Wednesday, 6 September 2017

बलात्कार की सजा

 बलात्कार की सजा🎌


👉अमेरिका :
पीड़िता की उम्र और क्रूरता को देखकर उम्रकैद या 30 साल की सजा दी जाती है।

👉रूस :-
20 साल की कठोर सजा.

👉चीन -
No Trial, मेडिकल जांच मे प्रमाणित होने के बाद मृत्यु दंड.

👉पोलेंड -
सुवरो से कटवा कर मौत Death thrown to Pigs

👉इराक -
पत्थरो से मार कर हत्या .Death by stone till last breath

👉ईरान -
24 घंटे के अंदर पत्थरो से मार दिया जाता है या फांसी

👉दक्षिण अफ्रीका :
20 साल की जेल

👉सऊदी अरब :
फांसी या यौनांगों को काटने की सजा

👉मंगोलिया -
परिवार द्वारा बदले स्वरुप मृत्यु Death as revenge by family

👉नीदरलैंड- :
ेंयौन अपराधों के लिए अलग-अलग सजा बताई गई है।

👉कतर -
हाथ,पैर,यौनांग काट कर पत्थर मार कर हत्या

👉अफ़गिनिस्तान -
4 दिनो भीतर सर मे गोली मार दिया जाता है.

👉मलेसिया -
मृत्यु दंड Death Penalty

👉कुवैत -
सात दिनो के अंदर मौत की सजा.


👉INDIA -
प्रदर्शन
धर्ना
जांच आयोग
समझौता
रिश्वत
लडकी की आलोचना
मिडिया ट्रायल
राजनीतिकरन
जातिकरन
जमानत
सालो बाद चार्जशिट
सालो तक मुकदमा
अपमान एवं जिल्लत
और
अंत मे दोषी का बच निकलना.
यदि आप सहमत है तो Share करे और आपको क्या लगता है, क्या सजा होनी चाहिये इन दरिन्दो की... ?
एक रेड लाईट एरिया मे क्या खूब बात लिखी
पाई गई..👇👇
"यहाँ सिर्फ जिस्म बिकता है,
ईमान खरीदना हो तो अगले चौक पर 'पुलिस
स्टेशन' हैं |"
..
आप चाहते हैं,

कि आपकी तानाशाही चले और कोई आपका
विरोध न करे..
तो आप भारत में न्यायाधीश बन जाइये,
..
आप चाहते हैं,
कि आप लोगों को बेवजह पीटें लेकिन कोई आपको
कुछ न बोले..
तो आप पुलिस वाला बन जाइये,
..
आप चाहते हैं,
कि आप एक से बढ़कर एक झूठ बोलें अदालत में,
लेकिन कोई आपको सजा न दे,
तो आप वकील बन जाइये,
..
आप चाहते हैं,
कि आप खूब लूट मार करें,
लेकिन कोई आपको डाकू न बोले,
तो आप भारत में राजनेता बन जाइये,
..
आप चाहते हैं,
कि आप दुनिया के हर सुख मांस, मदिरा, स्त्री
इत्यादि का आनंद लें,
लेकिन कोई आपको भोगी न कहे,
तो धर्मगुरु बन जाओ.
..
आप चाहते हैं,
कि आप किसी को भी बदनाम कर दें,
लेकिन आप पर कोई मुकदमा न हो,
तो मीडिया में रिपोर्टर बन जाइये,
....
यकीन मानिये..
कोई आप का बाल भी बाँका नहीं कर पाएगा.
भारत में,
हर 'गंदे' काम के लिए एक वैधानिक पद उपलब्ध
है,

तीन तलाक गाय गोबर की आड़ में जो खेल चल रहा

तीन तलाक, मंदिर मस्जिद, गाय गोबर पर तालियां बजाइए.....
मगर राम रहीम की आड़ में जो खेल चल रहा है उसे भी तो समझिये --


 एक bill जिसपर कहीं कोई चर्चा नही है। ध्यान  से पढ़िए और समझिए।

1. 10 अगस्त को, लोकसभा में The Code on Wages, 2017 पेश किया गया है. इसके लागू होने के बाद, ये सारे Acts अप्रभावी हो जाएंगे:- The Payment of Wages Act, 1936, the Minimum Wages Act, 1948, the Payment of Bonus Act, 1965 and the Equal Remuneration Act, 1976 (Clause 60)

