Tuesday, 5 September 2017

हिन्दू नाम का सच्चा इतिहास

 हिन्दू नाम का सच्चा इतिहास :
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हिंदू नाम का कोई धर्म नही है… हिन्दू फ़ारसी का शब्द है । हिन्दू शब्द न तो वेद में है, न पुराण में ,न उपनिषद में ,न आरण्यक में ,न रामायण में, न ही महाभारत में । स्वयं दयानन्दसरस्वती कबूल करते हैं कि यह मुगलों द्वारा दी गई गाली है । 1875 में ब्राह्मण दयानन्द सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की, हिन्दू समाज की नहीं । अनपढ़ ब्राह्मण भी यह बात जानता है । ब्राह्मणो ने स्वयं को हिन्दू कभीनहीं कहा । आज भी वे स्वयं को ब्राह्मण कहते हैं ,लेकिन सभी शूद्रों को हिन्दू कहते हैं । जब शिवाजी हिन्दू थे, और मुगलों के विरोध में लड़ रहे थे ,तथाकथित हिन्दू धर्म के रक्षक थे ,तब भी पूना के ब्राह्मणो ने उन्हें शूद्र कह राजतिलक से इंकार कर दिया । घूस का लालच देकर ब्राह्मण गागाभट्ट को बनारस से बुलाया गया । हिंदू का सच ,गगाभट्ट ने “गागाभट्टी” लिखा ,उसमें उन्हें विदेशी राजपूतों का वंशज बताया तो गया लेकिन ,राजतिलक के दौरान मंत्र “पुराणों” के ही पढे गए, वेदों के नहीं। तो शिवाजी को हिन्दू तब नहीं माना । ब्राह्मणो ने मुगलों से कहा, हम हिन्दू नहीं हैं, बल्कि तुम्हारी तरह ही विदेशी हैं, परिणामतः सारे हिंदुओं पर जज़िया लगाया गया, लेकिन ब्राह्मणो को मुक्त रखा गया । 1920 में ब्रिटेन में वयस्क मताधिकार की चर्चा शुरू हुई । ब्रिटेन में भी दलील दी गई कि वयस्क मताधिकार सिर्फ जमींदारों व करदाताओं को दिया जाए ।
लेकिन लोकतन्त्र की जीत हुई । वयस्क मताधिकार सभी को दिया गया । देर सबेर ब्रिटिश भारत में भी यही होना था । तिलक ने इसका विरोध किया । कहा “तेली,तंबोली ,माली ,कूणबटो को संसद में जाकर क्या हल चलाना है” । ब्राह्मणो ने सोचा ,यदि भारत में वयस्क मताधिकार यदि लागू हुआ तो, अल्पसंख्यक ब्राह्मण मक्खी की तरह फेंक दियेजाएंगे । अल्पसंख्यक ब्राह्मण कभी भी बहुसंख्यक नहीं बन सकेंगे । सत्ता बहुसंख्यकों के हाथों में चली जाएगी । तब सभीब्राह्मणों ने मिलकर 1922 में “हिन्दू महासभा” का गठन किया । जो ब्राह्मण स्वयं को हिन्दू मानने कहने को तैयार नहीं थे, वयस्क मताधिकार से विवश हुये । परिणाम सामने है । भारत के प्रत्येक सत्ता के केंद्र पर ब्राह्मणो का कब्जा है । सरकार में ब्राह्मण,विपक्ष में ब्राह्मण ,कम्युनिस्ट में ब्राह्मण ,ममता ब्राह्मण ,जयललिता ब्राह्मण . 367 एमपी ब्राह्मणो के कब्जों में है । सर्वोच्च न्यायलयों में ब्राह्मणो का कब्जा,ब्यूरोक्रेसी में ब्राह्मणो का कब्जा,मीडिया ,पुलिस ,मिलिटरी ,शिक्षा ,आर्थिक सभी जगह ब्राह्मणो का कब्जा है । एक विदेशी गया तो दूसरा विदेशी सत्ता में आ गया । हम अंग्रेजों के पहले ब्राह्मणो के गुलाम थे अंग्रेजों के जाने के बाद भी ब्राह्मणो के गुलाम हैं । यही वह हिन्दू शब्द है जो न तो वेद में है न पुराण में, न उपनिषद में, न आरण्यक में, न रामायण में ,न ही महाभारत में ।
फिर भी ब्राह्मण हमें हिन्दू कहते हैं । हिन्दू धर्म का विचित्र इतिहास आप भी जाने - मंदोदरी " मेंढकी से पैदा हुई थी ! " श्रंगी ऋषि " " हिरनी से पैदा हुये थे ! - " सीता" " मटकी मे से पैदा हुई थी ! - " गणेश " अपनी माँ के मैल " से पैदा हुये थे ! - " हनुमान " के पिता पवन " कान से पैदा हुये थे ! - हनुमान का पुत्र # मकरध्वज था जो , मछ्ली के मुख से पैदा हुआ था ! - मनु सूर्य के पुत्र थे, उनको छींक आने पर एक लड़का नाक से पैदा हुआ था ! - राजा दशरत की तीन रानियो के चार पुत्र जो, फलो की खीर खाने से पैदा हुये थे - सूर्य कर्ण का पिता था। भला सूर्य सन्तान कैसे पैदा कर सकता है, वो तो आग का गोला है ! " ब्रह्मा के 4 वर्ण यहां वहां से निकले हद है !! " दलित का बनाया हुआ चमड़े का ढोल ,मंदिर में बजाने से मंदिर अपवित्र नहीं होता! " दलित मंदिर में चला जाय तो मंदिर अपवित्र हो जाता है। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं की , ढोल किस जानवर की चमड़ी से बना है। उनके लिए मरे हुए जानवर की चमड़ी पवित्र है, पर जिन्दा दलित अपवित्र....!! " लानत है ऐसे धर्म पर" ....!!! "
बुद्धिजीवी प्रकाश डाले !! दिमाग की बत्ती जलाओ अंधविश्वास भगाऔ यदि पूजा-पाठ करने से ही बुद्धि और शिक्षा आती तो , पंडों की औलादें ही विश्व में वैज्ञानिक-डॉक्टर-इंजीनियर होती. " वहम् से बचों, अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवाओ क्योंकि, शिक्षा से ही वैज्ञानिक-डॉक्टर-इंजीनियर और शासक बनते हैं . पूजा-पाठ से नहीं. अतः वहम् का कोई ईलाज नहीं और , शिक्षा का कोई जवाब नहीं. शिक्षित बनो " संगठित रहो " संघर्ष करो " सनातन धर्म मे क्या हुआ ,आप जानते हैं ? इन्द्र ने - गौतम ऋषि की पत्नी "अहिल्या के साथ रेप किया .चन्द्रमा ने अर्क अर्पण करती ब्रहस्पति की पत्नी "तारा के साथ रेप किया .अगस्त्य ऋषि ने सोम की पत्नी "रोहिणी के साथ रेप किया ! ब्रहस्पति ऋषि ने औतथ्य की पत्नी व मरूत की पुत्री "ममता के साथ रेप किया । पराशर ऋषि ने वरुण की पुत्री "काली के साथ रेप किया ! विश्वामित्र ने - अप्सरा "मोहिनी के साथ सम्भोग किया . वरिष्ठ ऋषि ने अक्षमाला के साथ रेप किया ! ययाति ऋषि ने विश्ववाची के साथ रेप किया ! पांडु ने माधुरी के साथ रेप किया । राम के पूर्वज राजा दण्ड ने शुक्राचार्य की पुत्री "अरजा के साथ रेप किया । ब्रह्मा ने अपनी बहिन गायत्री और पुत्री सरस्वती के साथ रेप किया। ऐसी न जानें कितनी घटनाएँ इनके धर्म ग्रन्थों में भरी पढ़ी हैं ,इस पोस्ट को करने का मेरा एक ही मकसद है कि ,मैं हिन्दू धर्म के ठेकेदारों से पूछना चाहता हूँ , इन बलात्कारियों का दहन क्यों नहीँ ? और रावण महान जैसे महा विद्वान, शीलवान व्यक्तित्व का जिसने सीता का अपहरण तो किया पर, कोई शील भंग नहीँ किया, ऐसे नारी को सम्मान देने वाले रावण का दहन आखिर क्यों ? रत्न विचार भगवान से न्याय मिलता तो *न्यायालय नहीं होते। सरस्वती से ज्ञान मिलता तो विद्यालय नहीं होते। दुआओ से काम चलता तो औषधालय नहीं होते। बिन काम किये भाग्य चमकता तो कार्यालय नहीं होते। मंदिर धर्म के दलालों की *निजी दुकान* है, जो कि कुछ *विशेष जाती* के लोगो को ही फायदा पहुँचाने के लिए है। वहाँ वही जाते हैं, जो *दिमाग से गुलाम* होते हैं। सोच बदलो, ये है भारत का असली इतिहास , बाकि सब झूठ है ।
इस पोस्ट के अन्दर दबे हुए इतिहास के पन्ने है। जिसमें *मूलनिवासी द्रविड कौन है? देवी-देवता कौन है?आर्य कौन है?जातिवाद,पूँजीवाद क्या है? आप द्रविड़ शब्द का अर्थ जानते हो? कुछ लोग मेरे ख्याल से नहीं जानते होंगे। उनके लिए मैं संक्षिप्त में जानकारी प्रस्तुत कर रहा हूँ। *द्रविड शब्द सभी ने अपने विद्यार्थी जीवन में अवशय पढ़ा होगा । साथ ही यह भी पढ़ा होगा की भारत देश की सभ्यता आर्य और द्रविड लोगों की मिली-जुली सभ्यता हैl और यह भी पढ़ा होगा की *आर्य बाहर से आये हुए लोग है। हमारे भारतीय इतिहासकार लोगो ने बहुत सारी बातो को दबा दिया हैl भारत में आर्यों का आगमन हुआl ये कौन लोग है? कहाँ से आए?भारत में ये लोग है या नहीl इस बारे में इतिहासकार इतिहास में लिखते नहीं। क्यों? क्योंकी आज भारत देश में इतिहास लिखनेवाले आर्य लोग ही है। लेकिन आप उसे पहचानते नहीं। क्या आपको पता है? आपको शिक्षा कब से मिली ?और आप कौन से वर्ण में आते है? आप इस जाति में क्यों है? आप का इतिहास क्या था? जिस दिन इन बातो को खोजना शुरू करेंगे। आपको उत्तर मिलना शुरू हो जायेगा ।और जब समझ में आएगा तब आपको अहसास होगा की मैं गुलाम हूँ।आर्यों ने हमें घेर रखा हैl अब मैं कुछ करू। क्योंकी द्रविड कोई और नहीं आप ही द्रविड हो।* इतिहास के पन्नोे से *आर्य कोई और नहीं ब्राम्हण,क्षत्रिय,वैश्य ही आर्य है। ये अर्थवा,रथाईस्ट,वास्तारिया जाति के हैl इनका आगमन आज से 4500 साल पहले 2500 ईसा पूर्व भारत में हुआ थाl* ये घुड़-सवारी होते थे और लोहे के तलवार रखते थेl ये अपने साथ गाय भी लेकर आये थे। उस समय *भारत तीन भागो में बटा थाl पश्चिमोत्तर में राजा बलि का राज था। पूर्वोत्तर में राजा शंकर का राज थाl जिसे आप शंकर भगवान कहते होl और दक्षिण में राजा रावण का राज थाl जिसे आप हर साल जलाते हो और खुसिया मनाते होl* आर्य के आगमन के पहले भारत के मूलनिवासी द्रविड लोग थेl उस समय भारत के द्रविड लोग कृषि पशुपालन,पक्के ईटो के घर ,नहाने के लिए स्नानागार, देश-विदेश में ब्यापार ,विज्ञानवादी सोच ,मूर्ती निर्माण कला ,चित्रकारी में कुशल,शांति प्रिय ,एक उन्नत सभ्यता थीl उस समय अन्य देशोसे तुलना करे तो हमारी सभ्यता उनसे काफी विकसित थी।आर्योने सर्वप्रथम राजा बलि के राज में प्रवेश कियाl झुग्गी-झोपडी बनाकर रहने लगेl चोरी-चकारी करना शुरू किया। द्रविड़ो ने राजा से शिकायत कीl द्रविड़ो ने आर्यों को पकड़ कर राजा के सामने हाजिर किये। आर्यों ने पेट का हवाला दियाl राजा बलि दयालु मानवता प्रेमी थे। उसने माफ़ कर दिया और आर्यों के रहने-खाने का बंदोबस्त कर दिया ,और चोरी न करने की सलाह दीl कुछ दिन में राजा और प्रजा के ब्यवहार समझ जाने के बाद आर्यों ने एक योजना बनायीl इसमें *बामन नाम का एक आदमी (जिसे आज विष्णु भगवान कहते है) सभी आर्यों में तेज बुध्दीवान था*l पुरे आर्य ग्रुप के साथ राजा बलि के दरबार पहुचे और कहा राजा साहब हम आपके दरबार में बहुत सुखी हैl पर कुछ और हमें चाहिए दे देते तो बड़ी मेहरबानी होतीl राजा बलि ने कहा मांगो। आर्यों ने कहा राजा साहब हमने सुना है, आपके राज में त्रिवाचा चलता हैl अर्थात तीन वचन। हमें भी त्रिवाचा दीजिये, कही मुकर जायेंगे तो। इस प्रकार आर्यों ने छल-कपट पूर्वक राजा बलि के सामने तीन मांगे रखी। *पहली- राजा साहब हमें ऐसी शिक्षा का अधिकार दो, जिसे चाहे हम दे और न चाहे तो न दे। दूसरी-राजा साहब हमें ऐसा धन का अधिकार दो, जिसे चाहे हम दे न चाहे तो न देl तीसरी- राजा साहब हमें ऐसा राज करने का अधिकार दो, जिसे चाहे उसे राज में बिठाये और न चाहे तो न बिठाये। इसप्रकार आर्यों ने छल-पूर्वक राजा बलि से शिक्षा, धन ,राज करने का अधिकार ले लिए और राज में स्वयं बैठ गए। सैनिक शक्ति में अपने लोगो का कब्ज़ा करवा दिया। फिर राजा बलि को मारकर जमीन में गाढ़ दिया। जिसे कहा जाता है, विष्णु भगवान ने राजा बलि से दान में धरती पर तीन पग जमीन माँगीl ये तीन पग शिक्षा, धन, राज करने का अधिकार हैl जमीन में गाडा इसे बताया जाता है पाताल लोक का राजा बना दिया। आप तो पढ़े-लिखे होl जरा सोचो क्या किसी का पैर इतना बड़ा हो सकता हैl जो पुरी पृथ्वी को ढक ले। और पुरी पृथ्वी पर कब्ज़ा होता, तो विष्णु भगवान को अन्य देश के लोग क्यों नहीं जानते। क्यों नहीं पूजते। इसप्रकार आर्यों ने राजा बलि का राज हड़प लियाl उसी दिन से आर्य और द्रविड(भारत के मूलनिवासी) के बीच युद्ध जारी हैl* इसके बाद *राजा शंकर का राज हड़पने के लिए योजना बनायी। इसके लिए विष्णु ने अपनी बहन की शादी राजा शंकर से करने के लिए सोचा और शादी का प्रस्ताव भेजाl राजा शंकर का सेनापति महिषासुर थाl वो आर्यों की चाल समझ गया था, उसने मना करवा दिया। महिषासुर रोड़ा बन गया। तो आर्य पुत्री पार्वती ने ही महिषासुर को मारने के लिए उसे अपने प्रेम-जाल में फँसाया और खून करने के लिए आठ दिन तक मौका खोजती रहीl नौवे दिन जैसे ही मौका मिला धोखे से त्रिशूलद्वारा हत्या कर दी, और शंकर के पास दासी के रूप में सेवा करने लगी। धीरे-धीरे पार्वतीने अपनी खूबसूरती से शंकर को भी वश में कर लिया। और योजनाबद्ध तरीके से राजा शंकर को नशा की आदत लगा दीl इसप्रकार नशा के आदि होकर राजा शंकर का राज-पाठ से मोह-भंग हो गयाl फिर आर्यों ने उनका भी राज चलाया और नशे से आपका शरीर गर्म हो गया यह कहकर हिमालय पर्वत में रहने की सलाह दीl जिसे आज कैलाश पर्वत कहते है।