बाबाओं की बाबागिरी एक एक करके सबके सामने आने लगी है। एक बाबा का घिनौनापन अभी दिमाग से हटता नहीं कि दूसरे बाबा की दरिन्दगी सामने आ जाती है। ये लोग धर्म और आस्था के नाम पर लोगों के विश्वास का गला घोट देते हैं। नवरात्री में कन्याओं को ज्यादा महत्व दिया जाता है वहीं हमारे देश में एक मंदिर ऐसा भी है जहां आस्था के नाम पर लड़कियों के साथ जो किया जाता है उसे सुनकर आपकी रुह कांप जाएगी।
-
आस्था के नाम पर अश्लीलता:
*तमिलनाडू के मैदूर में स्थित* *मंदिर में 7 लड़कियों को 15* *दिनों तक देवी बना कर रखा* जाता है।गांव के लोग चुनी गई 7 लड़कियों को सबसे भाग्यवान मानती है। *गांव की सभी लड़कियों को पहले पंडित के सामने परेड करना होता है। परेड के बाद इन लड़कियों का चुनाव एक पुरुष पंडित करता है।*

15 दिन तक यहीं रूकती है लड़कियां:
*चुनी गई लड़कियों को मंदिर में 15 दिन रहना होता है। रहना तक तो ठीक हैं लेकिन इनको कमर से उपर तक निःवस्त्र किया जाता है। 15 दिनों तक मंदिर में कैद इन लड़कियों के पास कोई नहीं जा सकता। इस दौरान केवल पंडित ही उनकी देखरेख वहां रहकर करता है।* उनकी उम्र 10-14 साल होती है।


http://ucnews.ucweb.com/story/1573086986863137?lang=hindi&channel_id=102&app=browser_iflow&uc_param_str=dnvebichfrmintcpwidsudsvpfmt&ver=11.4.5.1005&sver=inapppatch1&entry=browser&entry1=shareback&entry2=page_share_btn&comment_stat=1