2. सभी कंपनियों आदि के अतिरिक्त यह, इन सब पर भी लागू होने जा रहा है रेलवे, खानों, तेल क्षेत्र, प्रमुख बंदरगाहों, हवाई परिवहन सेवा, दूरसंचार, बैंकिंग और बीमा कंपनी या किसी निगम या केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या सहायक कंपनियां या स्वायत्त निकायों के प्रयोजनों के लिए ठेकेदारों की स्थापना सहित, जैसा कि मामला हो, केन्द्रीय सरकार; (Clause 2(d)) यानि यह अब हर नौकरीपेशा पर लागू होगा.
3. इसके मुताबिक़, अब पारिश्रमिक (I) घंटे के हिसाब से, या (Ii) दिन के हिसाब से, या (Iii) महीने के हिसाब से तय किया जा सकता है. जो, (ए) समय काम के लिए मजदूरी की न्यूनतम दर; या (बी) टुकड़े के काम के लिए मजदूरी की एक न्यूनतम दर; के हिसाब से दिया जाएगा. (Clause 6 ) यानि अब नौकरी घंटों या दिन के हिसाब से भी दी जा सकेगी, महीने के हिसाब से पगार की कोर्इ बाध्यता नहीं रह जाएगी.

4. (Clause 9 को 60 के साथ पढ़िए ) पे-कमीशन या wage-revision आदि ख़त्म किए जा रहे हैं. सरकार एक 'सलाहकार बोर्ड' बनाएगी जो पारिश्रमिक तय करेगा.


5. 15 साल से कम उम्र के लोग भी काम पर रखने पर कोई जुर्माना नही होगा. (Clause 19.(5) )

6. किसी को भी केवल 2 दिन के नोटिस पर काम से निकाला जा सकेगा. (Clause 17. (2) )

7. काम के घंटे कुछ भी तय किए जा सकते हैं (8 घंटे की बाध्यता समाप्त). हफ़्ता 6 दिन का होगा, सातवें दिन छुट्टी ( Clause 13. (1) )


स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद शायद ही किसी ने एेसा draconian कानून कभी सुना होगा. ILO, इस कानून के सामने एक हास्यास्पद संस्था दिखार्इ दे रही है. अभी तक तो यह सरकार, मज़दूर का PF अौर बैंक-डिपाज़िट ही हड़प रही थी, अब उसकी ज़िंदगी ही साहूकारों के चंगुल में रखने जा रही है.

जनसहाय फाउंडेशन

🏹"The जनसहाय फाउंडेशन" फॉउंडेशन चीफ "हंटरभाई"🏹*


*🔐कई वर्षों तक अंदरूनी तरीके से कार्य करते हुए यह फॉउंडेशन पहली बार आप सभी के मदद के लिए सोशल मीडिया पर आया है।🔓*

*👉🏽जानिए क्या है "The जनसहाय फॉउंडेशन"..? किन मुद्दों पर यह कार्य करता है.? किस तरह यह कार्य करता है.? देश भर मे तेजी से उभरने को तैयार है यह फॉउंडेशन*

*✏निम्नलिखित मुद्दों पर कार्य करता है, यह फॉउंडेशन कृपया ध्यान पुर्वक पढ़िए। इन मुद्दों ने आपके जीवन मे कभी का कभी प्रभाव जरूर किया होगा। अब वक्त आ गया है, उसका निवारण करके ऐसे मुद्दों को देश से समाप्त करने का..*

1). सरकारी व गैर सरकारी क्षेत्रो में आम जनता के साथ किये जा रहे अन्याय/ अत्याचार/ भ्रष्टाचार के खिलाफ क़ानूरी व गैर कानूनी लड़ाई लड़कर आम जनता को न्याय दिलवाना..। 👉🏽 किसी भी सरकारी व निजी ऑफिस/ दफ्तर/ कार्यालय में आम जनता की जल्द सुनवाई नही किया जाता। आम जनता को ऐसे जगहों पर लगातार कई चक्कर काटने पड़ते है। ऐसे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाना..!

2). यह फाउंडेशन खासकर गरिब बेसहारा लोगो के न्याय अधिकारों के लिए कार्य करता है। 👉🏽 इस देश मे कई तरह के फॉउंडेशन/ संगठन है लेकिन आम जनता के दुखों को उनकी बातों को आगे पहुचाया नही जाता। इस फॉउंडेशन के माध्यम से हम आम जनता की आवाज़ ऊंचे तबकों तक देश के हर एक सरकारी कार्यालय व देश के CM, PM, व महामहिम राष्ट्रपति तक पहुचाने का कार्य करेंगे..!