* इसप्रकार दो राज्यों में आर्यों का कब्ज़ा हो गया। फिर *रावण का राज हड़पने के लिए युद्ध छेढ दिया गया। बिभिशन के दोगलापन के कारण छल से रावण को भी भारी मसक्कत के बाद आखिर में मार दिया गया।* इसप्रकार तीनो राज्यों में आर्यों ने कब्ज़ा कर लिया। *आर्यों ने अपने को देव और भारत के मूलनिवासी(द्रविड) को असुर कहाl इसप्रकार 1500 वर्षो तक चले युद्ध के बाद द्रविड पूर्ण रूप से हार गए। यह युद्ध इतिहास में देवासुर-संग्राम के नाम से प्रसिद्ध है।* *देवासुर-संग्राम के बाद ही जाति व वर्ण व्यवस्था बनायी। आर्यों ने अर्थवा को ब्राम्हण,रथाईस्ट को क्षत्रिय और वस्तारिया जाति को वैश्य(बनिया) घोषित किया और भारत के मूलनिवासी(द्रविड) को शुद्र घोषित किया।* और शुद्र में दो वर्ग बनाये जितने लोगो ने लड़ा-भिड़ा उसे अछूत शुद्र कहा और बाकि को सछुत शुद्र घोषित किया। तथा सामाजिक एकता तोड़ने के लिए उन्होंने सिर्फ शुद्र की ही जाति बनायीl *आज ये जाति लगभग 6743 की संख्या में हैl* इसकी लिस्ट गूगलनेट में देख सकते है। *ब्राम्हण, क्षत्रिय,वैश्य की कोई जाति नहीं होतीl उनका सिर्फ वर्ण ही होता है। जैसे शर्मा, दुबे, चौबे, श्रीवास्तव ,द्विवेदी इनके गोत्र है जाति नहीं*यकिन न हो तो चतुराई से पुछ कर देख लेना। इस *देवासुर-संग्राम में जो लोग लड़-भीड़ कर जंगल में शरण लीl और युद्ध जारी रखाl वो वन शरणागत शुद्र(आदिवासी) ST कहलाये ,और जो लोग लड़-भीड़ कर हार कर वही समाज के बाहर रहने लगे वो (अछूत) SC कहलायेI और बाकि शुद्र सछुत शुद्र कहलायेl जिनमें अन्य (पिछड़ा वर्ग) OBC आता है।* जिसने जैसा संग्राम किया उसे उतना ही घृणित कार्य दिया गया। *रामायण, महाभारत ,चारो वेद ,उपनिषद,पुराण उसी समय के लिखे गए ग्रन्थ है। इस प्रकार जातियाँ द्रविड की सामाजिक एकता तोड़ने के लिए बनायी गयी और देवी-देवता धार्मिक गुलाम बनाने के लिए बनाए गए।* *हम देवी-देवता के रूप में सभी आर्यों की पूजा करते हैl ये सारे देवी-देवता झूठे(false) है। यह सत्य होता तो पुरे विश्व में देवी-देवता मानतेl भारत में ही क्यों?* इसप्रकार *शिक्षा का अधिकार ब्राम्हण ने ले लियाl क्षत्रिय ने राज करने का, वैश्य ने धन का अधिकार ले लिया और शुद्र(द्रविड) मूलनिवासी को तीनो वर्णों की सिर्फ सेवा करने का काम दिया गया। जिसे आपने कहीं न कहीं अवश्य पढा होगाl* इसके बाद *महावीर स्वामी ने जाति व वर्ण ब्यवस्था का विरोध किया थाl (583 ईसा पूर्व में) पर ज्यादा सफल नहीं हुए।* फिर *गौतम बुद्ध ने (534 ईसा पूर्व) बौद्ध धर्म जो मानव जाति का प्रकृति प्रदत धम्म को खोजाl जो शाश्वत धम्म है। जिसने पुरे विश्व के मानव जीवन का कल्याण खोज निकालाl जाति व वर्ण व्यवस्था को लगभग समाप्त कर दिया था। गौतम बुद्ध के बाद मौर्य वंश में चन्द्रगुप्त मौर्य अशोकने बौद्ध धर्म को नई उचाई दीl अशोक के पुत्र-पुत्री ने कई देशो में बौद्ध धम्म का प्रचार-प्रसार कियाl* जो आज के समय में *100 से अधिक देश बौद्ध धर्म को अपना चूके हैl* कही अंशिक तो कही पूर्ण रूप से। *मौर्य वंश के अंतिम बौद्ध राजा बृहदस्थ ने गलती कीl उसने सेनापति के रूप में ब्राम्हण पुष्यमित्र शुंग को घोषित किया। शुंग ने सभी ब्राम्हणो को सेना में भर्ती कर दिया और सेना के सामने अंतिम बौद्ध राजा बृहदस्थ की हत्या कर दीl और 84000. स्तूप तोड़ दिए गए। पुष्यमित्र शुंग का शासनकाल 32 वर्ष (184 ईसा पूर्व -148 ईसा पूर्व)है। लाखो बौद्धो को काट दिया गया ।एक बौद्ध सिर काटकर लाने का इनाम 100 नग सोने के सिक्के रखा गया। भारत की धरती खून से रक्त-रंजित हो गयी।* बहुतो ने दुसरे देश जाकर अपनी जान बचायी। सारे बौद्ध ग्रंथ घर से खोज-खोज कर जला दिए गए। इसप्रकार जिस देश में बौद्ध धम्म ने जन्म लिया उस देश से गायब हो गया। आज भारत में जो भी बौद्ध ग्रंथ, त्रिपिटक लाये गए वो सब अन्य देशो से लाये गए है। बादमें *पुष्यमित्र शुंग ने मनुस्मृति लिखीl जिसमें शुद्रो के सारे मानवीय अधिकार छीन लिए गए। रामायण, महाभारत को फिर से नए ढंग से नमक मिर्ची लगाकर लिखा गया। तब से 2000 साल तक शुद्र (SC/ST/OBC) को शिक्षा और धन का अधिकार नहीं मिला थाl* इस बीच अनेको संत कबीर,गुरुनानक,रविदास,गुरु घासीदास ,और अनेक महापुरुष हुएl जिन्होंने भक्ति मार्ग से लोगों को सत्य का अहसास करायाl लेकिन नैतिक शक्ति-शिक्षा ,राजनितिक शक्ति - वोट देने के अधिकार ,सैनिक व शारीरिक शक्ति-कुपोषण के कारण क्षीण हो गया थाl *ब्राम्हण, पेशवाई में अचूतो की स्थिति अति दयनीय हो गयी थीl इस समय अचूतो को गले में हांड़ी और कमर में झाड़ू बांधकर चलना पडता थाl यह 12 वर्षो तक चलाl 1जनवरी 1818 को 500 महार सैनिकों ने 28000 पेशवाई लगभग युद्ध करके ख़त्म कर दीl जिसमें 22 महार सैनिक शहीद हुए थेl* मुग़ल राजाओ ने भी ब्राम्हणों से साठ-गाठ कर भारत को गुलाम बनाया और ब्राम्हणों के मर्जी से शुद्र को शिक्षा नहीं दीl लेकिन जहांगीर के शासन काल में थाॅमस मुनरो आये थेl यहाँ की अजीब स्थिति देखकर वह दंग रह गए ,उसी के बाद डच,पोर्तूगाली,फ़्रांसिसी,अंग्रेज आये और कंपनी स्थापित कर भारत को गुलाम बनायाl *थाॅमस मुनरो ने सबको शिक्षा देना शुरू कियाl जिसमें पहले व्यक्ति महात्मा ज्योतिबा फुले ने शिक्षा पायीl जो की माली जाति के अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैl शिक्षा पाने के बाद उन्होने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले को भी पढायाl इसप्रकार सावित्रीबाई फुले सवर्ण महिला ,शुद्र महिला ,अतिशुद्र महिला में शिक्षा पानेवाली पहली महिला बनीl* ये आर्य सवर्ण लोग अपनी पत्नी को भी शिक्षा नहीं देते, क्योंकी उनकी पत्नी भी द्रविड महिला ही है। इसलिए कहा गया है *ढोल ग्वार शुद्र , पशु , नारी ये सब है ताडन के अधिकारीl शुद्रो को शिक्षा 19वी सदी में 1840 के आसपास ही मिलना शुरू हुआl* सारी क्रांति शुद्रोने(द्रविड) ब्रिटिश शासनकाल में ही कीl *रामास्वामी पेरियार , डाॅ. बाबासाहेब आंबेडकर के जीवनकाल में कितनी छुवाछुत थीl किसी से छुपा नहीं है। डाॅ.आंबेडकर अछूत समाज में पहले व्यक्ति है, जिन्होंने पहली बार मेट्रिक पास कियाl ग्रेजुएशन किया ,M.A. किया।देश-विदेश से अनगिणत डिग्रीयाँ हासिल कीl* *डाॅ.आंबेडकर साहब जैसे संघर्ष आज तक किसी ने नहीं किया। अछूत कहे जाने वाले अस्पृश्य समाज को तालाब का पानी पीने का ,मंदिर में प्रवेश का अधिकार नहीं थाl चवदार तालाब का पानी पीने का सामूहिक प्रयास डाॅ.आंबेडकरने पहली बार कियाl* जिसमें अछूतो के संग बहुत मारपीट की गयीl करीब 20अछूत इस हमले में जख्मी हो गए थेl फिर कालाराम मंदिर में प्रवेश किये। बाबा साहब ने कई सभाए ली,कई समितियों का निर्माण किया । *25दिसंबर 1927 को मनुस्मृति का दहन किया गयाl यही वह ग्रंथ है, जिसमें शुद्रो को नरक सा जीवन जीने के लिए तानाशाही आदेश जारी किये गए।* देश स्वतंत्र होनेवाला थाl समय *बाबासाहब से बड़ा कोई विद्वान ही नहीं थाl इसकारण संविधान लिखने का अवसर बाबा साहेब को मिलाl आज अचूतो को ,शुद्रो को ,महिलाओं को जो भी अधिकार मिले है, चाहे कोई भी फील्ड हो सब बाबासाहब के अथक प्रयास से संभव हुआ है। इसे SC/ ST/OBC/मायनॅरिटी माने या न माने ये उनके ऊपर निर्भर है। अनुसूचित जाति कल्याण आयोग, अनुसूचित जनजाति कल्याण आयोग, अन्य पिछड़ा कल्याण आयोग, धार्मिक अल्प संख्यक कल्याण आयोग (SC/ST/OBC/Minirity) के लिए बनाया गया है।* आपको संविधान में सवर्ण कल्याण आयोग कही नहीं मिलेगा। क्यों ? जरा सोचे यह *संविधान भारत के मूलनिवासी (द्रविड) के हित व उनका सम्पूर्ण विकास के लिए बनाया गया है। हर जरुरी अधिकार सविधान में डाले गए है। लेकिन अफ़सोस की मूलनिवासीयों (द्रविड़) ने आज तक संविधान को खोलकर देखा ही नहीं और सवर्ण के साथ ही संविधान को बिना पढ़े घटिया और बदलने की बात करता हैl* वही अन्य देश के राष्ट्रपति,PM ,कानून के जानकार इसे दुनिया की सबसे महान संविधान कहता हैl *बाबसाहेबने संविधान लिखकर मूलनिवासी (द्रविड) को आधी आजादी दी गयी है और आधी आजादी जिस दिन हमारे द्रविड भाई एक हो जायेंगे उस दिन सम्पूर्ण आजादी मिलेगी।आज व्यापार में 95%, शिक्षा में 75%, नौकरी में 75% ,जमीन में 90% इन आर्यों का ही कब्ज़ा है। भाईयों जरा गौर करो SC/ST/OBC/Minirity के लोग कितने % व्यापार में हाथ-पाव जमाये हो? 85% मूलनिवासी (द्रविड) सिर्फ ग्राहक बने हो, दुकानदार तो मुख्य रूप से सवर्ण ही है।* बड़े-बड़े उद्योग ,कंपनी, बड़ी-बड़ी दुकाने हर प्रकार का दुकाने कौन चला रहा हैl गौर करोगे तो सब समझ आ जायेगाl लेकिन दुःख की बात है कि, हमारे भाई दूर की सोच रखते ही नहींl *आज सिख, बौद्ध भी द्रविड हैl इसाई,मुस्लिम भी द्रविड हैl मुग़लकाल में हमारे ही द्रविड भाईयो ने हिंदू धर्म की हीनता देख कर मूस्लिम धर्म को अपनायाl अंग्रेजो के शासनकाल में हमारे द्रविड भाईयों ने ही इसाई धर्म को अपनाया। और सिखों ने अपना अलग सा धर्म बनाया। इस कारण सवर्ण लोग कभी सिख दंगा, कभी इसाई दंगा, कभी मुस्लिम दंगा, कभी बौद्ध पर हमला करता रहता हैl ये सब इनकी सोची-समझी साजिश होती है। ''67 साल के बाद आज जैसे ही बीजेपी सत्ता में बहुमत से आई है। गौर कीजिये क्या हो रहा हैl धर्म-धर्म रट रही हैl भारत को हिंदुस्तान करना चाहते है। सिख हिन्दू थे, घर वापसी करो ऐशी बाते करते हैl इनके मंत्री बोल रहे है साध्वी, नाथूराम गोडसे देशभक्त हैl जो आपके राष्ट्रपिता को तीन गोली ठोकता है। 4-5 बच्चे पैदा करो एक इनको दो, एक बोर्डर को दो, बाकी अपने पास रखोl कितना सम्मान करते है महिलाओं का सोचो। 2021तक सबको हिन्दू बनाने की धमकी दिये जा रहे हैl तो अल्पसंख्यक कहा जायेंगे। इसी कारण ही बाबासाहब ने अल्पसंख्यक को कुछ विशेष अधिकार दिए थेl ताकि बहुसंख्यक इन पर हावी न हो सके। गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करना चाहते है, क्योंकि पुन: युद्ध करा सके। इतने सारे बेतूके बयान दे रहे है और मोदी चुप है क्यो? द्रविड भाइयो अब एक हो जाओl यह समय खतरे से भरा हैl अगर टूट कर रहोगे तो फिर याद रखना इतने दिनो तक ब्राम्हणवाद ने मारा अब पूँजीवाद मारेगा और वर्ग संघर्ष की स्थिति निर्मित होगीl शिक्षा का भगवाकरण करके आपके दिमाग को मार रहे है।

‬[ये फर्क है वैदिक धर्म और बौद्ध धम्म में]

*🇮🇳 "विश्व इतिहास में गौरवशाली सह अद्वितीय 'मौर्य शासन काल' एवं मौर्य सम्राटों (बौद्ध कालिन) के शासन में अखंड भारत की आदर्श महानता/पहचान"* 🇮🇳
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1.चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य
     323 - 299 ई०पू०

2.सम्राट बिंदुसार मौर्य
    299 - 274 ई०पू०

3. प्रियदर्शी सम्राट अशोक महान
     274 - 234 ई०पू०

4. सम्राट कुणाल मौर्य
     234 - 231 ई०पू०

5. सम्राट दसरथ मौर्य
     231 - 223 ई०पू०

6. सम्राट सम्प्रति मौर्य
     223 - 215 ई०पू०

7. सम्राट शालिशुक मौर्य
     215 - 203 ई०पू०

8. सम्राट देववर्मा मौर्य
     203 - 196 ई०पू०

9. सम्राट सतधन्वा मौर्य
    196 - 190 ई०पू०

10.सम्राट वृहद्रथ मौर्य
     190 - 184 ई०पू०

ये है ऐतिहासिक एवं गौरवशाली अखंड भारत में मौर्य वंश के अद्वितीय 10 सम्राटों/राजाओं के सर्वोत्तम शासन काल का विवरण। गौरवशाली सह अद्वितीय मौर्य शासन काल के 139 वर्ष विश्व इतिहास में एक अलग स्थान रखते हैं।
🌻इसी समय में "अखण्ड भारत का निर्माण" हुआ था।
🌻इसी समय में भारत "विश्व गुरु" कहलाता था।
🌻इसी समय में भारत "सोने की चिड़िया" कहलाता था।
🌻इसी 139 वर्षों में भारत "विश्व विजयी" कहलाता था।
🌻इसी समय चन्द्रगुप्त मौर्य के नेतृत्व में विश्व की प्रथम संयुक्त सेना का सफल सह विजयी सेना का निर्माण हुआ था।
🌻इसी समय विश्व में अखंड भारत की सेना सबसे विशाल और अजेय थी।
🌻इसी समय में भारत विदेशी आक्रमणकारियों से भयमुक्त/चिंतामुक्त था।
🌻इसी समय में सिकंदर-सेल्युकस जैसे आक्रमणकारी को चन्द्रगुप्त मौर्य के सामने अपनी हार और भारत की विजय स्वीकार करनी पड़ी थी।
🌻इसी समय में भारत विश्व की सबसे मजबूत समावेशी, मानवीय, सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, मैत्री इत्यादि की ताकत होता था।
🌻इसी समय में भारत में विदेशी छात्रों का आगमन शुरू हुआ।
🌻इसी समय में भारत पूरे विश्व में व्यापार की शुरुआत किया।
🌻इसी समय मे सबको शिक्षा, स्वास्थ्य, संपति, समावेशी मौलिक जीवन का समान अधिकार होता था।
🌻इसी समय में समृद्धशाली भारत का निर्माण हुआ।
🌻इसी समय में भारत "प्रबुद्ध भारत" कहलाता था।
🌻इसी समय में भारत सत्य,  करुणा, प्रेम, मैत्री, बंधुत्व, शील, प्रज्ञा इत्यादि से शांतिमय सह सुखमय भारत था।
🌻इसी समय का शासन मानवता, समानता, लोक कल्याणकारी, राष्ट्रीयता, समावेशी समाज सह राष्ट्र विकास पर आधारित था।
🌻इसी समय का "अशोक स्तम्भ" स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय चिन्ह/प्रतीक है। जो प्रत्येक राष्ट्रीय मुद्रा एवं दस्तावेज पर अंकित रहता है।
🌻इसी समय का "सत्यमेव जयते" राष्ट्रीय वाक्य है।
🌻इसी समय का "अशोक चक्र" भारत के तिरंगे में प्रगति प्रतीक नीले रंग में चक्र एवं राष्ट्रीय सम्मान है।
🌻स्वतंत्र भारत का राजकीय पथ "अशोक पथ" एवं केन्द्रीय हॉल "अशोक हॉल" है।
🌻इसी समय का राष्ट्रीय पशु "शेर/सिंह" और राष्ट्रीय पक्षी "मोर" है।