3). भारतीय रेल विभागों में रेलवे कर्मचारी व टिकट दलालों की मिली भगत इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना..! 👉🏽 आम जनता जब सीजन रेलवे टिकट लेने जाती है, तो रेलवे कर्मचारियों द्वारा टिकट उपलब्ध नही है ऐसा बताया जाता है। लेकिन वही टिकट वहाँ के टिकट दलालों के पास उपलब्ध मिलता है।

4). वेश्यावृत्ति/ देह व्यापार में फसी निर्दोष लड़कियों को बाहर निकालना व उन्हें उनके परिजनों तक पहुचाना। 👉🏽 वैश्यवृत्ति/ देह व्यापार का रैकेट चलाने वाले गुंडे लोग तकरीबन 85% लड़कियों को धोके से व डरा धमका इस नरक में धकेलते है। ऐसी लड़कियों को इस जाल से बाहर निकलकर उन्हें नया जीवन प्रदान करना..!

5). भिखारियों का रैकेट, देश मे जितने छोटे बच्चों की चोरियां होती है। उनमें से लगभग 98% बच्चों का भीख मंगवाने में इस्तेमाल किया जाता है। 👉🏽 हमारे परिवार, पास पड़ोस या हमारे परिचितों के बच्चे या हम सभी ने कभी न कभी यह सुना ही होगा की फ़लाँ व्यक्ति का बच्चा चोरी हो गया। इन मासूम बच्चों का इस्तेमाल भिखारियों के सरगना व उनके गिरोह द्वारा भीख मंगवाने में किया जाता है। ऐसे बच्चों की जानकारी प्राप्त करके भिखारियों के रैकेट से बाहर निकलकर उन बच्चों को उनके माता पिता तक पहुचना व भिखारियों का रैकेट चलाने वाले गुंडों को सजा दिलवाना..!

6). देश मे लगभग 99% सरकारी हॉस्पिटल में हॉस्पिटल के कर्मचारियों द्वारा आम जनता को ताक पर रखा जाता है। ऐसे अन्याय/ भ्रष्टाचार व अनदेखी के खिलाफ आवाज़ उठाना। 👉🏽 आम जनता जब किसी भी सरकारी हॉस्पिटल में जाते है, तो वहाँ किसी भी प्रकार की सुविधा व सुझावों की कमी रहती है। काफी अस्पतालों में इन्क्वारी काउंटर तक नही रहता और अगर रहता भी है तो वहाँ कोई कर्मचारी मौजूद नही रहता। जिस वजह से आम जनता को सरकारी अस्पतालों में काफी देर तक इधर से उधर धक्के खाने पड़ते है। ऐसे अनदेखी व अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाना..!

7). भारत की पुलिस द्वारा जाने अनजाने में कभी कबार निर्दोषों को दोषी बना दिया जाता है। इस नाइंसाफी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया करना। 👉🏽 पुलिस स्टेशन का नाम सुनते ही आम जनता डर जाती है। कभी कबार आम जनता स्वयं पर हो रहे अन्याय अत्याचार की खबर पुलिस को नही बता पाते या पुलिस द्वारा कभी कबार उनकी आवाज़ को दबाने का कार्य किया जाता है। कभी कबार पुलिस द्वारा आम जनता की रिपोर्ट दर्ज नही किया जाता या उन्हें डांट डपटकर खदेड़ दिया जाता है। इस अन्याय भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया करना व आम जनता को इंसाफ दिलवाना..!

8). रिश्वतखोरी:- आप सभी यह जानते ही है कि सरकारी कार्यालय व सरकारी क्षेत्रो में बिना रिश्वत के जल्द कोई कार्य नही किया जाता। 👉🏽 यदि ऐसे किसी जगहों पर आपका कार्य देरी से हो रहा हो, या जल्द काम करवाने के लिए आपसे कोई सरकारी कर्मचारी रिश्वत मांगता है, तो उसकी सूचना जानकारी हमे भेजीए। इस तरह के भ्रष्टाचार को हम समाप्त करेंगे..!

9). महिलाओं पर किये जाने वाला घरेलू/ बाहरी हिंसा के खिलाफ कार्यवाही करना। महिलाओं अधिकारों के न्याय की मांग करना और महिलाओ को स्वयं रोजगार की जानकारी देकर उन्हें स्वयं रोजगार प्रदान करवाकर उन्हें स्वतंत्र व स्वाश्रित जीवन देना..!