*हिन्दू एवं इसका सच*
 कोई धार्मिक स्थल चर्च, मस्जिद, गुरुद्वारा, बौद्ध विहार इत्यादि में उसी धर्म के लोगों का प्रवेश वर्जित नहीं, पर हिन्दू धार्मिक स्थल मन्दिर में हिन्दू दलित एवं कई जगह हिन्दू महिलाएं भी नहीं जा सकती, मेंस पीरियड में तो सभी मन्दिरों में वर्जित है। जब अपने ही धार्मिक स्थल पर प्रवेश वर्जित है तो उसे अपना मानना क्या बेवकूफी नहीं है?
दक्षिण के अनेकों मन्दिरों में महिलाएं अपने प्रवेश के लिए आंदोलन किये, फिर भी बहुत से मन्दिर में अभी भी महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। जिस न्यायिक सिस्टम हम जा ही नहीं सकते, वह अपना न्यायालय कैसे है? जिस घर में या मन्दिर में जा ही नहीँ सकते वह अपना घर एवं पूजा स्थल कैसे?
     धर्म सिर्फ शोषण का हथियार है।
🍇🍇🤷‍♀🤷‍♀🤷‍♀🤷‍♀
         Out of thousands of technological innovations and many theory we are studying these all are  products of christians not a single innovations are of hindu either mobile, computer to any one we are using.
           We say, hindu are monogamy, but  It is only law, not in social practices. You may see 20 grandfathers around you at least 25% definitely may have polygamy.
            Hindu only criticize muslims, but they do not observe their legends or God.   
               Dropadi had 5 husbands, Dashrath had 3 wives. Brahma married his daughter.    
              Yudhishthir was infamous gambler, who lost all properties even his wife, but among Hindu he is known as dharmaraj. Is it not a paradox?
             Sita was ousted by Ram without talaq. 
     Widow remarriage is still not permissible in Hindu, in contrast prevalent in muslims.
      Widow were fired at her husband pyre in hindu not in muslims. 
           Ganga donation of first son
   and kashi karwat an inhumane killing of old is a hindu tradition.
     Huge examples are there, still we say hindu a great religion. *Is it not a mockery?*
       In rural India more in Haryana, you will observe highly prevalent parda system among Hindu still we criticize over muslim veil.
       सिर्फ डिंग हांकने एवं क्रिशचन- मुस्लिम को बुराई करने से नहीँ होता, बल्कि तार्किक, वैज्ञानिक एवं पारदर्शिता के पैमाने पर पर आंकना पड़ता है, जिसमें हिन्दू कहीं नहीँ टिकता।।
              सिर्फ यहाँ आडम्बर एवं बकवास है। कुंभ में लाखों नागा हिमालय से अवतरित होते हैं एवं अखाड़े में अपना युद्ध कौशल दिखाते हैं, पर उसी हिमालय पर चीन एवं पाकिस्तान के सेना आता है, तो ये नागा कहीं भी सीमा बचाने नहीं आते। 
      वहीँ, मुस्लिम धार्मिक लोग जिसे हम मुस्लिम आतंकवादी कहते हैं, वो बिना अखाड़े में प्रदर्शन किये सीमा पार कर भारत से लड़ने आते हैं।
      यही फर्क है हिन्दू एवं मुस्लिम धर्म के पैरोकार का।
      Only 3% Brahminic religion was taken it's fold to all Indians in the name of hindu.
      In fact , Brahimins are invaders of Eurasia, who destroyed our rich traditions and imposed waste cultural practices in the name of rituals and generated many nonscientific books like ramayan, ved, ramayan, upnishad etc. That's why India was unable to innovate any things.
        धार्मिक झूठी कहानी को अगर जस्टिफाई करते हैं तो समझ आती है कि क्या बन्दर पढ़ कर पत्थर पर लिख सकते हैं। जो हनुमान पृथ्वी से कई गुणा सूर्य को निगल गया उसे समुद्र पार करने के लिए पुल की क्या आवश्यकता। सभी बकवास है। 
           सूर्पनखा एक महिला का नाक काटना एवं होलिका का प्रत्येक साल दहन करना क्या नारी के साथ घृणित अपमान नहीं है, चाहे दोष कितना भी हो?
         वहीँ नीच जाति के नाम शूरवीर धनुर्धर एकलव्य का अंगूठा काटने वाले द्रोणाचार्य के नाम पर अवार्ड क्या एक्सट्रीम ब्रह्मिनिज्म की पराकाष्ठा नहीं है?
         Be rational, scientific and secular
          All Religious nations are destroyed in itself, only scientific nations survive.
     Mythology itself explain myth यानि झूठ का स्टडी। इसे सत्य मानना क्या बेवकूफी नहीँ है।
            मैं सुना था, नासा ने सरस्वती नदी एवं पुष्पक बिमान इत्यादि खोज लिया है, पर सोर्स देखा तो समझ गया ये आरएसएस द्वारा फेका गया है, नासा द्वारा नहीं।
     कुछ दिन पहले न्यूज आया गुजरात के गिर गाय के गोबर एवं मूत्र में सोना पाया जाता है। तो फिर भैस में क्यों नहीं? जब वही भोजन भैंस भी खाती है।
  सब बकवास है, सिर्फ धार्मिक fervour बढ़ाने के लिये।
            हमें बताया गया गाय के दूध से दिमाग पतला होता है एवं भैस के दूध से मोटा, पर सब झूठ।
  भैंस के दूध में 18% सॉलिड है जबकि गाय में 12% सॉलिड एवं 88% पानी। यानि भैस के दूध में गाय से डेढ़ गुना ज्यादा nutrients है तो कौन फायदेमंद होगा?
   खुद सोंचे?
  चुकि आर्य गाय लेकर आये थे, पर भैस भारत जैसे गर्म प्रदेश का जानवर है, इसीलिए इस पर अनेकों कहानियां बनाई गई। यमराज की सवारी, भैंस के आगे बिन बजाये। भैस का दूध अपवित्र पूजा में प्रयोग युक्त नहीं।
  ये सब मूलनिवासी को हतोत्साहित करने का आडम्बर।
         यहाँ बौद्दिस्ट धर्म के खिलाफ इनके पवित्र पीपल पर हांडी टँगवाया एवं भुत का अड्डा बनाया, पवित्र मुंडन को अगदेवा मुंडन। इनके दार्शनिक गुरु घण्टाल को ठग इत्यादि।
      राम रावण कहानी भी ब्राह्मणों एवं मूलनिवासी बौद्दिस्टों की लड़ाई ही है।
             अगर देव एवं राक्षस अलग होते तो इनके फॉसिल्स जरूर मिलते, जैसे क्रोमग्नन एवं निएंडरथल मैन के मिले हैं। फिर रावण ब्राह्मण था, तो राक्षस कैसे है? 
   बहुत से ऐसे तुलसीदास जी फेंके हैं , जिसे कुछ लोग सत्य मान लेते हैं। ये बनावटी कहानी है सिर्फ इंटरटेनमेंट के लिये।
      कहते हैं रावण 100 भाई था इसके 10 सिर थे। कौरव भी 100 भाई। इन दोंनो में दो जीरो है। जीरो का खोज आर्यभट्ट 5वी सदी में किया था। तो रामायण महाभारत की घटना 5वी सदी बाद हुई होगी जिस ज़ीरो द्वारा गिना गया। तो इसे ईसा से भी पहले क्यों मानते हैं? बहूत चीजें तर्क पर नहीँ टिकते।
          गरुड़ पुराण जिसे ईसा से पुराना माना जाता है, इसमें लिखित है संकट होने पर छाता एवं जुता ब्राह्मणों को दान करने पर समस्या खत्म।
          छाता एवं जूता 17वी सदी में चीन में अविष्कार हुआ तो फिर ये किताब इनके बाद ही लिखी गयी। 
      प्रिंटिंग प्रेस एवं पेपर का अविष्कार भी 15वी सदि बाद हुई है तो सभी किताबें इसके बाद लिखी गयी है, पर इसे ईसा पहले यानि 2100 साल से भी पहले का बताया जाना क्या लोगों के इमोशन के साथ चीटिंग नहीं है?   हिस्ट्री एवं मिथ दोनों को एक मे मिलाया नहीँ जा सकता। 
  हड़प्पा हिस्ट्री है, क्योंकि इसका एविडेन्स है। पत्थर का इंस्ट्रूमेंट, टूल्स, कॉइन्स, अर्चिटेक्चर, लिपि इत्यादि।    
               पर, मिथॉलजी सिर्फ इंटरटेनमेंट है जैसे डोरेमोन की कहानी बच्चे देखते हैं।
        अतः, धर्म ओपियम एवं खास लोगों का बिजनस है इसे समझें। 

                 *डॉ निराला*

 1918 में पहली बार इस्तेमाल हुआ 'हिन्दू धर्म' शब्द :

तुलसीदास ने रामचरित मानस मुगलकाल में लिखी, पर मुगलों की बुराई में एक भी चौ!!!पाई नहीं लिखी.

क्यों?

क्या उस समय हिंदू मुसलमान का मामला नहीं था? हां, उस समय हिंदू मुसलमान का मामला नहीं था क्योंकि उस समय हिंदू नाम का कोई धर्म ही नहीं था.

तो फिर उस समय कौनसा धर्म था?

उस समय ब्राह्मण धर्म था और ब्राह्मण मुगलों के साथ मिलजुलकर रहते थे, यहाँ तक कि आपस में रिश्तेदार बनकर भारत पर राज कर रहे थे. उस समय वर्ण व्यवस्था थी. वर्ण व्यवस्था में शूद्र अधिकार-वंचित था, जिसका कार्य सिर्फ सेवा करना था. मतलब सीधे शब्दों में गुलाम था.

तो फिर हिंदू नाम का धर्म कब से आया?

ब्राह्मण धर्म का नया नाम हिंदू तब आया जब वयस्क मताधिकार का मामला आया. जब इंग्लैंड में वयस्क मताधिकार का कानून लागू हुआ और इसको भारत में भी लागू करने की बात हुई.

इसी पर तिलक ने बोला था, "क्या ये तेली तम्बोली संसद में जाकर तेल बेचेंगे? इसलिए स्वराज इनका नहीं मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है. हिन्दू शब्द का प्रयोग पहली बार 1918 में इस्तेमाल किया गया.

तो ब्राह्मण धर्म खतरे में क्यों पड़ा?

क्योंकि भारत में उस समय अँग्रेजों का राज था, वहाँ वयस्क मताधिकार लागू हुआ तो फिर भारत में तो होना ही था.

ब्राह्मण 3.5% हैं. अल्पसंख्यक हैं. राज कैसे करेंगे?

ब्राह्मण धर्म के सारे ग्रन्थ शूद्रों के विरोध में, मतलब  हक/अधिकार छीनने के लिए, शूद्रों की मानसिकता बदलने के लिए षड़यंत्र का रूप दिया गया.

आज का ओबीसी ही ब्राह्मण धर्म का शूद्र है. SC (अनुसूचित जाति)) के लोगों को तो अछूत घोषित करके वर्ण व्यवस्था से बाहर रखा गया था, क्योंकि उन्होंने ही यूरेशियन आर्यों से सबसे ज्यादा संघर्ष किया था.

ST (अनुसूचित जनजाति) के लोग तो जंगलों में थे उनसे ब्राह्मण धर्म को क्या खतरा? उनको तो यूरेशियन आर्यों के सिंधु घाटी सभ्यता से संघर्ष के समय से ही वन में जाकर रहने पर मजबूर किया. उनको वनवासी कह दिया.

ब्राह्मणों ने षड़यंत्र से हिंदू शब्द का इस्तेमाल किया जिससे सबको समानता का अहसास हो.

पर ब्राह्मणों ने समाज में व्यवस्था ब्राह्मण धर्म की ही रखी. उसमें जातियां रखीं. जातियां ब्राह्मण धर्म का प्राण तत्व हैं, इनके बिना ब्राह्मण का वर्चस्व खत्म हो जायेगा.

इसलिए उस समय हिंदू मुसलमान की समस्या नहीं थी. ब्राह्मण धर्म को जिंदा रखने के लिए वर्ण व्यवस्था थी. उसमें शूद्रों को गुलाम रखना था.

इसलिए

तुलसीदास ने मुसलमानों के विरोध में नहीं शूद्रों के विरोध में शूद्रों को गुलाम बनाए रखने के लिए लिखा.

ढोल गंवार शूद्र पशु नारी।
ये सब ताड़न के अधिकारी।।

अब जब मुगल चले गये, देश में SC/ST/OBC के लोग ब्राह्मण धर्म के विरोध में ब्राह्मण धर्म के अन्याय अत्याचार से दुखी होकर इस्लाम अपना लिया तो ब्राह्मण अगर मुसलमानों के विरोध में जाकर षड्यंत्र नहीं करेगा तो SC/ST/OBC  के लोगों को प्रतिक्रिया से हिंदू बनाकर, बहुसंख्यक लोगों का हिंदू के नाम पर ध्रुवीकरण करके अल्पसंख्यक ब्राह्मण बहुसंख्यक बनकर राज कैसे करेगा?

इसलिए आज हिंदू मुसलमान कि समस्या देश में खड़ी कि गई है तथाकथित हिंदू (SC ST OBC) मुसलमान से लड़ें, मरें.

क्या कभी आपने सुना है कि किसी दंगे में कोई ब्राह्मण मरा हो? जहर घोलनें वाले कभी जहर नहीं पीते हैं.

इसलिए, यूरेशियन ब्राह्मण सदैव सुरक्षित. कोई दर्द नहीं कोई फर्क नहीं, आराम से टीवी में डिबेट के लिये तैयार !

भारत नागरिक स्थान

भारत का प्रथम नागरिक राष्ट्रपति होता हैं और 27वें नागरिक भारत की जनता, जानिए इसके बीच कौन-कौन आता है !*


हाल ही में बीजेपी पार्टी की तरफ से उम्मीदवार रामनाथ कोविंद भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में चुने गये थे. भारत के संविधान के अनुसार भारत का राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक होता है और आम जनता 27वें स्थान पर है, तो इस बीच किनका नंबर आता है ? आपको बता दें भारत के संविधान के अनुसार एक पूरी लिस्ट तैयार की गयी है जिसमें यह बताया गया है कि पहले स्थान पर कौन है और उसके बाद 27वें स्थान तक कौन-कौन है.


चलिए आपको पूरी लाइट दिखाते हुए बताते हैं किसका कौनसा स्थान है.

*भारत का पहला नागरिक– देश का राष्ट्रपति*

देश के राष्ट्रपति को पहला स्थान दिया गया है. यह परम्परा बहुत पुरानी है. इस समय भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद हैं.

*2th नागरिक– देश का उप राष्ट्रपति*

इस समय भारत के उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू जी हैं

*3th नागरिक– प्रधानमंत्री*

इस समय भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी हैं

*4th नागरिक– राज्यपाल* (संबंधित राज्यों के सभी)

*5th नागरिक– देश के पूर्व राष्ट्रपति, 5th A – देश का उप प्रधानमंत्री*


*6th नागरिक–* भारत का मुख्य न्यायधीश, लोकसभा का अध्यक्ष,इस समय भारत में  दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर भारत के 44वें मुख्य न्यायाधीश हैं

*7th नागरिक–* केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, मुख्यमंत्री (संबंधित सभी राज्यों के), योजना आयोग के उपाध्यक्ष (वर्तमान ने नीति आयोग), पूर्व प्रधानमंत्री, राज्यसभा और लोकसभा में विपक्ष का नेता, *7th ए–* भारत रत्न पुरस्कार विजेता.

*8th नागरिक–* भारत में मान्यता प्राप्त राजदूत, मुख्यमंत्री (संबंधित राज्यों से बाहर के) गवर्नर्स (अपने संबंधित राज्यों से बाहर के)

*9th नागरिक–* सुप्रीम कोर्ट के जज, 9th A– यूनियन पब्लिक सर्सिस कमिशन (यूपीएससी) के चेयरपर्सन, चीफ इलेक्शन कमिशनर, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक.

*10th नागरिक–* राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन, डिप्टी चीफ मिनिस्टर्स, लोकसभा के डिप्टी स्पीकर, योजना आयोग के सदस्य (वर्तमान में नीति आयोग), राज्यों के मंत्री (सुरक्षा से जुड़े मंत्रालयों के अन्य मंत्री)

*11th नागरिक–* अटर्नी जर्नल (एजी), कैबिनेट सचिव, उप राज्यपाल (केंद्र शासित प्रदेशों के भी शामिल)

*12th नागरिक–* पूर्ण जनरल या समकक्ष रैंक वाले कर्मचारियों के चीफ

*13th नागरिक–* राजदूत ,असाधारण और पूर्ण नियोक्ता जो कि भारत में मान्यता प्राप्त हैं.

*14th नागरिक–* राज्यों के चेयरमैन और राज्य विधानसभा के स्पीकर (सभी राज्य शामिल), हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस (सभी राज्यों की पीठ के जज शामिल)

*15th नागरिक–* राज्यों के कैबिनेट मिनिस्टर्स (सभी राज्यों के शामिल), केंद्र शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, दिल्ली के मुख्य कार्यकारी काउंसिलर (सभी केंद्र शासित राज्य) केंद्र के उपमंत्री

*16th नागरिक–* लेफ्टिनेंट जनरल या समकक्ष रैंक का पद धारण करने वाले स्टाफ के प्रमुख अधिकारी.

*17th नागरिक–* अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष, अनुसूचित जाति के राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष, अनुसूचित जनजाति के राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश (उनके संबंधित न्यायालय के बाहर), उच्च न्यायालयों के पीयूज न्यायाधीश (उनके संबंधित अधिकार क्षेत्र में)

*18th नागरिक–* राज्यों (उनके संबंधित राज्यों के बाहर) में कैबिनेट मंत्री, राज्य विधान मंडलों के सभापति और अध्यक्ष (उनके संबंधित राज्यों के बाहर), एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार आयोग के अध्यक्ष, उप अध्यक्ष और राज्य विधान मंडलों के उपाध्यक्ष (उनके संबंधित राज्यों में), मंत्री राज्य सरकारों (राज्यों में उनके संबंधित राज्यों), केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री और कार्यकारी परिषद, दिल्ली (उनके संबंधित संघ शासित प्रदेशों के भीतर) संघ शासित प्रदेशों में विधान सभा के अध्यक्ष और दिल्ली महानगर परिषद के अध्यक्ष, उनके संबंधित केंद्र शासित प्रदेशों में।

*19th नागरिक–* संघ शासित प्रदेशों के मुख्य आयुक्त, उनके संबंधित केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यों के उपमंत्री (उनके संबंधित राज्यों में), केंद्र शासित प्रदेशों में विधान सभा के उपाध्यक्ष और मेट्रोपॉलिटन परिषद दिल्ली के उपाध्यक्ष

*20th नागरिक–* राज्य विधानसभा के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन (उनके संबंधित राज्यों के बाहर)

*21th नागरिक–* सांसद सदस्य

*22th नागरिक–* राज्यों के डिप्टी मिनिस्टर्स (उनके संबंधित राज्यों के बाहर)

*23th नागरिक–* आर्मी कमांडर, वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ और इन्हीं की रैंक के बराबर के अधिकारी, राज्य सरकारों के मुख्य सचिव, (उनके संबंधित राज्यों के बाहर), भाषाई अल्पसंख्यकों के आयुक्त, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आयुक्त, अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य, अनुसूचित जातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग के सदस्य, अनुसूचित जनजाति के लिए राष्ट्रीय आयोग के सदस्य

*24th नागरिक–* उप राज्यपाल रैंक के अधिकारी या इन्हीं के समक्ष अधिकारी

*25th नागरिक–* भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव

*26th नागरिक–* भारत सरकार के संयुक्त सचिव और समकक्ष रैंक के अधिकारी, मेजर जनरल या समकक्ष रैंक के रैंक के अधिकारी

*27th नागरिक–* *भारत के सत्ताईसवें नागरिक आम इंसान होते हैं जैसे की आप और हम !!*




 🇭🇷 रामनाथ कोविंद – राष्ट्रपति
• 🇭🇷 वेंकैया नायडू– उपराष्ट्रपति
•🇭🇷 सुमित्रा महाजन – अध्यक्ष, लोक सभा
•🇭🇷 एम. थंबीदुरई – उपाध्यक्ष, लोक सभा
•🇭🇷 वेंकैया नायडू– सभापति, राज्यसभा
• 🇭🇷पी. जे. कुरियन – उपसभापति, राज्यसभा
• 🇭🇷नरेन्द्र मोदी – अध्यक्ष, नीति (NITI) आयोग
•🇭🇷 अरविंद पनगड़िया – उपाध्यक्ष, नीति (NITI) आयोग
• 🇭🇷डॉ. विजय केलकर – अध्यक्ष, 13वां वित्त आयोग
•🇭🇷 वाई. वी. रेड्डी – अध्यक्ष, 14वां वित्त आयोग
• 🇭🇷पी. वी. रेड्डी – अध्यक्ष, 19वां विधि आयोग
• ए. पी. शाह – अध्यक्ष, 20वां विधि आयोग
• 🇭🇷मुकुल रोहतगी – महान्यायवादी
• 🇭🇷रंजीत कुमार – भारत के महा–अधिवक्ता
• 🇭🇷डॉ. आर. चिदंबरम – भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार
• 🇭🇷अजीत कुमार डोभाल – राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
• 🇭🇷अजीत सेठ – कैबिनेट सचिव
• 🇭🇷एस. जयशंकर – विदेश सचिव
• 🇭🇷अशोक कुमार मुखर्जी – संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के स्थायी प्रतिनिधि
• 🇭🇷शेखर सेन – अध्यक्ष, संगीत नाटक अकादमी
• 🇭🇷के .के. चक्रवर्ती – अध्यक्ष, ललित कला अकादमी
•🇭🇷 वी. पी. तिवारी – अध्यक्ष, साहित्य अकादमी
• 🇭🇷आर. के. श्रीवास्तव – चेयरमैन, भारतीय विमानपत्तनम प्राधिकरण (AAI)
•🇭🇷 रत्न कुमार सिन्हा – अध्यक्ष, परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC)
• 🇭🇷एस. एस. बजाज – अध्यक्ष, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB)
• 🇭🇷एस. एस. मंथा – अध्यक्ष, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE)
•🇭🇷 प्रफुल पटेल – अध्यक्ष, अखिल भारतीय फुटबॉल परिसंघ (AIFF)
• 🇭🇷रोहित नंदन – अध्यक्ष, एयर इंडिया (AI)
• 🇭🇷गौतम सेन गुप्ता – महानिदेशक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI)
• 🇭🇷सुनील कानोरिया – अध्यक्ष, एसोसिएटेड चैबर्स ऑफ कामर्स एंडइंडस्ट्रीज ऑफ इंडिया (ASSOCHAM)
• 🇭🇷शेखर बसु – निदेशक, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC)
• 🇭🇷जगमोहन डालमिया – अध्यक्ष, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI)
• 🇭🇷अनुपम श्रीवास्तव – अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी), भारत संचार निगम लि. (BSNL)
•🇭🇷 शशिकांत शर्मा – नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)
• 🇭🇷अनिल कुमार सिन्हा – निदेशक, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)
• 🇭🇷विनीत जोशी – अध्यक्ष, सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन (CBSE)
• 🇭🇷अनिता कपूर – अध्यक्ष, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT)•
• 🇭🇷नजीब शाह– अध्यक्ष, केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBEC)
•🇭🇷 पहलाज निहलानी – अध्यक्ष, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC)
• 🇭🇷नंदिता दास – अध्यक्ष, भारतीय बाल फिल्म सोसाइटी (CFSI)
• 🇭🇷आरके माथुर – मुख्य सूचना आयुक्त (CIC)
• डॉ. नसीम जैदी – मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC)
🇭🇷• अजय. एस. श्रीराम – अध्यक्ष, भारतीय उद्योग परिसंघ (CII)
•🇭🇷 टी.एस. ठाकुर– सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (CJI)
🇭🇷• डी. आर. देशमुख – अध्यक्ष, कंपनी लॉ बोर्ड (CLB)
• 🇭🇷एम. ओ. गर्ग – महानिदेशक, औद्योगिक एवं वैज्ञानिक अनुसंधान परिषद् (CSIR)
•🇭🇷 प्रेमा करियप्पा – अध्यक्ष, केंद्रीय सामाजिक कल्याण बोर्ड (CSWB)
• 🇭🇷राजीव – (कार्यवाहक) केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC)
🇭🇷• अश्विन पांड्या – अध्यक्ष, केंन्द्रीय जल आयोग (CWC)
🇭🇷• मंगू सिंह – प्रबंधक निदेशक, दिल्ली मैट्रो रेलवे कॉरपोरेशन (DMRC)
🇭🇷• आर. के. माथुर – अध्यक्ष, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)
•🇭🇷 हर्षवर्धन नेओतिया – अध्यक्ष, फिक्की (FICCI)
• अशोक कुमार रॉय – अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (GIC)
•🇭🇷 निशी वासुदेवा – अध्यक्ष, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL)
• दिनेश्वर शर्मा – डायरेक्टर, गुप्तचर ब्यूरो (IB)
• 🇭🇷टी. एम. भसीन – अध्यक्ष, इंडियन बैंकस् एसोसिएशन (IBA)
• के. रघु – अध्यक्ष, भारतीय चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI)
• 🇭🇷एस. अयप्पन – महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
• बासुदेव चटर्जी – अध्यक्ष, भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद् (ICHR)
•🇭🇷 एम. एस. राघवन – भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (IDBI)
• एम. असलम – कुलपति, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU)
•🇭🇷 एन. रामचंद्रन – अध्यक्ष, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA)
• बी. अशोक – अध्यक्ष, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC)
• टी. एस. विजयन – इंश्योरेंस रेगूलेटरी एंड डवलपमेंट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI)
🇭🇷• ए. एस. किरण कुमार – अध्यक्ष, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
🇭🇷• एस. के. रॉय – अध्यक्ष, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC)
•🇭🇷 ए. के. गर्ग – अध्यक्ष, महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL)
• 🇭🇷हर्षकुमार भनवाला – अध्यक्ष, नाबार्ड (NABARD)
• अंशुमन दास – अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO)
•🇭🇷 के. के. नटराजन – चेयरमैन, नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंडसर्विस कंपनीज (NASSCOM)
• आर. चन्द्रशेखर – अध्यक्ष, नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड संर्विस कंपनीज (NASSCOM)
🇭🇷• वी. एश्वरैया – अध्यक्ष, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC)
• डी. के. जैन – अध्यक्ष, राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC)
• 🇭🇷प्रवीन सिनक्लेयर – निदेशक, रास्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCERT)
• वजाहत हबीबुल्लाह – अध्यक्ष, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM)
• पी. एल. पुनिया – अध्यक्ष, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC)
🇭🇷• रामेश्वर ओरॉन – अध्यक्ष, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)
• 🇭🇷ललिता कुमारमंगलम – अध्यक्ष, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)
• टी. नंदा कुमार – सभापति, राष्ट्रीय डेयरी विकास परिषद (NDDB)
• बी. एन. किरपाल – अध्यक्ष, राष्ट्रीय वन आयोग (NFC)
• रमेश सिप्पी – अध्यक्ष, नेशनल फिल्म डवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC)
•🇭🇷🇭🇷 आर. वी. सिंह – अध्यक्ष, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)
• आर. एस. टी. साई – अध्यक्ष, राष्ट्रीय जलविद्युत ऊर्जा निगम (NHPC)
• 🇭🇷के. जी. बालकृष्णन – अध्यक्ष, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)
• शरद कुमार – महानिदेशक, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA)
• अरुप राय चौधरी – अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एनटीपीसी (NTPC)
• एस. के. श्रीवास्तव – अध्यक्ष, ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL)
• डी. के. सर्राफ – अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC)
• सी. के. प्रसाद – अध्यक्ष, भारतीय प्रेस परिषद (PCI)
•🇭🇷🇭🇷 महेन्द्र मोहन गुप्त – अध्यक्ष, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI)
🇭🇷• राजेन्द्र खन्ना – निदेशक, रिसर्च एंड अनालिसिस विंग (RAW)
• ए. के. मित्तल – चेयरमैन, रेलवे बोर्ड (RB)
🇭🇷🇭🇷• रघुराम गोबिन्द राजन – गवर्नर, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI)
• सी. एस. वर्मा – अध्यक्ष, स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL)
🇭🇷• अरूंधती भट्टाचार्य – चेयरमैन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
🇭🇷• यू. के. सिन्हा – अध्यक्ष, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI)
• 🇭🇷अमित्व भट्टाचार्य – अध्यक्ष, कर्मचारी चयन आयोग (SSC)
•🇭🇷 राजीव खुल्लर – अध्यक्ष, भारतीय दूरसंचार नियंत्रण प्राधिकरण (TRAI)
•🇭🇷 वेदप्रकाश तोमर – अध्यक्ष, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC)
• 🇭🇷दीपक गुप्ता – अध्यक्ष, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)
• जनरल दलबीर सिंह सुहाग – थल सेनाध्यक्ष
• एडमिरल आर. के. धोवन – जल सेनाध्यक्ष
• एयर चीफ मार्शल अरूप राहा – वायु सेनाध्यक्ष
🇭🇷  °डी. के. पाठक – महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल (BSF)
🇭🇷• अरविंद राजन – महानिदेशक, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF)
🇭🇷• प्रकाश मिश्रा महानिदेशक, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF)
🇭🇷• वंशीधर शर्मा – महानिदेशक, केंद्रीय सशस्त्र सीमा बल (SSB)
• कृष्णा चौधरी – महानिदेशक, भारत–तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP)
• जयंतो नारायण – महानिदेशक, राष्ट्रीय सुरक्षा गाड्र्स (NSG)
• 🇭🇷वाइस एडमिरल ए. जी. थपलियाल – महानिदेशक, भारतीय तटरक्षक बल(ICG)
🇭🇷• अनिरुद्ध चक्रवर्ती – महानिदेशक राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC)📘संयुक्त राष्ट्र संघ