10). बाल मजदूरी के खिलाफ मुहिम चलाना व बच्चो पर होने वाले अन्याय अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाना। गरिब असहाय बच्चो की शिक्षा में आर्थिक सहायता करके ऐसे बच्चों को शिक्षा का महत्व को बताते हुए उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में आगे करके उन्हें शिक्षित करवाना।

11). वृद्ध जनों की सहायता करना। वृद्ध जनों पर किया जाने वाला अन्याय अत्याचार के खिलाफ कार्यवाही करके वृद्ध लोगो की मदद करना।

*🏹इस तरह के कई मुद्दों पर यह फॉउंडेशन कार्यरत है। भविष्य में इस तरह के कई मुद्दों पर यह फॉउंडेशन कार्य करने को तैयार है।🏹*

*🙏🏽यदि आपके पास इस तरह के अन्याय/ अत्याचार भ्रष्टाचार का कोई मुद्दा हो तो, कृपया वह मुद्दा हमे बताइये। हम उस मुद्दे को भी हमारी लिस्ट में जोड़ेंगे.. और हमारी टीम के लोग उसपर भी कार्य करेंगे।🙏🏽*

*🔴यदी आपके साथ या आपके परिवार/ मित्रों के साथ कभी भी कही भी कोई अन्याय/ अत्याचार या भ्रष्टाचार हुआ हो या हो रहा हो, तो इसकी सूचना आप हमारे इस Facebook Page के Wall पर या Inbox में भेजकर बता सकते है। जानकारी भेजने के 1 से 3 घण्टो के भीतर आपको हमारे टीम के लोग पूर्ण सुचना देंगे और 48 घंटो के भीतर उस अन्याय/ अत्याचार/ भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही करते हुए आपको इंसाफ दिलवाने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।🔴*

*🔏 कुछ कारणों से हमने हमारे तक पहुचने का सीधे संपर्क बंद किया है। क्योंकि यह फॉउंडेशन और हमारे टीम के लोग किसी भी सरकारी या निजी दबाव में कार्य नही करते। हम और हमारे टीम के लोग किसी भी कार्य को अंजाम देने में स्वतंत्र है। हमसे कोई व्यक्ति डायरेक्ट संपर्क नही कर सकता, लेकिन उनके समस्याओ का समाधान हमारी टीम के लोग डायरेक्ट करते है।🔏*

*🔎हमारे टीम में काफी दिलेर जांबांज युवा जुड़े है। इन सभी कार्यो के लिए हमे देश के अलग अलग राज्यो से, शहरों से हिम्मती/ साहसी युवाओं को जोड़ना है। यदि आप इन सभी विषयों पर कार्य करते हुए देश मे एक नई मिशाल कायम करना चाहते है तो आप हमसे जरूर जुड़िये।🔎*

*🤝हमसे जुड़ने के लिए कृपया हमारे Facebook Page को Like करते हुए आपकी प्रतिक्रिया हमारे Facebook Page के Wall या Inbox में दीजिये।🤝*

https://www.facebook.com/जनसहाय-फाउंडेशन-426753281059315/

युवा पता करो

युवाओं के मन मे एक प्रश्न का बना हुआ था *"कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा ?"*
अब इसका उत्तर मिल गया है और सिनेमा चला भी अच्छा है जो चलना ही चाहिऐ था ।



अब इस देश के लिए ये जानना जरूरी है कि 
*नेताजी सुभाष चन्द्र बोस* को क्यूँ और किसने मारा, 
*श्री लाल बहादुर शास्त्री* को किसने और क्यों मारा? 
*महात्मा गांधी* की हत्या के वह कारण क्या थे? 
इन दुर्भाग्यशाली घटनाओं से देश की पटरी ही बदल गयी।

युवाओं! ज़रा विचारो कि कहाँ कहाँ गलतियां हुई हैं.. काल्पनिक चरित्र कटप्पा से बाहर निकलो और *वो_पूछो_जो_तुमसे_जुड़ा_हुआ_है.....*

पता करो कि हम लगभग 1000 साल तक गुलाम क्यों रहे..


*पता करो कि जो देश आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक, और वैज्ञानिक रूप से सशक्त था.. विश्व गुरु था ...वो सब ज्ञान कहाँ और कैसे खत्म हो गया..*

पता करो कि सोने की चिड़िया के पंख कैसे कतर दिए गए...

पता करो कि हमारे बच्चों को आजादी के बाद भी क्या और क्यूँ पढ़ाया जाता है...

पता करो! पाकिस्तान का स्थायी रोग किसने भारत को दिया? तब हुआ क्या-क्या था?