तीन तलाक

*सुप्रीम कोर्ट का तीन तलाक पर बड़ा फैसला- 6 महीने की रोक, केंद्र से कानून बनाने को कहा*

 तीन तलाक के विवादास्पद मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कानून बनाने को कहा है. मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ इस बारे में फैसला सुनायेगी कि तीन तलाक मूल इस्लामी कानून का हिस्सा है या नहीं. संविधान पीठ को यह मामला गत मई में सौंपा गया था. पीठ के अन्य न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति यू यू ललित तथा न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान लगातार छह दिन तक इस मामले पर सुनवाई करने के बाद पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. उसने मुस्लिम महिलाओं की सात याचिकाओं पर सुनवाई की, जिनमें तीन तलाक की वैधता को चुनौती दी गयी है.
केन्द्र सरकार ने पीठ के समक्ष कहा है कि यदि न्यायालय तीन तलाक को अवैध और असंवैधानिक पाता है तो वह मुस्लिम समुदाय में विवाह और तलाक के नियमन के लिए एक कानून बनाएगा.
सुनवाई के दौरान न्यायालय यह स्पष्ट कर चुका है कि वह सिर्फ इस बात पर निर्णय देगा कि क्या तीन तलाक मुस्लिम समुदाय के मूलभूत इस्लामी कानून का हिस्सा है न कि बहुविवाह पर.
इस मामले की शुरुआत तब हुई थी जब उत्तराखंड के काशीपुर की शायरा बानो ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर तीन तलाक और निकाह हलाला के चलन की संवैधानिकता को चुनौती दी थी. बतादे कि
तीन तलाक पर सुनवाई करने वाली पीठ में 5 अलग-अलग धर्मों के जज थे. जिसमें सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जे एस खेहर सिख समुदाय से हैं, तो जस्टिस कुरियन जोसेफ ईसाई हैं. आर.एफ नरीमन पारसी हैं तो यू.यू.दलित हिंदू और अब्दुल नजीर मुस्लिम समुदाय से हैं.....


 *तिन तलाक बंद* *
     *होने पर देश में होंगे ये बड़े परिवर्तन*
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अगर मुसलमान तीन तलाक  कहना बंद कर दे तो
►गैस सिलडंर Rs 175 का हो जाएगा
►पेट्रोल 18/ली हो जाएगा
►GDP लगभग 8 हो जाएगी
►किसान अात्मा हत्या करना बंद कर देगें
►डॉलर रुपये के मुकाबले 25 का हो जाएगा
►दहेज के नाम पर होने वाली हत्या भी बंद जाएगी
►कोख मे पलने वाली बेटी की हत्या भी बंद जाएगी
►भारत विकासशील की जगह विकसित देश हो जाएगा
►सब बेरोजगार को रोजगार मिल जाए
* लोकपाल लागू हो जायेगा।
* पकिस्तान से 10 सर आना सुरु हो जायेंगे।
* सबके खाते में 15 लाख पोहोच जायेंगे।
* गंगा नदी साफ़ हो जाएँगी ।
* विदेश से कालाधन वापस ले आएंगे जो के तिन तलाक के कारन अटका हुआ पड़ा है।
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NEWS चैनल पर डिबेट देख कर तो यही लगता है,
भारत की हर समस्या की जड तीन तलाक ही है ।

पुलिस एक्ट

ऐसा राजतन्त्र

जिसे हम लोकतान्त्रिक प्राणी तानाशाही कहते है।

मैं भी तानाशाही में यकीन नही रखता था।

लेकिन अगर देखें तो तानाशाही ने दुबई को जन्नत बना दिया।

100 % रोजगार।

विश्व की सबसे अच्छी कानून व्यवस्था।

विश्व स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं , हर किसी के लिए।

करप्शन फ्री देश।

न्यूनतम रिश्वतखोरी।

विश्वस्तर की हर सुविधा।

न्यूनतम नशाखोरी।

कानून तक हर किसी की पहुँच।

बलात्कार की एक नाकाम कोशिश आखिरी बार 2007 में हुई थी।

 आरोपी पठान अगले शुक्रबार को चौराहे पे लटकता हुआ पाया गया था।

एक बैंक डकैती हुई थी (नाकाम ) 2005 में।

सब के सब आरोपियों को गोली मार दी गयी थी।

ज्यादातर शो रूम्स में कांच की ही दीवारें होती है।

लोहे के भरी भरकम शटर नही।

किसी भी पब्लिक ऑफिस में आप लाइन नही लगा सकते ,

अपनी आटोमेटिक अपॉइंटमेंट पर्ची लो और सोफे पे बैठकर इंतज़ार करो।

आपका नंबर बोलकर बुलाया जायेगा।

रोड एक्सीडेंट होने पे चंद ही मिंटो में एम्बुलेंस ,

फिर पुलिस ,

 सिविल डिफेन्स।

और अगर जरूरत पड़े तो

 हेलीकाप्टर एम्बुलेंस भी हाजिर।

आधी रात को भी पश्चिमी औरतें स्कर्ट में घूमती है

 लेकिन क्या मजाल कि कोई छेड़छाड़ हो जाये।

999 में बस फोन घुमा दो।

फोन काटने से पहले ही पुलिस हाजिर।

ये वो देश है

जहाँ का राष्ट्रपति भी बिना सुरक्षा के अकेला निकल जाता है।

ये वो देश है जहाँ लोग अपने मुल्क को अपना मुल्क समझते है।

पुलिस न भी मौजूद हो

लेकिन अगर आप कुछ भी गलत करते हुए पकड़े गए तो आपकी खैर नही।

यहाँ के निवासी इस मुल्क की हर चीज को अपनी पर्सनल प्रॉपर्टी मानते है और उ
सका ख्याल रखते है।

और एक हमारा कथित लोकतंत्र है

 की खामिया ही खामिया।

आँखे बंद करके सोचना शुरू करदो।

अब साला दिल कहता काश ये सिस्टम भारत में भी होता।

 लोकतंत्र तो एक ढकोसला है।

हर पांच साल बाद एक लोल्लिपोप थमा देते है

और खुद नेता लोगो का खून चूसते है।
😳😳
कुछ सत्य पर कडवे सच
☺☺☺

1. भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जो अपने देश में बैठे गद्दारो पर कोई कार्यवाही नहीं करता....
😊😊😊

2. भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है. जहाँ अल्पसंख्यक समुदाय बहुसंख्यकँ समुदाय पर अत्याचार करता है....
😊😊😊

3. भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है. जिसमें सरहद पर तैनात सिपाही को एकसाल तक छुट्टी नहीं मिलती. लेकिन जेल में बंद संजय दत्त को हर 2 महीने से पैरोल पर छुट्टी मिल जाती है.....
😊😊😊

4. भारत दुनिया का ऐसा देश है, जहाँ लाखों अरबो का घोटाला करने वाले आजाद घूमते है. लेकिन जिसपे आरोप साबित नहीं हुआ है कैंसर पीडित ऐसी साध्वी को जेल मे रखते है
😊😊😊

5. भारत ऐसा देश है, जहाँ आतंकवादियों और बलात्कारियों के मानवाधिकारो के लिए लड़ने वाले मिल जाते है. लेकिन आतंकवादियों के हमलों में मरने वालों के लिए कोई मानवाधिकार की बात नहीं करता.....
😊😊😊

6. भारत ऐसा देश है जहां हिरन का शिकार करने पर कडी सजा का प्रावधान है लेकिन गौमाता जिसे हिन्दू मां मानते है की हत्या पर सब्सिडी दी जाती है
😊😊😊

7. भारत के सेकुलर नेता ऐसे है, जो आतंकवादियों को सम्मान देते है और राष्ट्रवादीयों को गालियां देते है....
😊😊😊

. 8. भारत दुनिया का ऐसा देश है, जहाँ बाहरी घुसपैठियों का घर बैठे राशन कार्ड और वोटर कार्ड बन जाते है. लेकिन इन सब के लिए चक्कर काटते काटते अपने देश के आम नागरिक की चप्पल घिस जाती है......
😊😊😊

9. भारत दुनिया ऐसा देश है जहां पांचवी पास आदमी एक स्कूल का चपरासी तो नही बन सकता लेकिन नेता बन सकता है
😊😊😊

10. भारत दुनिया का ऐसा देश है जहां के इतिहास मे भगतसिंह को आतंकवादी और भारत पर हमला करने वाले  अकबर और सिकन्दर को महान बताया गया है
😊
👆   कृपया आगे भेजकर अपने भारतीय होने का फर्ज निभाये. 🙏

🇧🇴भारत माता कि जय💪


आपने बहुत अच्छा निर्णय लिया लेकिन यह तब और g अच्छा होता जब आपने एक बार यह जानने की कोशिश की होती की भर्ती फिट किए गए तो अनफिट हुए कैसे...... मैं बताता हूं इन्हें आपकी नीतियों ने आपके फरमानों ने इस कदर बेबस और लाचार बनाया कि यह लाख चाहकर भी खुद को फिट नहीं रख सके ! खैर आपने तो बता दिया कि एक समिति बनाई जाएगी और वह पैनलिस्ट करके अनफिट पुलिसकर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा !

हुजूर कभी आपने ऐसी समिति भी बनाने की बात की जो इन पुलिसकर्मियों के ड्यूटी टाइम, वेलफेयर, वेतन विसंगति आदि के विषय में अपनी रिपोर्ट पेश करें..... और अगर पिछले समय में किसी समिति द्वारा कोई रिपोर्ट पेश की गई तो उस पर क्या कार्यवाही हुई ! खैर आपकी नजर में तो माननीय सुप्रीम कोर्ट भी कुछ नहीं है उनके भी आदेशों को आज तक लागू करना उचित नहीं समझा गया जो उन्होंने पुलिस सुधार एक्ट के रूप में निर्देशित किया था !

कभी आपने सोचा कम से कम 18 से 20 घंटे ड्यूटी करने वाला पुलिसकर्मी अपने को कैसे फिट रख पाएगा!  पुलिस विभाग को छोड़कर....... जिसमें खासकर कांस्टेबल पुलिसकर्मी जो 18 से 20 घंटे ड्यूटी करता है, और कोई ऐसा विभाग जो 18 से 20 घंटे ड्यूटी करता हो..... और हां अगर इतनी ड्यूटी उस विभाग के द्वारा जैसे कि रेलवे या सरकारी हॉस्पिटल इमरजेंसी वार्ड करते भी हैं तो 3 चरणों में उन्हें 8 घंटे की ड्यूटी के बाद 16 घंटे रेस्ट मिलता है !

लेकिन पुलिस के साथ ऐसा कुछ भी नहीं आइए किसी दिन किसी पुलिसकर्मी के साथ किसी चौराहे पर चिलचिलाती धूप एवं भड़कती पब्लिक के बीच किसी पॉइंट पर 8 घंटे बराबर खड़े रह कर देखिए उस दिन के बाद सफेद कुर्ता पायजामा पहनना भूल जाएंगे ! ट्रैफिक के दुरुस्त आवागमन के लिए अगर कोई पुलिसकर्मी आपको किसी चौराहे पर 2 मिनट के लिए रोक देता है तो आप अपनी एयर कंडीशन कार में बैठे बैठे उसको गाड़ी रुकवाने के बदले वर्दी उतरवाने की धमकी देते हैं ! क्या इसके लिए अभी कोई समिति बनेगी............

 अभी तक इस तरह के जितने वीडियो है उन पर आपने क्या कार्यवाही की अगर यही वीडियो किसी पुलिसकर्मी के आए होते तो आप पता नहीं  क्या किए होते ! एक समिति इसके लिए भी बनाओ........... जो वीडियो पर कार्यवाही करें चाहे वह पुलिस का हो या नेता का.......

 एक समिति ऐसी बनाओ जो यह देखें एक पुलिसकर्मी जिसको साइकिल भत्ता दिया जाता है और अपेक्षा की जाती बुलेट ट्रेन की तरह काम करें ! हर घटना पर अपेक्षा की जाती है कि वह 5 मिनट में पहुंचे.... आपने कौन से संसाधन मुहैया कराए जिससे हम 5 मिनट में पहुंच जाएं वह मेरी व्यक्तिगत मोटरसाइकिल होती है और मेरा जेब के पैसे का पेट्रोल पड़ता है तब मैं 5 मिनट में पहुंचता हूं !
 एक समित उसके लिए भी बनाओ.....

 बाहर के मुलजिम गैर जिला गैर प्रदेश ले जाने पड़ते हैं जिनके साथ पुलिसकर्मी स्वयं का व मुलजिम का यात्रा खर्चा, खाना खर्चा स्वयं वहन करता है ! जो कि उसे तुरंत देना पड़ता है और उसका टीए-डीए 3 साल 4 साल बाद किस तरह आधा-अधूरा मिलता है जिसमें कि केवल पुलिसकर्मी का.........ना कि उस मुलजिम पर खर्च किए गए खाना खुराक का ! एक समिति इसके लिए भी बनाओ....

 पुलिसकर्मी जब ड्यूटी से वापस थाने पहुंचता है तो रात 12:00 बजे उसे बताया जाता है कि फला जगह पर सुबह 5:00 बजे  VIP ड्यूटी या  सुरक्षा ड्यूटी हेतु पहुंचना है ! जो कि 50 किलोमीटर से 500 किलोमीटर तक दूरी हो सकती है ! उसका यात्रा खर्चा खाने का खर्चा सब कुछ स्वयं अपने पास से करना पड़ता है चाहे जैसे हो ! हालांकि राजपत्रित अधिकारी जो हर तरह से सक्षम होते हैं उन्हें इसकी चिंता बिल्कुल नहीं करनी पड़ती ! उन्हें यात्रा के लिए गाड़ी एवं ड्यूटी के लिए होटल में कमरा या गेस्ट रूम उपलब्ध कराया जाता है, तो हमें भी कुछ पैसा Advance मिले जिससे कि इस तरह की ड्यूटी में कोई दिक्कत ना हो ! एक समिति इसके लिए भी बनाओ......

 पुलिस को छोड़ कर सारे राज्य कर्मचारी 1 साल में लगभग 90 दिन राजकीय अवकाश के कारण छुट्टी पर रहते हैं ! जबकि हम इन अवकाशों का 1 घंटे भी उपयोग नहीं कर पाते और ड्यूटी करते हुए यह अवकाश गुजर जाते हैं ! उसके एवज में मात्र 30 दिन का वेतन मिलता है, वह भी अगर उपार्जित अवकाश ले लिया तो बीच में पड़ने वाले राजकीय अवकाशों का वेतन काट कर भुगतान किया जाता है ! जबकि ड्यूटी के दौरान अगर हम राजकीय अवकाश में ड्यूटी करते हैं तो उस अवकाश के बदले में भी हमें वेतन मिलना चाहिए जो कि नहीं मिलता है ! एक समिति इसके लिए भी बनाओ........

 पुलिस आवास जो कि बद से बदतर स्थिति में है ! एक छोटे से हाल में 10 पुलिसकर्मी अपनी चारपाई, अपने बक्से, अपनी मच्छरदानी, अपने बैग, वर्दी, बर्तन के साथ किस तरह गुजारा कर रहे हैं ! और लैट्रिंग से लेकर खाने और नहाने तक के लिए किस तरह लाइन में लगना पड़ता है ! इसके निदान हेतु भी एक समिति बनाओ........

  1861 का पुलिस एक्ट..... जो की अंग्रेजों द्वारा इसलिए बनाया गया था की पुलिसकर्मियों ने उनके द्वारा की जा रही ज्यादतियों के विरुद्ध 1857 में  क्रांति का ऐसा अलख जगाया था........  जिस के महानायक मंगल पांडे थे ! जो स्वयं एक पुलिसकर्मी थे ....उसको दबाने के लिए 4 साल बाद 1861 में दमनकारी पुलिस एक्ट बनाया गया क्योंकि उस समय पुलिस विभाग के बड़े पदों पर अंग्रेज ऑफिसर होते थे और छोटे पदों पर भारतीय होते थे! लेकिन अब जब बड़े और छोटे दोनों पदों पर भारतीय हैं तो फिर इस दमनकारी एक्ट के बदलाव के लिए भी एक समिति बनाओ.............

 पुलिसकर्मी आपके अनुशासन  नामक हंटर की मार से इतना लाचार और बेबस हो चुके हैं की  इसके लिए भी जल्द से जल्द एक समिति बना दो जो की अति आवश्यक हैं !

समस्याएं बहुत हैं ....लेकिन पहले जरूरी वाली इतनी समस्याओं पर समिति बनाओ फिर आगे बताएंगे और क्या-क्या समस्याएं हैं !

 अगर आप अनफिट पुलिसकर्मियों की या राज्य कर्मचारियों की आवश्यक रिटायरमेंट के लिए समिति बना रहे हैं तो मेरी नजर में ज्यादातर 50 वर्ष से ऊपर की  आयु के अनफिट कर्मियों में बड़े अधिकारी हैं ! शुरुआत उन से की जाए तो एक मिसाल बनेगी......

 वैसे अभी तक जो हुआ है उसमें छोटे कर्मचारी को ही जबरदस्ती रिटायरमेंट दिया गया है........

यही निर्णय शासन के जो महत्वपूर्ण अंग मंत्री विधायक नेता आदि हैं जिनकी शारीरिक क्षमता एवं वैचारिक कुशलता अति उच्च स्तर की होनी चाहिए ! उनके साथ भी ऐसा ही हो, क्योंकि उन्हें  हमारी अपेक्षा काफी बड़े निर्णय, काफी ज्यादा आवागमन करना पड़ता है ! तो सबसे ज्यादा जरूरी यही है की प्राथमिक स्तर पर शुरुआत इन्हीं से की जाए ! इसके लिए भी एक समिति बनाओ...

दलितों का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

जानिए दलितों का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान-

अक्सर सवर्ण बंधुओ द्वारा यह प्रश्न किया जाता है की दलितों का
आजादी की लड़ाई में क्या योगदान रहा है , वे गाहे बेगाहे सवर्ण
क्रांतिकारियो की लिस्ट दिखा के यह साबित करने की कोशिश करते हैं की, सारी आज़ादी की लड़ाई उन्होंने ही लड़ी बाकी अछूत दलित तो कुछ नहीं करते थे ।
यह मानसिकता वह है जो हजारो सालों से चली आ रही है ,इसी
मानसिकता के चलते एकलव्य का अंगूठा कटवा के उसके बाद अर्जुन को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर की पदवी दिला दी जाती है ।

खैर, मैं आपको प्राचीन काल में नहीं अपितु इतिहास में ले चलता हूँ,

सब जानते हैं की आज़ादी की लड़ाई की शुरुआत 1857 में मंगल पाण्डे से शुरू हुई । हालांकी मंगल पाण्डे को अंग्रेजो से बगावत करने की प्रेरणा मातादीन वाल्मीकि से मिली वर्ना, पाण्डे जी जीवन भर अंग्रेजो की नौकरी ही करते रहते ।

मातादीन वाल्मिकि को अछूत होने के नाते भुला दिया गया ।
पर यहां आपको मैं बताऊंगा की आज़ादी की प्रथम लड़ाई 1857 में मंगल पाण्डे द्वारा नहीं लड़ी गई थी ,बल्कि, आज़ादी की लड़ाई 1804
में ही शुरू हो गई थी । और यह लड़ाई लड़ी गई थी छतरी के नबाब
द्वारा, छतरी के नबाब का अंग्रेजो से लड़ने वाला परमवीर योद्धा
था "ऊदैया चमार" ,जिसने सैंकड़ो अंग्रेजो को मौत के घाट उतार दिया था ।
उसकी वीरता के चर्चे अलीगढ़ के आस-पास के क्षेत्रो में आज
भी सुनाई देते हैं ,उसको 1807 में अंग्रेजो द्वारा फाँसी दे दी गई थी ।

उसके बाद आता है बाँके चमार, बाँके जौनपुर जिले के मछली
तहसील के गाँव कुँवरपुर के निवासी थे , उनकी अंग्रेजो में इतनी
दहशत थी की सन 1857 के समय उनके ऊपर 50 हजार का इनाम रखा था अंग्रेजो ने ।

अब आप सोचिये कि, जब "2 पैसे" की इतनी कीमत थी की उस
से बैल ख़रीदा जा सकता था तो उस समय "50 हजार" का इनाम कितना बड़ा होगा ।

वीरांगना झलकारी बाई को कौन नहीं जानता ? रानी झाँसी से बढ़ के
हिम्मत और साहस था उनमें , वे चमार जाति की उपजाति कोरी जाति से थी ।
पर दलित होने के कारण उनको पिछे धकेल दिया गया और
रानी झाँसी का गुणगान किया गया ।

1857 में ही राजा बेनी माधव (खलीलाबाद) अंग्रेजो द्वारा कैद किये
जाने पर उन्हें छुड़ाने वाला अछूत वीरा पासी था !
इसके अलावा कुछ और दलित क्रान्तिकारियो के नाम आप लोगो को
बताना चाहता हूँ जो गोरखपुर अभिलेखों में दर्ज हैं ।
1- आज़ादी की लड़ाई में चौरा-चौरी काण्ड एक मील का पत्थर है ,
इसी चौरा-चौरी कांड के नायक थे "रमापति चमार" , इन्ही की
सरपस्ति में हजारो दलितों की भीड़ ने चौरा-चौरी थाने में आग लगा दी थी जिससे 23 अंग्रेज सिपाहियों की जलने से मौत हो गई थी ।
इतिहासकार श्री. डी सी दिनकर ने अपनी पुस्तक "स्वतंत्रता संग्राम" में 'अछूतों का योगदान' में उल्लेख किया है की- "अंग्रेजो ने इस काण्ड में सैंकड़ो दलितों को गिरफ्तार किया ।
228 दलितों पर सेशन
सुपुर्द कर अभियोग चला ।
निचली अदालत ने 172 दलितों को फाँसी
की सजा सुनाई।
इस निर्णय की ऊपरी अदालत में अपील की गई , ऊपरी अदालत ने 19 को फाँसी, 14 को आजीवन कारवास , शेष को आठ से पांच साल की जेल हुई ।

2 जुलाई 1923 को 18 अन्य दलितों के साथ चौरा-चौरी कांड के नायक रमापति को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया ।

चौरा-चौरी कांड में फाँसी तथा जेल की सजा पाने वाले क्रन्तिकारी
दलितों के नाम थे-

1- सम्पति चमार- थाना- चौरा, गोरखपुर, धारा 302 के तहत
1923 में फांसी,

2- अयोध्या प्रसाद पुत्र महंगी पासी- ग्राम - मोती पाकड़, जिला
चौरा, गोरखपुर , सजा - फाँसी

3- कल्लू चमार, सुपुत्र सुमन - गाँव गोगरा, थाना-झगहा, जिला
गोरखपुर, सजा - 8 साल की कैद

4- गरीब दास , पुत्र महंगी पासी - सजा धारा 302 के तहत
आजीवन कारावास

5- नोहरदास, पुत्र देवीदीन- ग्राम - रेबती बाजार, थाना चौरा-चौरी, गोरखपुर, आजीवन कारवास

6-श्री फलई , पुत्र घासी प्रसाद- गाँव- थाना चौरा-चौरी , 8
साल की कठोर कारवास,

7-  बिरजा, पुत्र धवल चमार- गाँव - डुमरी, थाना चौरा, धारा 302
के तहत 1924 में आजीवन कारावास

8- श्री. मेढ़ाइ, पुत्र बुधई- थाना चौरा, गोरखपुर, आजीवन कारवास....

इसके अलावा 1942 के भारत छ़ोडो आंदोलन में मारने वाले और भाग लेने वाले दलितों की संख्या हजारो में हैं जिसमें से कुछ प्रमुख हैं -

1-मेंकुलाल ,पुत्र पन्ना लाल, जिला सीता पुर यह बहादुर दलित 1932 के मोतीबाग कांड में शहीद हुआ ।

2- शिवदान ,पुत्र दुबर - निवासी ग्राम - पहाड़ीपुर, मधुबन
आजमगढ़ , इन्होंने 1942 के 15 अगस्त को मधुबन थाना के प्रात: 10 बजे अंग्रेजो पर हल्ला बोला , अंग्रेजो की गोली से शहीद हुए ।

इसके अलावा दलित अमर शहिदों का भारत अभिलेख से प्राप्त
परिचय - मुंडा, मालदेव, सांठे, सिंहराम, सुखराम, सवराउ, आदि बिहार प्रान्त से ।

आंध्र प्रदेश से 100 से ऊपर दलित नेता व् कार्यकर्ता बंदी ।

बंगाल से 45 दलित नेता बलिदान हुए आजादी की लड़ाई में...

ऐसे ही देश के अन्य राज्यो में भी दलितों ने आज़ादी के संग्राम में
अपनी क़ुरबानी दी ।

अरे हाँ.... !!

सबसे महत्वपूर्ण नाम लेना तो भूल ही गया , जलियाँवाला बाग का
बदला लेने वाले और लन्दन जा के माइकल आडेवयार को गोलियों से भून देने वाले दलित "शहीद ऊधम सिंह...." जिसका नाम सुनते ही
अंग्रेजो में डर की लहर दौड़ जाती थी ।
ये सब दलित "स्वतंत्रता सेनानी" और हजारो ऐसे ही गुमनाम शहीद जो 'दलित' होने के नाते कभी भी मुख्य पंक्ति में नहीं आ पाये,
देश को नजर आये तो सिर्फ सवर्ण ।


क्या हमारे मूलनिवासी महापुरुष ब्राह्मणों द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ़ चलाए जाने वाले आंदोलन में शामिल थे ?