पता करो..! कि कश्मीर को नासूर बनाने का बीज नेहरू ने क्यों और कैसे बोया..?

*पता करो..! नेपाल के महाराजा के भारत में विलय के प्रस्ताव को 1952 में नेहरू ने क्यों ठुकरा दिया था?*


पता करो..! कि 1953 में UNO में भारत को स्थायी सीट देने के ख़ुद अमेरिका के प्रस्ताव को नेहरू ने क्यों गुमा दिया था? और वह सदस्यता चीन को क्यों दिला दी?

*पता करो कि 1954 में नेहरू ने तिब्बत को चीन का हिस्सा भारत की ओर से मान लिया था? बाद में 1962 में उसी रास्ते से चीन ने भारत पर हमला किया, हम हारे, बेइज़्ज़त हुए।*

पता करो ..! तिब्बत हारने के बाद नेहरू ने क्यों कहा था कि वो तो बंजर जमीन है, कोई बात नही.. जाने दो

ज़रा मालूम करो कि चीन से भारत की हार का दोषी नेहरू को मन्त्रालय की संयुक्त समिति ने सिद्ध किया था? उसके बाद भी नेहरू को जरा भी लाज नहीं आई थी 

यह भी जानो कि जब चीनी सेना अरुणाचल, असम, सिक्किम में घुस आयी थी, तब भी 'हिन्दी चीनी भाई भाई' का राग अलापते हुए भारतीय सेना को ऐक्शन लेने से नेहरू ने क्यों रोका था?

आप ख़ुद बाहुबली बनकर कारण जानो कि हमारा कैलास पर्वत और मानसरोवर तीर्थ चीन के हिस्से में नेहरू की ग़लती से चले गए?
और भी बहुत सारी गलतियां हैं जिनमें कांग्रेस को जरा भी शर्म क्यों नहीं आती है?

हे_युवा_देश...! अपनी दिशा और दशा बदलो। यह समय मज़ाक़ों का नहीं है,  वह करो जो करणीय है।
चिन्तन का विषय है-


देश के लोग ये तो जानते है कि चीन ने हमें 1962 में हराया पर ये नहीं जानते कि 1967 में हमने भी चीन को हराया था।  
चीन ने "सिक्किम" पर कब्ज़ा करने की कोशिश की थी. नाथू ला और चो ला फ्रंट पर ये युद्ध लड़ा गया था. चीन को एसा करारा जवाब मिला था कि चीनी भाग खड़े हुये थे.  इस युद्ध में, 88 भारतीय सैनिक बलिदान हुये थे और 400 चीनी सैनिक मारे गए थे. इस युद्ध के बाद ही सिक्किम, "भारत का हिस्सा" बना था !
इस युद्ध में "पूर्वी कमान" को वही सैम मानेक शॉ संभाल रहे थे जिन्होंने बांग्लादेश बनवाया था।
इस युद्ध के हीरो थे राजपुताना रेजिमेंट के मेजर जोशी, कर्नल राय सिंह , मेजर हरभजन सिंह.
गोरखा रेजिमेंट के कृष्ण बहादुर , देवीप्रसाद ने कमाल कर दिया था !! जब गोलिया ख़तम हो गयी थी तो इन गोरखों ने कई चीनियों को अपनी "खुखरी" से ही काट डाला था ! कई गोलियाँ शरीर में लिए हुए मेजर जोशी ने चार चीनी ऑफिसर को मारा ! वैसे तो कई और हीरो भी है पर ये कुछ वो नाम है जिन्हें वीर चक्र मिला और इनकी वीरगाथा इतिहास बनी !!

*मैं किसी पोस्ट को शेयर करने के लिये नहीं कहता पर इसे शेयर करो ताकि अधिक से अधिक लोग जाने,दुःख की बात है कि बहुत कम भारतीयों को इसके बारे में पता है !!   आप लोगो से निवेदन है कि कम से कम  चीनी वस्तुओ का उपयोग न करे*

Tuesday, 5 September 2017

श्रीलंका

राम ने कौन सी ‘अयोध्या’ से किस ‘लंका’ पर चढ़ाई
की और वह ‘रामसेतु’ कहाँ बनाया ?
•-श्रीलंका का नाम ‘लंका’ 1972 में ही पड़ा, इससे पहले इस ‘श्रीलंका’ नाम का देश पूरे संसार में भी नही था !
•-‘अयोध्या’ को पहले ‘साकेत’ कहा जाता था। 2,000 साल
पूर्व अयोथ्या नाम का शहर भारत में नही था !
•-12,000 साल पूर्व ‘भारत’ से ‘श्रीलंका’, “सड़क-मार्ग” से जा सकते थे, क्योकि समुद्र का जलस्तर कम होने के कारण दोनो
देशों के बीच 1 to 80 किमी. तक चौड़ा जमीनी मार्ग था ।
ऐसे में 17,00,000 लाख साल पुर्व में जन्मे भगवान राम ने कौन सी ‘अयोध्या’ से किस ‘लंका’ पर चढ़ाई की और वह ‘रामसेतु’ कहाँ बनाया ? यह समझ परे की बात हैं !
-कहीं ऐसा तो नही की ‘रामायण’ कल्पनात्मक ढंग से
लिखी गई हो और प्रचार होने पर किसी शहर का नाम
‘अयोध्या’ तो किसी देश का नाम ‘श्रीलंका’ रख दिया
हो !
तथ्य और प्रमाण
_________________
•-‘श्रीलंका’
अब चुंकी आम लोग नाम के आधार पर ‘श्रीलंका’ को ‘रावण’ की लंका मानते हैं और वहाँ स्थित प्राचीन बौद्ध-स्थलों
को भी रावण की राजधानी से जोड़ रहै हैं। पर शोधकर्ता
इससे सहमत नहीं हैं।
उस देश का नाम भी ‘श्रीलंका’ नही था! आप ‘श्रीलंका’
का इतिहास पढ़ सकते हैं। 1972 से पूर्व ‘श्रीलंका’ नाम से संसार में भी कोई देश नही था ।
भारत के दक्षिण में स्थित इस देश की दूरी भारत से मात्र 31
किलोमीटर है। 1972 तक इसका नाम सीलोन
(अंग्रेजी:Ceylon) था, जिसे 1972 में बदलकर लंका तथा 1978 में इसके आगे सम्मानसूचक शब्द “श्री” जोड़कर श्रीलंका कर
दिया गया। आप इंटरनेट पर ‘श्रीलंका’ का इतिहास पढ़ सकते हैं । लंका से
पहले यह देश ‘सीलोंन’ नाम से जाना जाता था । ‘सीलोंन’ से पूर्व इसे ‘सिंहलद्वीप’ कहा जाता था । इससे भी पूर्व यह दीपवंशा, कुलावंशा, राजावेलिया इत्यादि नामों
से जाना जाता था।मगर ‘लंका’ कभी नही, क्योंकि स्वयं
‘लंकावासियों’ को भी राम, रामायण, और रावण का कोई
अता-पता नही था।
तीसरी सदी ईसा पूर्व में मौर्य सम्राट अशोक के पुत्र महेन्द्र
के यहां आने पर ‘बौद्ध धर्म’ का आगमन हुआ।
मगर भारत के ‘चोल’ शासकों का ध्यान जब इस द्वीप पर
गया तो वे इसका संबंध रावण की लंका से जोड़ने लगे ।
हालांकि तब भी श्रीलंकावासी स्वयं इस तथ्य से अनभिज्ञ
ही थे ।
‘रामायण’ में जिस ‘लंका’ का उल्लेख किया गया है वह
प्राचीन भारत का कोई ग्रामीण क्षेत्र था जो लंबे-चौड़े
नदी-नालों से आमजन से कटा हुआ था ।कई इतिहारकारों के
अनुसार यह स्थल ‘दक्षिण-भारत’ का ही कोई क्षेत्र था ।
*द्वितीय- भारत और ‘श्रीलंका’ के बीच में “कोरल्स” की
चट्टानें है उन्हें पत्थर नहीं कहा जा सकता है । इन ‘कोरल्स’
की संरचना ‘मधुमक्खियों’ के छत्ते के समान होती है, जिनमे
बारीक़ रिक्त स्थान होते है।
अतः किसी भी हल्की वस्तु का आयतन, पानी के घनत्व के
कम होने पर वह तैरने लगती है !!!
•-‘अयोध्या’
यहीं नही अपितु राम की कथित ‘अयोध्या’ भी दो हजार
वर्ष पूर्व अस्तित्व में नहीं थी।आज जिसे अयोध्या कहते है
उसे पहले ‘साकेत’ कहा जाता था ।
‘मौर्यकाल’ के बाद ‘शुंगकाल’ में ही “साकेत” का नाम
अयोध्या रखा गया।
बौद्धकालीन किसी भी ग्रंथ में अयोध्या नाम से कोई
स्थान नही था ।’साकेत’ का ही नाम बदलकर ‘अयोध्या’
रखा गया।
-उपरोक्त तथ्यों के अलावा भी तथ्य हैं ।
वैज्ञानिकों के अनुसार धरती पर ‘आधुनिक-मानव’ (Homo-
sapiens) की उत्पति1 लाख, तीस-हजार साल पूर्व
‘अफ्रीका’ में हुई थी। कालांतर में आज से एक लाख साल पूर्व
वहां से मानव का भिन्न-भिन्न कबीलों के रूप में भिन्न-
भिन्न ‘द्वीपों’ और ‘महाद्वीपों’ की और अलगाव होता
रहा।
हमारे ‘भारत’ में मानव का 67,000 साल (सतसठ हजार) पूर्व
आना बताया गया है।
इन तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि जो घटनाये
आज समाज के सामने प्रस्तुत की जाती हैं उनका गहराई से
अध्यन ज़ुरूर करना चाहिये तभी सत्यता को समझा जा
सकता है।अन्यथा कल्पनाओ में डुबोकर लोगो को पांखण्ड और अंधविस्वास के सहारे सिर्फ मारा ही जा सकता है.
https://en.m.wikipedia.org/wiki/Names_of_Sri_Lanka