१. "शुद्र, अतिशूद्रों(मूलनिवासी बहुजन) ने ब्राह्मणों के गुलामी से आझाद होने के लिए जल्दी कोशिश करनी चाहिए, जबतक अंग्रेज भारत में हैं, तबतक अवसर हैं."
- राष्ट्रपिता महात्मा जोतीराव फुले
(गुलामगिरी)

२. "मेरे जैसे राजा को आप ब्राह्मण लोग सोचने नहीं देते, अगर आप लोगों को आझादी मिल गई, तो मेरी प्रजा का क्या होगा?"
- लोकराजे राजश्री छत्रपती शाहू महाराज
(तिलक को जवाब देते हुए)

३. "गुलामी में जिनकी हम बातें सहन नहीं करते, आझादी में उनकी हमें लाते खानी होगी."
- बाबासाहब डा आंबेडकर
(बहिष्कृत भारत)

४. "यदि ईसी तरह से गाँधीजी का आंदोलन चलता रहा तो ईस देश में Democracy(लोकतंत्र) नहीं, बल्कि Brahmanocracy(ब्राह्मणतंत्र) आएगी."
- पेरियार रामासामी नायकर
(ईरोड़ प्रेस कॉन्फ्रेंस, काँग्रेस से इस्तीफा देने के बाद)

५. "यह आझादी झूठी हैं, देश की जनता भूखी हैं."
- अण्णाभाऊ साठे
(१६ अगस्त, १९४७ आझाद मैदान ६० हजार लोंगों का मोर्चा को संबोधित करते हुए)

ईन सभी महापुरुषों ने आझादी के आंदोलन ने शामिल होने से इनकार कर दिया.

अब सवाल हैं कि काँग्रेस द्वारा चलाया जानेवाला आझादी का आंदोलन क्या सभी  लोगों के आझादी का आंदोलन था?

इसका जवाब यह हैं कि हमारे महापुरुष यह जानते थे कि काँग्रेस द्वारा चलाया जानेवाला आझादी का आंदोलन सभी लोगों के आझादी का आंदोलन नहीं था, केवल मात्र ब्राह्मणों के अंग्रेज़ो से आझादी हासिल करने का आंदोलन था, हमें दोबारा गुलाम बनाने का आंदोलन था.


इसीलिए हमारे महापुरुष अंग्रेज़ो के खिलाफ चलाया जा रहे आझादी के आंदोलन ने शामिल नहीं हुए, बल्कि वे अपना अलग से आंदोलन चला रहे थे.


सरकारी नौकरियों में आरक्षण हमेशा के लिये है......
ना की सिर्फ १० वर्षो के लिए। ..
संविधान में आरक्षण की जो व्यवस्था की गयी है, उसके अनुसार सरकारी शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में अजा एवं अजजा वर्गों का आरक्षण स्थायी संवैधानिक व्यवस्था है।.

👉 26 जनवरी, 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ, जिसे 67 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और इस दौरान विधिक शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

इसके बावजूद भी सभी दलों की सरकारों और सभी राजनेताओं द्वारा लगातार यह

👉 झूठ बेचा जाता रहा कि अजा एवं अजजा वर्गों को सरकारी शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में मिला आरक्षण शुरू में मात्र 10 वर्ष के लिये था,

जिसे हर दस वर्ष बाद बढाया जाता रहा है।

 इस झूठ को अजा एवं अजजा के राजनेताओं द्वारा भी जमकर प्रचारित किया गया। जिसके पीछे अजा एवं अजजा को डराकर उनके वोट हासिल करने की घृणित और निन्दनीय राजनीति मुख्य वजह रही है।
 लेकिन इसके कारण अनारक्षित वर्ग के युवाओं के दिलोदिमांग में अजा एवं अजजा वर्ग के युवाओं के प्रति नफरत की भावना पैदा होती रही। उनके दिमांग में बिठा दिया गया कि जो आरक्षण केवल 10 वर्ष के लिये था, वह हर दस वर्ष बाद वोट के कारण बढाया जाता रहा है और इस कारण अजा एवं अजजा के लोग सवर्णों के हक का खा रहे हैं। इस वजह से सवर्ण और आरक्षित वर्गों के बीच मित्रता के बजाय शत्रुता का माहौल पनता रहा।

मुझे इस विषय में इस कारण से लिखने को मजबूर होना पड़ा है, क्योंकि अजा एवं अजजा वर्गों को अभी से डराया जाना शुरू किया जा चुका है कि 2020 में सरकारी नौकरियों और सरकारी शिक्षण संस्थानों में मिला आरक्षण अगले दस वर्ष के लिये बढाया नहीं गया तो अजा एवं अजजा के युवाओं का भविष्य बर्बाद हो जाने वाला है।
जबकि सच्चाई इसके ठीक विपरीत है।

संविधान में आरक्षण की जो व्यवस्था की गयी है, उसके अनुसार सरकारी शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में अजा एवं अजजा वर्गों का आरक्षण स्थायी संवैधानिक व्यवस्था है।

 👉जिसे न तो कभी बढ़ाया गया और न ही कभी बढ़ाये जाने की जरूरत है,

क्योंकि सरकारी नौकरी एवं सरकारी शिक्षण संस्थानों में मिला हुआ

👉आरक्षण अजा एवं अजजा वर्गों को

👉मूल अधिकार

के रूप में प्रदान किया गया है।

मूल अधिकार संविधान के स्थायी एवं अभिन्न अंग होते हैं, न कि कुछ समय के लिये।

इस विषय से अनभिज्ञ पाठकों की जानकारी हेतु स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि

👉भारतीय संविधान के भाग-3 के अनुच्छेद 12 से 35 तक मूल अधिकार वर्णित हैं।

मूल अधिकार संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा होते हैं, जिन्हें किसी भी संविधान की रीढ़ की हड्डी कहा जाता है, जिनके बिना संविधान खड़ा नहीं रह सकता है।

इन्हीं मूल अधिकारों में
👉अनुच्छेद 15 (4) में

 सरकारी शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिये अजा एवं अजजा वर्गों के विद्यार्थियों के लिये आरक्षण की स्थायी व्यवस्था की गयी है और

👉 अनुच्छेद 16 (4) (4-क) एवं (4-ख)

में सरकारी नौकरियों में नियुक्ति एवं

 पदोन्नति के आरक्षण

की स्थायी व्यवस्था की गयी है,

 जिसे न तो कभी बढ़ाया गया और न ही 2020 में यह समाप्त होने वाला है।

यह महत्वपूर्ण तथ्य बताना भी जरूरी है कि संविधान में मूल अधिकार के रूप में जो प्रावधान किये गये हैं, उसके पीछे संविधान निर्माताओं की देश के नागरिकों में समानता की व्यवस्था स्थापित करना मूल मकसद था, जबकि इसके विपरीत लोगों में लगातार यह भ्रम फैलाया जाता रहा है कि आरक्षण लोगों के बीच असमानता का असली कारण है।

👉  सुप्रीम कोर्ट का साफ शब्दों में कहना है कि संविधान की मूल भावना यही है कि देश के सभी लोगों को कानून के समक्ष समान समझा जाये और सभी को कानून का समान संरक्षण प्रदान किया जाये, लेकिन समानता का अर्थ आँख बन्द करके सभी के साथ समान व्यवहार करना नहीं है, बल्कि समानता का मतलब है- एक समान लोगों के साथ एक जैसा व्यवहार। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये संविधान में वंचित वर्गों को वर्गीकृत करके उनके साथ एक समान व्यवहार किये जाने की पुख्ता व्यवस्था की गयी है। जिसके लिये समाज के वंचित लोगों को अजा, अजजा एवं अपिवर्ग के रूप में वर्गीकृत करके, उनके साथ समानता का व्यवहार किया जाना संविधान की भावना के अनुकूल एवं संविधान सम्मत है। इसी में सामाजिक न्याय की मूल भावना निहित है। आरक्षण को कुछ दुराग्रही लोग समानता के अधिकार का हनन बतलाकर समाज के मध्य अकारण ही वैमनस्यता का वातावरण निर्मित करते रहते हैं। वास्तव में ऐसे लोगों की सही जगह सभ्य समाज नहीं, बल्कि जेल की काल कोठरी और मानसिक चिकित्सालय हैं।
अब सवाल उठता है कि यदि अजा एवं अजजा के लिये सरकारी सेवाओं और सरकारी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की स्थायी व्यवस्था है तो

👉संसद द्वारा हर 10 वर्ष बाद जो आरक्षण बढ़ाया जाता रहा है, वह क्या है?
इस सवाल के उत्तर में ही देश के राजनेताओं एवं राजनीति का कुरूप चेहरा छुपा हुआ है।
संविधान के

👉 अनुच्छेद 334

में यह व्यवस्था की गयी थी कि लोक सभा और विधानसभाओं में अजा एवं अजजा के प्रतिनिधियों को मिला आरक्षण 10 वर्ष बाद समाप्त हो जायेगा। इसलिये इसी आरक्षण को हर दस वर्ष बाद बढाया जाता रहा है,

जिसका अजा एवं अजजा के लिये सरकारी सेवाओं और सरकारी शिक्षण संस्थाओं में प्रदान किये गये आरक्षण से कोई दूर का भी वास्ता नहीं है। अजा एवं अजजा के कथित जनप्रतिनिधि इसी आरक्षण को बढाने को अजा एवं अजजा के नौकरियों और शिक्षण संस्थानों के आरक्षण से जोड़कर अपने वर्गों के लोगों का मूर्ख बनाते रहे हैं और इसी वजह से अनारक्षित वर्ग के लोगों में अजा एवं अजजा वर्ग के लोगों के प्रति हर दस वर्ष बाद नफरत का उफान देखा जाता रहा है। लेकिन इस सच को राजनेता उजागर नहीं करते।

हाँ, ये बात अलग है कि करीब-करीब हर विभाग, संस्थान, उपक्रम आदि में कई वर्षों से निजीकरण की प्रक्रिया को अंजाम देकर अजा एवं अजजा के आरक्षण को रोकने की सफल कोशिश की जा रही है ।

👉 अतः जरूरत है कि हम सभी इस जानकारी को अपने सभी बहुजन समाज के लोगो तक पहुंचाने की कोशिश करे। और इस पर आवाज उठाये ताकि ये गूंगी बहरी मनुवादियो की सरकार हमें फिर से उसी अंधकार की खाई में ना डाल दे.



*किताबों को खंगालने से हमें यह पता चला*
कि ‘बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय‘ (BHU) के संस्थापक *पंडित मदनमोहन मालवीय जी* नें 14 फ़रवरी 1931 को Lord Irwin के सामने *भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव* की फांसी रोकने के लिए Mercy Petition दायर की थी ताकि उन्हें फांसी न दी जाये और कुछ सजा भी कम की जाएl Lord Irwin ने तब मालवीय जी से कहा कि आप कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष है इसलिए आपको इस Petition के साथ नेहरु, गाँधी और कांग्रेस के कम से कम 20 अन्य सदस्यों के पत्र भी लाने होंगेl

जब मालवीय जी ने भगत सिंह की फांसी रुकवाने के बारे में नेहरु और गाँधी से बात की तो उन्होंने इस बात पर चुप्पी साध ली और अपनी सहमति नहीं दीl इसके अतिरिक्त गाँधी और नेहरु की असहमति के कारण ही कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी अपनी सहमति नहीं दीl

*Retire होने के बाद Lord Irwin ने स्वयं London में कहा था कि "यदि नेहरु और गाँधी एक बार भी भगत सिंह की फांसी रुकवाने की अपील करते तो हम निश्चित ही उनकी फांसी रद्द कर देते, लेकिन पता नहीं क्यों मुझे ऐसा महसूस हुआ कि गाँधी और नेहरु को इस बात की हमसे भी ज्यादा जल्दी थी कि भगत सिंह को फांसी दी जाए”*

Prof. Kapil Kumar की किताब के अनुसार ”गाँधी और Lord Irwin के बीच जब समझौता हुआ उस समय इरविन इतना आश्चर्य में था कि गाँधी और नेहरु में से किसी ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को छोड़ने के बारे में चर्चा तक नहीं कीl”

 *Lord Irwin ने अपने दोस्तों से कहा कि ‘हम यह मानकर चल रहे थे कि गाँधी और नेहरु भगत सिंह की रिहाई के लिए अड़ जायेंगे और हम उनकी यह बात मान लेंगेl*

भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी लगाने की इतनी जल्दी तो अंग्रेजों को भी नही थी जितनी कि गाँधी और नेहरु को थी क्योंकि *भगत सिंह तेजी से भारत के लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहे थे जो कि गाँधी और नेहरु को बिलकुल रास नहीं आ रहा था*l यही कारण था कि वो चाहते थे कि जल्द से जल्द भगत सिंह को फांसी दे दी जाये, यह बात स्वयं इरविन ने कही हैl

इसके अतिरिक्त लाहौर जेल के जेलर ने स्वयं गाँधी को पत्र लिखकर पूछा था कि ‘इन लड़कों को फांसी देने से देश का माहौल तो नहीं बिगड़ेगा?‘ *तब गाँधी ने उस पत्र का लिखित जवाब दिया था कि ‘आप अपना काम करें कुछ नहीं होगाl’*


*इस सब के बाद भी यादि कोई कांग्रेस को देशभक्त कहे तो निश्चित ही हमें उसपर गुस्सा भी आएगा और उसकी बुद्धिमत्ता पर रहम भी*