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सृजन घोटाले में संलिप्तता

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सृजन घोटाले में संलिप्तता से संबंधित सवाल। जवाब दो तथाकथित कलयुग के ईमानदार नीतीश कुमार”

उन्होंने मुख्यमंत्री से 11 सवाल पूछे हैं –

1) 25 जुलाई 2013 को संजीत कुमार नाम के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और सामाजिक कार्यकर्ता ने मुख्यमंत्री बिहार को सृजन महिला बैंक चलाने और करोड़ों के गबन संबंधित जानकारी देते हुए एक विस्तृत पत्र लिखा था। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उसपर कोई कार्यवाई नहीं करके घोटाले करने वालों को बचाया ही नहीं अपितु उन्हें सरकारी खजाना लुटने के लिए प्रोत्साहित किया

2) 9 सितम्बर 2013 को रिज़र्व बैंक ने, बिहार सरकार को पत्र लिखकर ‘सृजन समिति’ में हो रहे घोटाले और वितीय अनियमितता की जाँच करने को कहा था। रिज़र्व बैंक ने को-ऑपरेटिव रजिस्ट्रार को भी कार्रवाई करने को कहा था। लेकिन मुख्यमंत्री ने उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की। मुख्यमंत्री ने रिज़र्व बैंक के सन्देह को भी दरकिनार करते हुए लगातार घोटालेबाजों का सहयोग किया.

3) 2013 में तत्कलीन DM ने “सृजन” मामले में शिकायत मिलने पर जाँच का आदेश दिया था। लेकिन जाँच रिपोर्ट आज तक नहीं आई। नीतीश बताएँ, उस जाँच रिपोर्ट को क्यों दबाया गया? उस जाँच रिपोर्ट को दबाकर किसे फायदा पहुँचाया गया?

4)2013 में “सृजन” घोटाले में जाँच का आदेश देने वाले जिलाधिकारी का मुख्यमंत्री ने तबादला क्यों किया?

5) 2006 से चल रहे इस घोटाले में मुख्यमंत्री ने 10 साल तक कार्रवाई क्यों नहीं की? मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री सुशील मोदी इस मामले के सीधे दोषी हैं।

6) आर्थिक अपराध शाखा ने सृजन घोटाले में लिप्त बिहार सरकार की पदाधिकारी जयश्री ठाकुर के करोड़ों रुपए जब्त किए गए। उसके बावजूद भी आर्थिक अपराध शाखा ने पूरे घोटाले की अनुसंधान किसके इशारे पर नहीं की? 2005 से गृह विभाग नीतीश के पास है। नीतीश ने आर्थिक अपराध शाखा की जाँच को क्यों छुप




देश में धार्मिक डेरे

देश में 6 हजार धार्मिक डेरे।
32 हजार धर्म गुरु।
अनगिनत धर्म स्थल और अनगिनत पुजारी।
वे दावा करते हैं कि हम समाज को दिशा दे रहे हैं।
शान्ति और भाईचारे का संदेश दे रहे हैं।
मगर दुर्भाग्यपूर्ण है कि उसी समाज में शांति कायम रखने के लिए पुलिस-फोर्स की जरूरत पड़ती है।
कानूनी डंडा चलाना पड़ता है। यहां धर्मों की विश्वसनीयता पर सवाल है।
सच तो ये है कि धर्मों ने मिलकर देश को खोखला किया है।
 वे देश की एकता में अड़चन हैं। हमें चीन और पाकिस्तान से खतरा नहीं।
असली खतरा धर्मों से है।
धर्म देश की आंतरिक सुरक्षा में बाधा हैं।
सरकारी तंत्र धर्मों के आगे कमजोर पड़ जाता है।
पहले बाबाओं की सुरक्षा में पुलिस लगाओ।
उनका रुतबा बढ़ जाएगा।
वे गलत काम करेंगे।
फिर उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस दौड़ाओ।
अजीब हालात हैं।
संत समाज खुद भटका नजर आता है।
वरना गुरुनानक देव, कबीर, फ़रीद, महात्मा बुद्ध को जेड सिक्योरिटी की जरुरत नहीं पड़ी। इसमें कसूर बाबाओं का नहीं, बल्कि हमारी अपनी कमजोरियां हैं।
क्योंकि हमारी अपनी बुद्धि गिरवी है।
धर्मों ने अंधा इतना बना दिया कि हम ठीक से सोच ही नहीं पा रहे। अहंकारी इतना बना दिया कि अपने खिलाफ भी नहीं सुन सकते।


*राम रहीम बलात्कारी*

जिस बात की आशंका थी वही हुआ,पूरा पंचकूला तहस नहस हो गया।

इस *हरामजादे बलात्कारी राम रहीम* की वजह से।किस बात की 21वीं सदी में हिंदुस्तान है।आज भी हम हूणों के शासन में जी रहे हैं।

*जब धारा 144 लागू थी तो तो इतने लठ्धारी जाहिल इकट्ठे कैसे हो पाए?*

मेरे एक मित्र ने फ़ोन पर बताया कि  *बाबा बलात्कारी* के ये चेले चेलियाँ पंचकूला के रियहायशी इलाकों में घुस के तोड़ फोड़ और लूट पाट कर रहे हैं।

*अगर ये काम मुसलमानों ने किया होता तो आज सारे मुसलमान कठघरे में खड़े कर दिए जाते।*

*शंकराचार्य को जब मर्डर केस में जेल भेज गया तो विरोध तो हुआ परंतु समर्थकों की इतनी मज़ाल नही हुई कि इस प्रकार पूरी कानूनी मशीनरी को पंगु बना सकें।*

*क्या मोदी जी,खट्टर जी,कैप्टन बोलेंगे की किसने पुलिस के हाथ बांध दिए।*

*कन्हैया,उमर खालिद ने आज़ादी मांगी तो ठोके गए।आज इस बाबा बलात्कारी के चेले चेलियाँ सरेआम कह रहे हैं कि,"अगर हमारे बाबाजी को सजा हुई तो इस इंडिया की ईंट से ईंट बजा देंगे।*

*इन्हीं बलात्कारियों ने निर्भया कांड किया,अभी वर्णिका कुंडू वाली घटना तो ताज़ा ही है।इतनी मोमबत्तियां जलीं, कानून बने,और इस बलात्कारी बाबा की चेलियाँ अपनी अस्मत लुटाने को अब भी आतुर हैं।*

*लानत है देश के नीति नियंताओं पर।सिर्फ वोट के लिए ऐसे बाबाओं को तरजीह दी गयी।बताइये इस हरामी बाबा को जेल ले जाने के लिए हेलीकाप्टर का सहारा लेना पड़ा।*

अभी अभी हाई कोर्ट हरयाणा,पंजाब ने इस बाबा की सारी संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया।अरे इसे तो चौराहे पर लटका देना चाहिए।

सारे नियम कानून सिर्फ  मध्यवर्ग के लिए है जो रोटी के जुगाड़ में भगमभग कर रहे हैं।

*चाहे कोई पार्टी या नेता हो सब इन बाबाओं,मुल्लाओं,पादरियों  के आगे मत्था टेकते हैं, सिर्फ वोट के लिए।*

आप क्या कर लेंगे,मेहनत मशक्कत करके।25 प्रतिशत आबादी टैक्स देती है।कुछ विकास होता है तब तक ये साले जाहिल लोग और नेतागण मिल के पुंगी बजा देते हैं।

*मैं तहेदिल से मानता हूं कि केंद्र व राज्य की सरकारें बुरी तरह फेल हो गईं या वोट के स्वार्थ में ये होने दिया गया।*